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सूरजपुर@ खाकी पर ब्लैकमेलिंग के आरोप,रेलवे कर्मचारी बोला पुलिस के डर से दिए दो लाख रुपये,अब भी मिल रही झूठे दुष्कर्म केस की धमकी

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  • सूरजपुर में खाकी कटघरे में : महिला संग मिलीभगत कर वसूली का आरोप,ऑडियो-वीडियो लेकर आईजी पहुंचा रेलवे कर्मचारी
    क्या थाना चौकी बन गया वसूली का अड्डा…पुलिस,महिला और दो लाख की कथित उगाही की शिकायत से मचा हड़कंप
    रेलवे कर्मचारी का सनसनीखेज आरोप पुलिस के सामने दिए डेढ़ लाख,फिर भी नहीं रुकी ब्लैकमेलिंग
    खाकी पर गंभीर सवाल कार्रवाई की जगह समझौता और वसूली…आईजी से जांच की मांग

    दो लाख की कथित उगाही, झूठे दुष्कर्म केस की धमकी और पुलिस की भूमिका पर सवाल,आईजी से लगाई गुहार
    शिकायतकर्ता का दावा— ऑडियो,वीडियो और ट्रांजेक्शन सबूतों के साथ पहुंचा आईजी दरबार
    ब्लैकमेलिंग या साजिश…महिला और पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप,जांच के घेरे में सूरजपुर पुलिस
    2023 से शुरू हुआ विवाद 2026 में पहुंचा आईजी कार्यालय,ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का दावा
    पुलिस अधीक्षक से लेकर आईजी तक पहुंची शिकायत,अब निष्पक्ष जांच सबसे बड़ा सवाल

