ट्रायल पूरा होने तक सिर्फ पंजीकृत गौशाला या गोरक्षण संस्थान को ही सौंपे जाएंगे जब्त पशु
बिलासपुर,25 जुलाई 2026। तस्करी और कत्लखाने ले जाए जा रहे कृषि में उपयोग होने वाले मवेशियों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि मुकदमा चलने के दौरान पुलिस द्वारा जब्त किए गए मवेशियों की सुपुर्दगी किसी भी निजी व्यक्ति, वाहन चालक या उसके कथित मालिक को नहीं दी जा सकती। जब तक मामले की सुनवाई यानी ट्रायल पूरा नहीं हो जाता, तब तक जब्त मवेशियों को सिर्फ और सिर्फ पंजीकृत गौशाला, गोसदन या गोरक्षण संस्थान की कस्टडी में ही रखा जाएगा। दरअसल, जशपुर जिले के मनोरा पुलिस चौकी में ट्रक क्रमांक एचआर 55 क्यू 5980) को पकड़ा था गया था। ट्रक में 23 नर और 5 मादा भैंसों को छत्तीसगढ़ से झारखंड के कत्लखाने ले जाया जा रहा था।
सीजेएम और सेशन कोर्ट ने खारिज की थी अर्जी
इसके बाद मवेशियों के मालिक गुमला झारखंड निवासी मो. वसीम कुरैशी ने अदालत से मवेशियों को सुपुर्दनामे पर मांगने के लिए अर्जी लगाई थी। सीजेएम जशपुर और फिर सेशन कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
निचली अदालतों के आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच ने पूर्व के जलील अंसारी बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए प्रकरण को बड़ी पीठ (लार्जर बेंच) के पास भेज दिया।
कानून का उद्देश्य खत्म हो जाएगाः हाईकोर्ट
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 7 और 18 स्पष्ट रूप से कहती हैं कि मुकदमे के अंतिम निर्णय तक जब्त पशुओं को पंजीकृत गौशालाओं की अभिरक्षा में रखा जाएगा। अदालत ने कहा कि यदि पशुओं की तस्करी के आरोपियों को ही मवेशी वापस सौंप दिए जाएं।
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