कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बीच खनिज विभाग की कार्रवाई पर उठा सवाल…स्थानीय लोगों ने लीज खदानों के भौतिक सत्यापन और स्टॉक की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
राजेन्द्र शर्मा
एमसीबी/खड़गवां,20 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग लगातार कार्रवाई करने का दावा कर रहा है, हाल ही में खड़गवां और मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में विभाग की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर अवैध रूप से रेत और गिट्टी का परिवहन करते पाए गए पांच ट्रैक्टरों को जब्त किया। विभाग ने बताया कि संबंधित वाहन संचालकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इन कार्रवाइयों के बीच अब एक बड़ा सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लोगों का कहना है कि यदि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान चल रहा है तो क्या इसकी जांच केवल छोटे परिवहनकर्ताओं तक ही सीमित रहेगी, या बड़े स्तर पर संचालित स्टोन क्रेशरों और उनकी लीज खदानों की भी व्यापक जांच होगी?
कार्रवाई ट्रैक्टरों तक,लेकिन क्रेशरों पर खामोशी?
खनिज विभाग की ओर से समय-समय पर ट्रैक्टरों और छोटे वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी सामने आती रहती है, लेकिन क्षेत्र के कई स्टोन क्रेशरों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि स्टोन क्रेशरों तक पहुंचने वाला पत्थर (बोल्डर) वास्तव में स्वीकृत लीज क्षेत्र से निकाला गया है या नहीं। यदि पूरा रिकॉर्ड वैधानिक है तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी,और यदि कहीं अनियमितता है तो उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या लीज खदानों का नियमित भौतिक सत्यापन होता है?
खनन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल परिवहन पर निगरानी पर्याप्त नहीं है,यदि अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण करना है तो लीज खदानों का समय-समय पर भौतिक सत्यापन भी आवश्यक है,वे सुझाव देते हैं कि संबंधित खदानों की सीमाओं का सत्यापन कर यह देखा जाए कि उत्खनन स्वीकृत क्षेत्र के भीतर ही हुआ है या नहीं, इसके अलावा उत्खनन की मात्रा,उपलब्ध स्टॉक और अभिलेखों का भी मिलान किया जाना चाहिए।
स्टॉक रजिस्टर और रॉयल्टी अभिलेखों का भी हो परीक्षण
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग निष्पक्ष जांच करना चाहता है तो केवल वाहनों की जांच से आगे बढ़ना होगा,उनकी मांग है कि प्रत्येक स्टोन क्रेशर के स्टॉक रजिस्टर,रॉयल्टी भुगतान के रिकॉर्ड, उत्पादन विवरण और वास्तविक उपलब्ध सामग्री का मिलान कराया जाए,इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि खनिज का उत्खनन और उपयोग नियमों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
पर्यावरणीय शर्तों का पालन भी जांच के दायरे में आए…
खनन केवल राजस्व का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण से भी जुड़ा मामला है,इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित लीज क्षेत्रों में पर्यावरण स्वीकृति की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं,पौधारोपण,सुरक्षा प्रबंध,सीमांकन,खदान संचालन की निर्धारित शर्तें और पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का जमीनी स्तर पर परीक्षण भी आवश्यक है।
बड़े और छोटे पर समान नियम लागू हों…
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कार्रवाई का दायरा केवल छोटे परिवहनकर्ताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी छोटे वाहन पर नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई होती है तो बड़े खनन कारोबारों की भी उसी स्तर की जांच और निगरानी होनी चाहिए, कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, तभी कार्रवाई निष्पक्ष मानी जाएगी।
कलेक्टर से स्वतंत्र जांच की मांग…
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी स्टोन क्रेशरों,उनकी लीज खदानों,स्टॉक रजिस्टर,रॉयल्टी रिकॉर्ड और पर्यावरणीय शर्तों के पालन की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए,उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए,वहीं यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप पाया जाता है तो इससे अनावश्यक शंकाओं का भी समाधान हो जाएगा।
निष्पक्ष कार्रवाई से ही बनेगा विश्वास
अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल परिवहन पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। खनन की पूरी प्रक्रिया—लीज क्षेत्र से लेकर उत्खनन,परिवहन,स्टॉक और पर्यावरणीय अनुपालन तक—की नियमित निगरानी आवश्यक है,अब निगाहें जिला प्रशासन और खनिज विभाग पर हैं कि क्या वे स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए इन सवालों के मद्देनजर व्यापक जांच का निर्णय लेते हैं या कार्रवाई का दायरा केवल छोटे वाहनों तक ही सीमित रहता है।
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