बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्त संदेश,पॉक्सो न्यायालय ने सुनाई उम्रकैद
-संवाददाता-
सूरजपुर,23 जुलाई 2026(घटती-घटना)। सूरजपुर जिले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र से जुड़े नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों दोषियों को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय) आनंद प्रकाश वारियाल ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ऐसे मामलों में कानून के तहत कठोरतम दंड दिया जाएगा।
मार्च-अप्रैल 2025 की घटना, मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला- अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला मार्च-अप्रैल 2025 का है, नाबालिग पीडि़ता की मां ने थाना विश्रामपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70(2) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 4 एवं 6 के तहत अपराध दर्ज किया, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया और वैज्ञानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत विवेचना प्रारंभ की।
साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने माना दोषी-विवेचना के दौरान पुलिस ने पीडि़ता का चिकित्सीय परीक्षण कराया, आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए, गवाहों के बयान दर्ज किए तथा सभी औपचारिकताएं पूरी कर समय पर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोप सिद्ध हैं। इसके बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
पर्यटन स्थल से जुड़ा मामला, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल-यह मामला केनापारा फिश पॉइंट से जुड़ा है, जो सूरजपुर जिले का एक प्रमुख पर्यटन और भ्रमण स्थल माना जाता है, यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी पहुंचते हैं,इस घटना ने सार्वजनिक स्थलों, पर्यटन क्षेत्रों और सुनसान स्थानों पर बच्चों एवं किशोरियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है, यह भी सवाल उठता है कि ऐसे स्थानों पर निगरानी,सुरक्षा और जागरूकता को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
न्यायालय का समाज के नाम महत्वपूर्ण संदेश- फैसला सुनाते समय न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध केवल किसी एक परिवार के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध हैं, ऐसे मामलों में कानून किसी प्रकार की नरमी की अनुमति नहीं देता, न्यायालय ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की गतिविधियों पर संवेदनशील निगरानी रखें, उनसे नियमित संवाद बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति या घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें,ताकि समय रहते बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
तेज विवेचना और समयबद्ध सुनवाई बनी न्याय की आधारशिला- इस मामले में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई,समय पर आरोपियों की गिरफ्तारी, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और समयबद्ध चार्जशीट प्रस्तुत किए जाने के कारण न्यायालय में सुनवाई प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकी। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों ने भी दोष सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कड़ा फैसला बना नजीर- फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय का यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने का दुस्साहस करते हैं, यह निर्णय बताता है कि ऐसे मामलों में न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर कठोर दंड देने से पीछे नहीं हटेगा।
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