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सूरजपुर@ राजस्व न्यायालय का बड़ा फैसला : सरकारी सड़क की जमीन से रितेश अग्रवाल को बेदखल करने का आदेश

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सूरजपुर में सरकारी सड़क पर कब्जे मामले में ट्रिपल स्टोरी भवन पर चला राजस्व विभाग का डंडा…

  • शासकीय सड़क पर अतिक्रमण साबित,ट्रिपल स्टोरी भवन हटाने का आदेश
  • सरकारी भूमि पर ट्रिपल स्टोरी भवन! तीन दिन में अतिक्रमण हटाओ,वरना होगी बेदखली…
  • अतिक्रमण पर राजस्व का बड़ा एक्शन : सरकारी सड़क पर बने भवन को हटाने का आदेश
  • सड़क पर भवन खड़ा हो गया और सिस्टम देखता रहा! अब तहसीलदार ने जारी किया बेदखली आदेश
  • खसरा क्रमांक 2630 की शासकीय सड़क भूमि पर 0.033 हेक्टेयर में ट्रिपल स्टोरी भवन,कार्यालय,फैक्ट्री और बाउंड्रीवाल निर्माण को माना अतिक्रमण…तीन दिन में पालन नहीं होने पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई।

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,24 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
सूरजपुर शहर में शासकीय सड़क की भूमि पर कथित अतिक्रमण कर ट्रिपल स्टोरी भवन, कार्यालय,फैक्ट्री और बाउंड्रीवाल निर्माण किए जाने के मामले में तहसीलदार न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है,लंबी सुनवाई, राजस्व अभिलेखों,पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट,दोनों पक्षों के तर्क तथा उच्च न्यायालय के आदेश के संदर्भों पर विचार करने के बाद तहसीलदार ने भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित अनावेदक रितेश अग्रवाल (पिता-सुरेश अग्रवाल) को शासकीय भूमि से बेदखल करने का आदेश जारी किया है,न्यायालय ने तीन दिवस के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं होता है,तो राजस्व विभाग नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई करेगा।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व अभिलेखों के अनुसार सूरजपुर नगर स्थित खसरा क्रमांक 2630,कुल रकबा 1.975 हेक्टेयर शासकीय सड़क मद में दर्ज है,पटवारी हल्का क्रमांक-08 द्वारा न्यायालय को प्रस्तुत प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि उक्त शासकीय भूमि में से लगभग 0.033 हेक्टेयर क्षेत्र पर रितेश अग्रवाल द्वारा ट्रिपल स्टोरी भवन,कार्यालय,फैक्ट्री तथा बाउंड्रीवाल का निर्माण कर कब्जा किया गया है,रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर विधिवत सुनवाई प्रारंभ की गई, राजस्व विभाग का कहना था कि सड़क मद में दर्ज भूमि पर निजी निर्माण किया जाना कानूनन अतिक्रमण की श्रेणी में आता है,इसलिए कार्रवाई आवश्यक है।
आपत्तिकर्ता ने उठाया सरकारी भूमि पर कब्जे का मुद्दा-प्रकरण में आपत्तिकर्ता कुंजबिहारी गुप्ता ने न्यायालय में विस्तृत आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा कि शासकीय सड़क की भूमि पर पक्का भवन बनाकर फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है,उन्होंने तर्क दिया कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निजी कब्जा न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी हनन है,उन्होंने न्यायालय से तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग की, सुनवाई के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय,बिलासपुर के रिट क्रमांक 866/2026 (डी.के. सोनी एवं अन्य बनाम शासन) में पारित आदेश की प्रति भी प्रस्तुत की और कहा कि मामले का शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने क्यों नहीं माना बचाव पक्ष का तर्क?-सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पटवारी की रिपोर्ट,राजस्व अभिलेख,दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज तथा आपत्तियों का परीक्षण किया,न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित भूमि शासकीय सड़क मद में दर्ज है और उस पर निर्माण कर कब्जा किया जाना प्रमाणित होता है,न्यायालय ने यह भी माना कि अनावेदक द्वारा प्रस्तुत आपत्तियां उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अतिक्रमण के निष्कर्ष को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसी आधार पर भू-राजस्व संहिता,1959 की धारा 248 के तहत अतिक्रमण हटाने एवं बेदखली का आदेश पारित किया गया।
तीन दिन का समय, फिर होगी प्रशासनिक कार्रवाई-तहसीलदार न्यायालय ने आदेश में स्पष्ट कहा है कि संबंधित अनावेदक तीन दिवस के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाकर न्यायालय में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें, यदि निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं किया जाता है तो राजस्व विभाग स्वयं नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई करेगा, इस आदेश के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी इसे समयबद्ध तरीके से लागू कराने की होगी।
अनावेदक ने पटवारी रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल
दूसरी ओर अनावेदक रितेश अग्रवाल ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर पूरे प्रकरण को चुनौती दी,उन्होंने कहा कि पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा तैयार पंचनामा पक्षपातपूर्ण है और उनकी अनुपस्थिति में तैयार किया गया,उनके अनुसार पंचनामा बनाते समय उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई और न ही उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की गई,उन्होंने यह भी कहा कि पुराने राजस्व नक्शों का सही परीक्षण नहीं किया गया तथा जिस कथित सड़क का उल्लेख किया जा रहा है,उसकी वास्तविक चौड़ाई और सीमाएं वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित नहीं की गईं,उनका दावा था कि जिस भूमि पर निर्माण है, वहां उनका परिवार तीन पीढि़यों से व्यापार कर रहा है और किसी प्रकार का नया अतिक्रमण नहीं किया गया,उन्होंने न्यायालय से दोनों पक्षों की उपस्थिति में पुनः सीमांकन कराने,संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने तथा आधुनिक सर्वे तकनीक के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
अब उठ रहे हैं कई अहम सवाल….
यह मामला केवल एक अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है, सबसे पहला सवाल यह है कि यदि निर्माण वास्तव में शासकीय सड़क की भूमि पर हुआ,तो ट्रिपल स्टोरी भवन,कार्यालय और फैक्ट्री का निर्माण पूरा होने तक संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? दूसरा प्रश्न यह है कि क्या निर्माण के दौरान नगर पालिका,राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने कोई निरीक्षण किया था? तीसरा सवाल यह है कि यदि अनावेदक की ओर से लगाए गए आरोप सही हैं और सीमांकन या पंचनामा प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है, तो क्या इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी?
क्या आगे बढ़ेगा कानूनी विवाद?
राजस्व न्यायालय का आदेश आने के बाद संभावना है कि संबंधित पक्ष उच्च न्यायालय या सक्षम न्यायिक मंच का दरवाजा खटखटा सकता है, यदि ऐसा होता है तो पूरे प्रकरण की कानूनी समीक्षा उच्च स्तर पर भी हो सकती है, वहीं यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो राजस्व विभाग को पुलिस बल के सहयोग से बेदखली की कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें…
सूरजपुर शहर के चर्चित इस प्रकरण में तहसीलदार न्यायालय ने अपना निर्णय सुना दिया है,अब सबसे महत्वपूर्ण चरण आदेश के क्रियान्वयन का है, यदि तीन दिन के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है,तो यह देखना होगा कि प्रशासन कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है,हालांकि,यह भी उल्लेखनीय है कि अनावेदक ने न्यायालय के समक्ष राजस्व निरीक्षण और सीमांकन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं, यदि वे आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हैं,तो मामले की आगे की दिशा न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी,फिलहाल तहसीलदार न्यायालय का आदेश प्रभावी है और प्रशासन के सामने उसे लागू कराने की जिम्मेदारी है।


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