गुणवत्ता पर आशंका,उसी रात बह गया सोनहत वन विभाग का तालाब
दैनिक घटती-घटना की आशंका सही साबित! खबर छपी…रात में बह गया तालाब
राजन पाण्डेय
सोनहत/कोरिया,20 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। दैनिक घटती-घटना ने 17 जुलाई के अंक में सोनहत वन विभाग द्वारा बनाए जा रहे तालाबों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आशंका जताई थी कि कमजोर मेड़ और अधूरे निर्माण पहली ही बारिश नहीं झेल पाएंगे,अखबार की यह आशंका कुछ ही घंटों में सही साबित होती नजर आई, 17 जुलाई की रात हुई हल्की बारिश में ही एक तालाब की मेड़ बीच से टूट गई और पानी बह निकला,जिससे जल संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया,अब पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। बता दे की कोरिया जिले के सोनहत वन परिक्षेत्र में जल संरक्षण के नाम पर बनाए गए मिट्टी के तालाबों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए कई तालाब पहली ही हल्की बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए,उनका दावा है कि कई स्थानों पर तालाबों की मेड़ टूट गई, पर्याप्त गहराई नहीं रखी गई और निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया, मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है, आरोप है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर जन आंदोलन किया जाएगा।
पहली बारिश में खुल गई निर्माण गुणवत्ता की पोल?- स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग ने बारिश शुरू होने से पहले जल्दबाजी में कई मिट्टी के तालाबों का निर्माण कराया, लेकिन जैसे ही हल्की बारिश हुई, कई तालाबों की मेड़ बीच से टूट गई और पानी बह निकला,आरोप है कि यदि हल्की बारिश में ही यह स्थिति है, तो तेज बारिश के दौरान इन संरचनाओं के टिके रहने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं,ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर तालाबों की खुदाई पर्याप्त गहराई तक नहीं की गई और पानी रोकने के लिए मजबूत मेड़ भी नहीं बनाई गई,उनका आरोप है कि निर्माण कार्य केवल कागजी औपचारिकता पूरी करने के उद्देश्य से किया गया।
मशीनों से काम,मजदूरों को नहीं मिला रोजगार– मामले का एक बड़ा आरोप यह भी है कि जिन कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सकता था,वहां जेसीबी और अन्य मशीनों का उपयोग किया गया,स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे ग्रामीण मजदूरों का रोजगार प्रभावित हुआ, जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि मजदूरों से कार्य कराया जाता तो स्थानीय स्तर पर निगरानी भी होती और निर्माण की गुणवत्ता पर भी अधिक जवाबदेही रहती।
15 जून के बाद भी मिट्टी कार्य होने का आरोप- स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि शासन के निर्देशों के अनुसार 15 जून के बाद अधिकांश मिट्टी संबंधी कार्यों पर रोक रहती है, इसके बावजूद सोनहत क्षेत्र में बारिश शुरू होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहा, इस संबंध में यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि ऐसा हुआ तो इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई और जिम्मेदारी किसकी है।
दैनिक घटती-घटना की आशंका निकली सही, खबर छपने के कुछ घंटों बाद ही टूट गई मेड़- इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि दैनिक घटती-घटना ने 17 जुलाई को ही प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर वन विभाग द्वारा बनाए जा रहे तालाबों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए थे, समाचार में आशंका जताई गई थी कि बिना पर्याप्त गहराई, कमजोर मेड़ और जल्दबाजी में कराए गए निर्माण पहली ही बारिश की परीक्षा में टिक नहीं पाएंगे, संयोग ही नहीं बल्कि सवाल खड़ा करने वाला तथ्य यह रहा कि 17 जुलाई की रात हुई हल्की बारिश के बाद ही एक तालाब की मेड़ बीच से टूट गई और पानी बह निकला, इससे समाचार में व्यक्त आशंकाओं को बल मिला और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आ गई, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहली ही हल्की बारिश में तालाब टूट गया, तो आने वाले दिनों में तेज और लगातार मानसूनी बारिश के दौरान इन संरचनाओं की स्थिति क्या होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, ग्रामीणों का आरोप है कि यह घटना केवल निर्माण की तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है, अब मांग उठ रही है कि केवल कागजी जांच नहीं बल्कि सभी तालाबों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाए और यह देखा जाए कि स्वीकृत राशि के अनुरूप कार्य वास्तव में हुआ भी है या नहीं।
सूचना बोर्ड नहीं,स्थानीय समिति को भी नहीं दी गई जानकारी– आरोप यह भी है कि कई निर्माण स्थलों पर योजना से संबंधित कोई सूचना पटल नहीं लगाया गया,स्थानीय वन समिति के पदाधिकारियों को भी कथित तौर पर निर्माण कार्य और स्वीकृत राशि की जानकारी नहीं दी गई, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि योजना पारदर्शी होती तो स्थल पर योजना का नाम, लागत, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी और अवधि का उल्लेख किया जाता।
मुख्य सवाल
क्या तालाबों का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ?
पहली बारिश में ही मेड़ टूटने की वास्तविक वजह क्या है?
क्या निर्माण कार्य में मशीनों का उपयोग नियमों के अनुरूप हुआ?
15 जून के बाद यदि मिट्टी कार्य हुआ, तो इसकी अनुमति किसने दी?
क्या निर्माण कार्य का गुणवत्ता परीक्षण कराया गया?
स्वीकृत राशि और वास्तविक कार्य का मिलान कब होगा?
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