नई दिल्ली,12 जुलाई 2026। संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की रूपरेखा रखेगी,वहीं विपक्षी दल उन मुद्दों को सामने रखेंगे जिन्हें वे सत्र के दौरान संसद में उठाना चाहते हैं।
मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र के दौरान सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाने की संभावना है। सरकार इस सत्र में अपने विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी में है,जबकि विपक्ष भी विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। हर संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की परंपरा रही है। इस बैठक का उद्देश्य संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने,सदन में उठने वाले प्रमुख विषयों पर राजनीतिक दलों की राय जानने और सरकार व विपक्ष के बीच संवाद कायम करना होता है। इस बार मानसून सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े मुद्दों और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी को सदन में उठा सकता है। कांग्रेस की ओर से रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ विपक्षी दलों के भीतर हाल के दिनों में दिखी असहमति और राजनीतिक हलचल का असर भी सत्र के दौरान दिखाई दे सकता है।
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की सीटिंग व्यवस्था में संभावित बदलाव पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी। सरकार के लिए यह सत्र विधायी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि कई अहम बिलों को आगे बढ़ाने की तैयारी है। वहीं विपक्ष महंगाई, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय सुरक्षा और संघीय ढांचे से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। सर्वदलीय बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मानसून सत्र में किन विधेयकों को प्राथमिकता दी जाएगी और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग करेगा। ऐसे में 19 जुलाई की बैठक को आगामी संसदीय टकराव और सहयोग दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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