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अम्बिकापुर@‘सुपरमैन’ की एक और कार्रवाई…. लेकिन नशे का नेटवर्क अब भी कायम

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ब्रह्मपारा से आशा पांडेय गिरफ्तार,28 नशीले इंजेक्शन जब्त,लगातार दबिश के बावजूद सरगुजा में क्यों सामने आ रहे नए-नए सौदागर?


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन कहे जाने वाले रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में चल रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत रविवार को ब्रह्मपारा क्षेत्र में एक और कार्रवाई की गई। आबकारी टीम ने आशा पांडेय नामक महिला को 28 नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत जेल भेज दिया। विभाग के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि ब्रह्मपारा निवासी आशा पांडेय अपने घर से नशीले इंजेक्शन बेच रही है। सूचना के आधार पर टीम ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान महिला कथित रूप से एक थैला फेंकने का प्रयास कर रही थी, जिसे मौके पर मौजूद महिला सैनिक ने पकड़ लिया। तलाशी में 19 नग क्रश्वङ्गह्रत्रश्वस्ढ्ढष्ट और 9 नग ्रङ्कढ्ढरु इंजेक्शन बरामद किए गए। आबकारी विभाग का कहना है कि आशा पांडेय पहले ब्राउन शुगर से जुड़े मामले में जेल जा चुकी है और अब नशीले इंजेक्शन बेचने की सूचना पर कार्रवाई की गई है।
लगातार बढ़ती कार्रवाई,लेकिन खत्म नहीं हो रहा कारोबार
यह पिछले कुछ सप्ताह में आबकारी उड़नदस्ता की एक और बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले…
– वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी के बाद मोशीम अंसारी तक टीम पहुंची।
– लुंड्रा क्षेत्र से कथित सप्लायर पकड़े गए।
– सूरजपुर में प्रदीप राजवाड़े गिरफ्तार हुआ।
– श्याम लॉज से साहिल तिर्की पकड़ा गया, जिसके बाद नितीश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।
– सीतापुर से 3,528 नशीले कैप्सूल जब्त कर दो आरोपियों को जेल भेजा गया।
– महुआ शराब और अवैध शराब बिक्री के मामलों में भी लगातार कार्रवाई हुई।

अब इस कड़ी में ब्रह्मपारा से आशा पांडेय की गिरफ्तारी जुड़ गई है।
हर कार्रवाई के बाद नया नाम क्यों?
लगातार हो रही गिरफ्तारियां एक ओर विभाग की सक्रियता को दर्शाती हैं,लेकिन दूसरी ओर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती हैं। यदि अभियान लगातार सफल है तो हर कुछ दिनों में एक नया विक्रेता,नया सप्लायर या नई खेप कैसे सामने आ रही है? यह स्थिति संकेत देती है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के बावजूद नशे की आपूर्ति का स्रोत पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
जांच की असली चुनौती सप्लाई नेटवर्क
अब तक अधिकांश मामलों में बरामदगी और स्थानीय स्तर पर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। लेकिन यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन आरोपियों तक नशीले इंजेक्शन पहुंचाने वाली बड़ी सप्लाई चेन कहां से संचालित हो रही है।
– क्या जब्त इंजेक्शनों की सप्लाई का स्रोत चिन्हित किया गया?
– क्या बैच नंबर के आधार पर वितरण श्रृंखला की जांच की गई?
– क्या औषधि प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वित जांच आगे बढ़ी?
इन सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी हैं।
केवल गिरफ्तारियां नहीं,नेटवर्क पर प्रहार की अपेक्षा
– नशे के खिलाफ अभियान की सफलता केवल इस आधार पर नहीं आंकी जाती कि कितने आरोपी गिरफ्तार हुए या कितनी खेप जब्त हुई।
– वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब अवैध सप्लाई चेन,वित्तीय नेटवर्क और संगठित तंत्र तक कार्रवाई पहुंचे, जिससे बार-बार नए नाम सामने आने की स्थिति समाप्त हो।
– फिलहाल ब्रह्मपारा की यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन क्लीन’ की एक और कड़ी है,लेकिन सरगुजा में नशीले इंजेक्शनों के लगातार सामने आते मामलों ने यह संकेत भी दिया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।


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