

महिला एवं बाल विकास विभाग जिस भवन को घोषित कर चुका असुरक्षित,
उसी में शिक्षा विभाग करा रहा पढ़ाई;जनपद सीईओ बोले…दो नोटिस दे चुके हैं,अब होगी आगे की कार्रवाई
राजेन्द्र शर्मा
खड़गवां,22 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पोड़ीडीह में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर लापरवाही सामने आई है,यहां प्राथमिक शाला भवन के मरम्मत कार्य को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है,लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया,इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बच्चे ऐसे जर्जर आंगनबाड़ी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं,जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग पहले ही असुरक्षित मानते हुए खाली करा चुका था,सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं,उसकी छत से लगातार प्लास्टर झड़ रहा है, कई स्थानों पर लोहे की सरिया बाहर दिखाई दे रही हैं और भवन की हालत किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है,इसके बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा उसी भवन में प्राथमिक शाला की कक्षाएं संचालित कराई जा रही हैं।
एक साल से अधूरा पड़ा मरम्मत कार्य- जानकारी के अनुसार प्राथमिक शाला भवन के मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी लगभग एक वर्ष पहले ग्राम पंचायत पोड़ीडीह को निर्माण एजेंसी के रूप में सौंपी गई थी,निर्धारित समय में कार्य पूरा होना था,लेकिन आज तक भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो सका,नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है,लेकिन बच्चे अब भी अपने मूल विद्यालय में नहीं लौट पाए हैं,परिसर में निर्माण सामग्री बिखरी हुई दिखाई देती है और कार्य लगभग ठप नजर आता है,इससे निर्माण कार्य की गति और निगरानी दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
जनपद पंचायत की निगरानी पर भी सवाल-निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के कारण अब जनपद पंचायत खड़गवां की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं, निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करना और समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है,ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण एजेंसी निर्धारित अवधि में कार्य पूरा नहीं कर सकी तो उसके विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई? क्या कारण है कि एक वर्ष बाद भी बच्चे अपने विद्यालय में नहीं लौट पाए?
सीईओ बोले…दो नोटिस जारी किए जा चुके हैं-इस संबंध में जब जनपद पंचायत खड़गवां के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रूपेश कुमार बंजारे से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि निर्माण एजेंसी को अब तक दो नोटिस जारी किए जा चुके हैं,उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया जाता है तो संबंधित उच्च अधिकारियों को जानकारी भेजकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी,हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा और बच्चों को सुरक्षित भवन कब उपलब्ध कराया जाएगा।
अब प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत- पोड़ीडीह का यह मामला केवल निर्माण कार्य में देरी का नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है,ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन तत्काल भवन की तकनीकी जांच कराए,यदि भवन असुरक्षित है तो बच्चों के लिए वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा अधूरे निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कराए,क्योंकि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा,जब बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ने का अवसर मिले,आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है,या उससे पहले जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी?
असुरक्षित घोषित भवन में पढ़ाई,आखिर जिम्मेदार कौन?– स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भवन को महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी संचालन के लिए असुरक्षित मानते हुए खाली करा दिया था,उसी भवन में अब प्राथमिक शाला के बच्चों को बैठाया जा रहा है,यदि यह तथ्य सही है तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं जब आंगनबाड़ी के लिए भवन असुरक्षित था तो प्राथमिक शाला के बच्चों के लिए कैसे सुरक्षित हो गया? क्या भवन की कोई तकनीकी सुरक्षा जांच कराई गई? क्या किसी सक्षम अधिकारी से इस भवन में कक्षाएं संचालित करने की अनुमति ली गई? यदि सुरक्षा परीक्षण नहीं हुआ तो बच्चों को वहां बैठाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों को देना होगा।
छत से झड़ रहा प्लास्टर,बाहर निकली सरिया– मौके पर भवन की स्थिति देखने पर स्पष्ट होता है कि भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है, छत और दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है तथा कई स्थानों पर सरिया बाहर दिखाई दे रही है, विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे भवनों में लगातार बच्चों की मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है,बरसात के मौसम में इस प्रकार के भवनों में दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
निर्माण एजेंसी पर क्या हुई कार्रवाई?– स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण एजेंसी समय पर कार्य पूरा नहीं कर सकी तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए,लोगों का सवाल है क्या निर्माण एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया? क्या विलंब के लिए आर्थिक दंड लगाया गया? क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की गई? यदि नहीं,तो इससे निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?– सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, यदि भविष्य में इस जर्जर भवन में कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या इसकी जवाबदेही शिक्षा विभाग की होगी, निर्माण एजेंसी की, ग्राम पंचायत की या फिर जनपद पंचायत की? इन सवालों का जवाब प्रशासन को स्पष्ट करना होगा।
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