  • -शमरोज खान-
    सूरजपुर,23 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
    छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, कभी फरियादियों की शिकायतों पर कार्रवाई में देरी, कभी समझौते के नाम पर दबाव और कभी पुलिसकर्मियों पर पक्षपात के आरोप चर्चा का विषय बनते रहे हैं,अब सरगुजा संभाग के सूरजपुर जिले से सामने आया एक मामला एक बार फिर खाकी को कठघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है,हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल यह पूरा मामला शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधिकारियों को दिए गए आवेदन पर आधारित है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्राम सोनपुर, तहसील भैयाथान निवासी तथा रेलवे विभाग में कार्यरत मोहम्मद कलीम अशरफ ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को विस्तृत शिकायत देकर आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 से वह एक महिला द्वारा कथित ब्लैकमेलिंग,पैसों की उगाही और झूठे दुष्कर्म प्रकरण में फंसाने की धमकियों का शिकार है, शिकायत में इससे भी अधिक गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने कानून के अनुसार कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से दबाव बनाकर समझौते की राह अपनाई और उसी दबाव में उससे लाखों रुपये दिलवाए गए, शिकायतकर्ता का कहना है कि अब उसके पास ऑडियो रिकॉर्डिंग,वीडियो रिकॉर्डिंग तथा ऑनलाइन लेन-देन के प्रमाण मौजूद हैं, जिन्हें उसने जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है।
    रिश्तेदारी से शुरू हुई पहचान, फिर विवाद में बदल गया पूरा मामला- आईजी को दिए गए आवेदन में मोहम्मद कलीम अशरफ ने बताया है कि संबंधित महिला उसके दूर के रिश्ते में मामा की लड़की लगती है,इसी कारण दोनों परिवारों के बीच वर्षों से परिचय था और समय-समय पर बातचीत भी होती थी, शिकायतकर्ता के अनुसार मई 2023 में महिला ने मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता मांगी,प्रारंभिक बातचीत सामान्य थी, लेकिन जब उससे बड़ी रकम की मांग की गई तो उसने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पैसे देने से इंकार कर दिया, शिकायतकर्ता का आरोप है कि यहीं से पूरे विवाद की शुरुआत हुई।
    मामला यहीं नहीं रुका,2025 में फिर 50 हजार रुपये वसूले जाने का आरोप- रेलवे कर्मचारी ने आवेदन में दावा किया है कि डेढ़ लाख रुपये देने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ,उसका आरोप है कि अप्रैल 2025 में एक नगर सैनिक के माध्यम से उसे फिर पुलिस केस की धमकी देकर 50 हजार रुपये देने के लिए मजबूर किया गया, शिकायत में विस्तार से उल्लेख है कि 40 हजार रुपये नकद दिए गए, 24 अप्रैल 2025 को 5 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए,1 मई 2025 को पुनः 5 हजार रुपये ऑनलाइन भेजे गए, आवेदन में फोनपे के माध्यम से किए गए ट्रांजेक्शन और संबंधित मोबाइल नंबर का भी उल्लेख किया गया है, यदि यह बैंकिंग विवरण उपलब्ध है तो पुलिस तकनीकी जांच के माध्यम से इन लेन-देन की पुष्टि कर सकती है।
    ऑडियो रिकॉर्डिंग भी होने का दावा-रेलवे कर्मचारी का कहना है कि उसने पैसे मांगने के दौरान हुई मोबाइल बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी है,यदि यह रिकॉर्डिंग वास्तव में मौजूद है तो इसकी फोरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि बातचीत किसकी है और उसमें क्या कहा गया है, ऐसे मामलों में ऑडियो रिकॉर्डिंग जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है,लेकिन अंतिम निष्कर्ष केवल तकनीकी परीक्षण के बाद ही निकल सकता है।
    रिश्ता तोड़ा,फिर भी पीछा नहीं छोड़ा शिकायतकर्ता का दावा-आवेदन में कहा गया है कि लगभग दो लाख रुपये देने के बाद शिकायतकर्ता ने महिला से हर प्रकार का संबंध समाप्त कर दिया,उसका आरोप है कि इसके बावजूद वर्ष 2026 में महिला उसके गृहग्राम सोनपुर पहुंची और मोहल्ले में जाकर कथित रूप से उसे दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देने लगी,यही नहीं,शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसके पिता के नाम दर्ज जमीन अपने नाम कराने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है, उसका कहना है कि यदि जमीन नहीं दी गई तो दुष्कर्म का मामला दर्ज कर जेल भिजवाने की धमकी दी जाती है।
    पैसे देने से इंकार किया तो थाने पहुंच गई शिकायत
    रेलवे कर्मचारी का आरोप है कि पैसे देने से मना करने के कुछ दिनों बाद महिला ने उसके खिलाफ रामानुजनगर थाने में शिकायत दर्ज करा दी, इसके बाद 12 जून 2023 को उसे तत्काल थाने बुलाया गया, यहीं से शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा सामने आता है, आवेदन में आरोप लगाया गया है कि थाने में उसे जेल भेजने,नौकरी खत्म होने और गंभीर कार्रवाई का डर दिखाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि उस पर महिला को डेढ़ लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया, यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो सबसे बड़ा सवाल यह उठेगा कि पुलिस ने शिकायत की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की और यदि मामला आपराधिक था तो विधिक कार्रवाई के बजाय कथित आर्थिक समझौते की स्थिति कैसे बनी?
    15 जून 2023 को दिए डेढ़ लाख रुपये,वीडियो बनाने का दावा
    शिकायतकर्ता ने आवेदन में लिखा है कि पुलिस के दबाव और नौकरी चले जाने के भय से उसने 15 जून 2023 को संबंधित महिला के घर जाकर 1 लाख 50 हजार रुपये दे दिए, इतना ही नहीं, उसने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उसने चुपके से अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। उसके अनुसार वीडियो में संबंधित पुलिस अधिकारी तथा महिला की बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है, यदि जांच एजेंसियों को यह वीडियो उपलब्ध कराया जाता है और वह तकनीकी जांच में सही पाया जाता है, तो यह पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। फिलहाल इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
    बसदेई चौकी से लेकर एसपी तक लगाई गुहार
    रेलवे कर्मचारी ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि उसने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत पहले बसदेई पुलिस चौकी में दी,उसका आरोप है कि वहां कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक सूरजपुर को आवेदन सौंपा,जब वहां से भी संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो अंततः उसने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को शिकायत भेजी और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
    अंजुमन कमेटी ने भी कराया समझौते का प्रयास
    शिकायतकर्ता के अनुसार विवाद को समाप्त करने के लिए स्थानीय अंजुमन कमेटी ने कई बार मध्यस्थता की, 19 जुलाई 2026 को सोनपुर में सामाजिक बैठक भी आयोजित की गई,रेलवे कर्मचारी का आरोप है कि बैठक में भी उसे सार्वजनिक रूप से धमकी दी गई, अपशब्द कहे गए तथा मारपीट कराने और थाने में फंसाने की चेतावनी दी गई,यदि इस बैठक में अन्य लोग उपस्थित थे तो उनके बयान भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
    पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप
    इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पक्ष शिकायत में लगाए गए पुलिसकर्मियों से जुड़े आरोप हैं,रेलवे कर्मचारी का आरोप है कि उसे पुलिस के नाम पर डराया गया, जेल और नौकरी जाने का भय दिखाया गया,पैसे दिलाने के लिए दबाव बनाया गया,आज भी नए-नए नंबरों से फोन कर धमकाया जाता है, कुछ पुलिस कर्मचारियों द्वारा भी पैसे की मांग की जाती है,यदि इन आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो मामला केवल कथित ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पुलिस की जवाबदेही का भी गंभीर विषय बन जाएगा।
    जिस अधिकारी का नाम शिकायत में, क्या उसी सिस्टम से होगी जांच?
    शिकायत में एक पुलिस अधिकारी का नाम भी सामने आया है,ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि आरोप पुलिस विभाग के भीतर के व्यक्ति पर हैं तो जांच कितनी निष्पक्ष होगी? क्या मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाएगी? क्या शिकायत में बताए गए ऑडियो,वीडियो और बैंक ट्रांजेक्शन का फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा? क्या संबंधित पुलिसकर्मियों को जांच पूरी होने तक मामले से अलग रखा जाएगा? इन सवालों के जवाब ही इस जांच की विश्वसनीयता तय करेंगे।
    आईजी के सामने बड़ी जिम्मेदारी
    अब पूरा मामला सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष पहुंच चुका है,यदि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य,बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेज प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी,दूसरी ओर, यदि जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो कानून के अनुसार झूठी शिकायत या मिथ्या आरोपों के संबंध में भी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
    अब सभी की निगाहें जांच पर…
    यह मामला फिलहाल एकतरफा शिकायत पर आधारित है,संबंधित महिला,शिकायत में नामित पुलिस अधिकारी तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, निष्पक्ष पत्रकारिता की दृष्टि से उनका पक्ष भी जांच और रिपोर्टिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा,फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस अपने ही विभाग पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पाएगी,या फिर यह शिकायत भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी? सरगुजा रेंज के आईजी के समक्ष अब केवल एक शिकायत नहीं,बल्कि पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता और जनता के भरोसे की परीक्षा भी है,यदि शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए ऑडियो, वीडियो और बैंकिंग साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं,तो यह मामला प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस का कारण बन सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं,तो जांच उसी स्पष्टता से यह भी सामने लाए कि वास्तविकता क्या थी,फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच से ही सामने आ सकेगी।

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