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अम्बिकापुर@खनिजों से अरबों की कमाई,लेकिन गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित : मनोज दुबे

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डीएमएफ निधि का सामाजिक अंकेक्षण कराने और वर्षवार खर्च सार्वजनिक करने की मांग,सरकार से जवाबदेही तय करने की अपील
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। खनिज संपदा से समृद्ध सरगुजा संभाग में विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि के उपयोग पर सवाल उठे हैं। आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने आरोप लगाया कि कोयला, बॉक्साइट सहित अन्य खनिजों से प्रदेश सरकार को वर्षों से करोड़ों रुपये का राजस्व मिल रहा है, लेकिन जिन क्षेत्रों से यह संपदा निकल रही है, वहीं के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिलों में बड़े पैमाने पर कोयले का खनन तथा मैनपाट क्षेत्र में बॉक्साइट का उत्खनन होता है। इन क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफ के माध्यम से हर वर्ष बड़ी राशि उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन इसका अपेक्षित लाभ खनन प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच रहा है। मनोज दुबे ने कहा कि कई गांवों में आज भी सड़क,स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छ पेयजल,सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। दूसरी ओर खनन गतिविधियों के कारण धूल प्रदूषण, खराब सड़कों और पर्यावरणीय समस्याओं का खामियाजा स्थानीय लोगों को उठाना पड़ रहा है।
वर्षवार हिसाब
सार्वजनिक करने की मांग

आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरगुजा संभाग के सभी जिलों में डीएमएफ निधि का वर्षवार और कार्यवार पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कितनी राशि प्राप्त हुई, किन योजनाओं पर खर्च की गई, कितने कार्य पूर्ण हुए, कितने अधूरे हैं तथा उन कार्यों से स्थानीय लोगों को कितना लाभ मिला।
ग्राम सभा की निगरानी
में हो सोशल ऑडिट

पार्टी ने मांग की कि प्रत्येक खनन प्रभावित ग्राम पंचायत में ग्राम सभा की उपस्थिति में सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) कराया जाए। साथ ही सभी स्वीकृत परियोजनाओं,उनकी लागत, प्रगति और खर्च की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल एवं ग्राम पंचायतों के सूचना बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए,ताकि आम नागरिक भी निगरानी कर सकें।
जनता के धन का लाभ जनता को मिले
मनोज दुबे ने कहा कि यदि सरगुजा की खनिज संपदा का लाभ सबसे पहले स्थानीय लोगों को नहीं मिलता तो विकास की अवधारणा अधूरी रह जाती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि डीएमएफ निधि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर अस्पताल, स्कूल, पेयजल,सिंचाई,सड़क, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के रोजगार सृजन पर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि डीएमएफ निधि के उपयोग में कहीं अनियमितता, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की शिकायतें हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि जनता के विकास के लिए बनी निधि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।


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