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अम्बिकापुर@आधे घंटे की जगह 5-10 मिनट पानी,आधी क्षमता पर चल रहे फिल्टर प्लांट! कांग्रेस के निरीक्षण में खुलीं जलापूर्ति व्यवस्था की कई परतें

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  • 17.5 और 18 एमएलडी क्षमता वाले प्लांटों से कम उत्पादन,खराब उपकरण,एलम की कमी और स्टाफ का अभाव…कांग्रेस ने नगर निगम पर लगाया बदइंतजामी का आरोप


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शहर में लगातार गहराते पेयजल संकट के बीच नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कई वार्डों में आधे घंटे की बजाय केवल 5 से 10 मिनट पानी आने,कम दबाव और गंदे पानी की शिकायतों के बीच कांग्रेस पार्षदों ने नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में तकिया और कतकालो फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कांग्रेस ने दावा किया कि जल संकट का कारण केवल बिजली कटौती नहीं,बल्कि फिल्टर प्लांटों का खराब रखरखाव,तकनीकी खामियां और प्रशासनिक लापरवाही भी है। कांग्रेस का कहना है कि नगर निगम प्रशासन अब तक बिजली कटौती को जल संकट का मुख्य कारण बताता रहा,लेकिन मौके पर निरीक्षण और लॉग बुक के अवलोकन से कई ऐसी कमियां सामने आईं,जिनके कारण शहर की जलापूर्ति क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने दावा किया कि 17.5 एमएलडी क्षमता वाले तकिया फिल्टर प्लांट से केवल 10 से 11 एमएलडी तथा 18 एमएलडी क्षमता वाले कतकालो प्लांट से केवल 12 से 13 एमएलडी पानी का शोधन और वितरण किया जा रहा है। यानी दोनों संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रहे हैं, जिसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति पर पड़ रहा है।
एलम का तीन महीने नहीं,सिर्फ तीन-चार दिन का स्टॉक : निरीक्षण में जल शोधन के लिए उपयोग होने वाले एलम (फिटकरी) का पर्याप्त भंडारण भी नहीं मिला। कांग्रेस का दावा है कि जहां कम से कम तीन महीने का स्टॉक होना चाहिए, वहां केवल तीन से चार दिन का स्टॉक उपलब्ध था। बरसात में नदी का पानी अधिक मटमैला होने से एलम की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में रसायन उपलब्ध नहीं होने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
जनरेटर होने के बावजूद
नहीं होता उपयोग

निरीक्षण में यह भी आरोप लगाया गया कि बिजली बंद होने की स्थिति में उपलब्ध जनरेटर का नियमित उपयोग नहीं किया जाता, जिससे जलापूर्ति और अधिक प्रभावित होती है।
फिल्टर बेड पर काई-घास,महीनों से सफाई नहीं…
निरीक्षण में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि फिल्टर प्लांट का एक महत्वपूर्ण मड पंप लंबे समय से खराब पड़ा है। वहीं फिल्टर बेड की महीनों से सफाई नहीं होने के कारण उस पर काई और घास तक जम गई है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे जल शोधन क्षमता प्रभावित हो रही है और पानी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
32 कर्मचारियों की जगह मिले सिर्फ 6
कांग्रेस नेताओं के अनुसार अनुबंध के तहत दोनों प्लांटों में तीन शिफ्टों में कुल 32 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए,लेकिन निरीक्षण के दौरान दोनों प्लांटों में कुल मिलाकर केवल छह कर्मचारी ही कार्यरत मिले। कांग्रेस ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि इतने कम स्टाफ के भरोसे शहर की पेयजल व्यवस्था संचालित नहीं की जा सकती।
तीन क्लैरिफ्लोकुलेटर बंद, स्पेयर पार्ट तक नहीं
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दोनों प्लांटों में कुल छह क्लैरिफ्लोकुलेटर में से तीन लंबे समय से बंद हैं। इसके अलावा कतकालो प्लांट में कोई उपकरण खराब होने पर उसके पुर्जे पुणे या मुंबई से मंगाने पड़ते हैं,जबकि स्थानीय स्तर पर आवश्यक स्पेयर पार्ट्स का भी भंडारण नहीं किया गया है। इससे मरम्मत में कई सप्ताह लग जाते हैं और जलापूर्ति प्रभावित होती है।
कलेक्टर से करेंगे शिकायत
नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने आरोप लगाया कि नगर निगम के सत्तापक्ष और प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर की पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते फिल्टर प्लांटों का रखरखाव,उपकरणों की मरम्मत और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती तो नागरिकों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। कांग्रेस पार्षदों ने सोमवार को कलेक्टर से मुलाकात कर निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं की शिकायत करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, फिल्टर प्लांटों की तत्काल मरम्मत और शहर में नियमित एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग करने की बात कही है।


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