


नर्सरी से बेशकीमती चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा,अब ‘कागजी तालाब’ निर्माण को लेकर उठे नए आरोप जनसंगठनों ने उच्च स्तरीय जांच और भौतिक सत्यापन की मांग उठाई…
-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,18 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। सोनहत वन परिक्षेत्र एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है, पहले सरकारी नर्सरी से बेशकीमती चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला सामने आया और अब तालाब निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं तथा मशीनों के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं,स्थानीय लोगों और जनसंगठनों का कहना है कि यदि पहले मामले में समय पर प्रभावी कार्रवाई हुई होती तो शायद आज दूसरा विवाद सामने नहीं आता,क्षेत्र में चर्चा इस बात की है कि क्या चंदन चोरी की तरह तालाब निर्माण से जुड़े आरोपों की भी केवल औपचारिक जांच होगी या इस बार जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और विभाग की ओर से भी विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
चंदन चोरी का मामला बना अविश्वास की वजह
कुछ समय पहले सोनहत मुख्यालय स्थित वन विभाग की सरकारी नर्सरी से बेशकीमती चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला सामने आया था। उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी थी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने इस मामले में ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी,स्थानीय लोगों का कहना है कि समय बीतने के बावजूद मामले में कोई ऐसी कार्रवाई सामने नहीं आई जिससे यह भरोसा बन सके कि जिम्मेदारों तक जांच पहुंची है,इसी कारण अब तालाब निर्माण से जुड़े नए आरोप सामने आने पर लोगों का भरोसा और कमजोर होता दिखाई दे रहा है।
अब तालाब निर्माण पर उठ रहे हैं सवाल
वन विभाग द्वारा जंगल क्षेत्र में जल संरक्षण के उद्देश्य से कई तालाब बनाए जाने का दावा किया गया है,लेकिन स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अधिकांश स्थानों पर तालाब की जगह केवल गड्ढे खोदे गए हैं,उनका कहना है कि न तो कई स्थानों पर निर्धारित मापदंडों का पालन दिखाई देता है और न ही मजबूत मेड़ तथा जल संरक्षण की आवश्यक संरचनाएं विकसित की गई हैं,आरोप यह भी है कि निर्माण कार्य मजदूरों की बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से कराया गया, यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं रहेगा,बल्कि सरकारी राशि के उपयोग और रोजगार के अवसरों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
स्थानीय वन समिति को भी जानकारी नहीं?
आरोप यह भी लगाया गया है कि स्थानीय वन समिति के पदाधिकारियों को निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं दी गई,यदि समिति को विश्वास में लिए बिना कार्य हुए हैं तो यह सहभागिता आधारित वन प्रबंधन की भावना के विपरीत माना जा रहा है।
जन सहयोग समिति ने उठाए गंभीर प्रश्न
कोरिया जन सहयोग समिति के उपाध्यक्ष राजू साहू और पुष्पेंद्र राजवाड़े ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चंदन चोरी जैसे गंभीर मामले में जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी तो तालाब निर्माण की शिकायतों में भी निष्पक्ष जांच को लेकर लोगों के मन में संदेह स्वाभाविक है,उन्होंने मांग की है कि केवल कागजी जांच नहीं बल्कि सभी निर्माण स्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तथा स्वीकृत राशि, तकनीकी मापदंड और वास्तविक कार्य का मिलान किया जाए।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि दोनों मामलों—चंदन चोरी और तालाब निर्माण—की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, उनका कहना है कि जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए चंदन चोरी मामले की वर्तमान स्थिति, तालाब निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता,स्वीकृत एवं व्यय राशि का मिलान, मशीनों के उपयोग की वैधता,मजदूरों को रोजगार क्यों नहीं मिला,निर्माण कार्य की समय-सीमा और नियमों का पालन।
15 जून के बाद मिट्टी कार्य पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि 15 जून के बाद भी मिट्टी संबंधी कार्य जारी रहे, जबकि सामान्यतः मानसून अवधि में ऐसे कार्यों पर प्रतिबंध रहता है,यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करेगा।
सूचना पटल नहीं लगाए जाने पर भी आपत्ति
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिन स्थानों पर निर्माण कार्य हुए वहां अधिकांश जगहों पर सूचना पटल (डिस्प्ले बोर्ड) नहीं लगाए गए, सूचना पटल नहीं होने से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कार्य किस योजना से स्वीकृत हुआ, कुल लागत कितनी थी,कार्य एजेंसी कौन थी,तकनीकी स्वीकृति किस अधिकारी ने दी,स्थानीय लोगों का कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है।
आंदोलन की चेतावनी
कोरिया जन सहयोग समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों, मजदूरों और युवाओं के साथ आंदोलन किया जाएगा,समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अब नजर विभाग की कार्रवाई पर…
लगातार दो विवादों ने सोनहत वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, एक ओर चंदन चोरी का मामला अभी तक लोगों के मन से नहीं निकला है,वहीं दूसरी ओर तालाब निर्माण को लेकर उठे आरोपों ने विभाग की जवाबदेही पर नई बहस शुरू कर दी है,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वन विभाग इन आरोपों पर पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करेगा,या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा, जांच के बाद ही इन आरोपों की सत्यता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
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