चार महीने पहले उठा था सवाल…’कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा’,अब भातूपारा की महिला की मौत ने खोल दी नगर निगम की व्यवस्था की पोल

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,12 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शहर में आवारा सांडों का आतंक आखिर एक महिला की जान ले गया। भातूूपारा में सांड के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई वीवी बाई की रायपुर के डीकेएस अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद नगर निगम ने आवारा सांडों को पकड़ने के निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले कई महीनों से लगातार चेतावनियां मिल रही थीं, शिकायतें हो रही थीं और लोग घायल हो रहे थे, तब जिम्मेदार विभाग ने स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं की? दरअसल,यह पहली बार नहीं है जब शहर में आवारा सांडों का मुद्दा सुर्खियों में आया हो। 20 मार्च 2026 को केदारपुर भट्टी रोड स्थित गणेश दादा गली में दो आक्रामक सांडों के आतंक को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। उस समय स्थानीय लोगों ने बताया था कि सांड बिना किसी उकसावे के राहगीरों पर हमला कर रहे हैं। बच्चे,महिलाएं और बुजुर्ग घर से निकलने में डर रहे थे। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे,जिनमें एक व्यक्ति का हाथ फ्रैक्चर तक हो गया था। उस समय भी लोगों ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
चेतावनी को नजरअंदाज किया,अब गई एक जान : मार्च में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद कुछ समय के लिए निगम की टीम ने एक सांड को पकड़कर शहर से बाहर छोड़ा था,लेकिन वह कुछ ही समय बाद वापस लौट आया। इसके बाद फिर वही हालात बन गए। इसका मतलब साफ था कि समस्या का समाधान नहीं, केवल खानापूर्ति की गई। इसी बीच शहर के अलग-अलग हिस्सों में सांडों के हमले जारी रहे। कुछ दिन पहले गांधी चौक पर ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिस के जवान पर सांड ने हमला कर दिया। जवान गंभीर रूप से घायल हुआ और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। भाठूपारा में भी एक अन्य व्यक्ति पहले सांड के हमले में घायल हो चुका था। इन घटनाओं के बावजूद व्यापक अभियान नहीं चलाया गया।
हर हादसे के बाद वही आश्वासन : शहरवासियों का आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल किसी बड़े हादसे के बाद ही दिखाई देती है। कुछ दिन अभियान चलता है, कुछ मवेशी पकड़े जाते हैं,फिर अभियान बंद होते ही सांड दोबारा सड़कों पर लौट आते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि अब तक अपनाई गई व्यवस्था पूरी तरह असफल साबित हुई है।
पशु मालिकों पर क्यों नहीं होती कार्रवाई? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे अधिकांश मवेशियों के मालिक हैं,लेकिन कार्रवाई केवल पशुओं को पकड़ने तक सीमित रहती है। न तो पशु मालिकों पर प्रभावी जुर्माना लगाया जाता है और न ही उनकी जवाबदेही तय की जाती है। यही वजह है कि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
महापौर ने दिए निर्देश, लेकिन जनता को स्थायी समाधान चाहिएः महापौर मंजूषा भगत ने महिला की मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए नगर निगम आयुक्त को तत्काल आवारा सांडों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं। निगम का कहना है कि सांडों को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा तथा उनके चारा-पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। हालांकि शहरवासियों का कहना है कि केवल निर्देशों और अभियानों से अब भरोसा नहीं बनेगा। उन्हें ऐसा स्थायी समाधान चाहिए जिससे भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।
पानी भर रही महिला पर हमला, इलाज के दौरान मौत
शुक्रवार सुबह भातूपारा निवासी वीवी बाई घर के पास सार्वजनिक नल से पानी भर रही थीं। इसी दौरान एक आवारा सांड ने उन पर अचानक हमला कर दिया। सांड ने उन्हें सींग से उठाकर कई फीट दूर पटक दिया। गंभीर हालत में पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल और बाद में रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया,जहां रविवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद पूरे शहर में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि मार्च में ही प्रशासन ने चेतावनी को गंभीरता से लिया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती।
शहर के हर प्रमुख मार्ग पर सांडों का कब्जा
गांधी चौक,देवीगंज रोड,गुदरी बाजार,आकाशवाणी चौक,संगम चौक,बस स्टैंड, भातूपारा और कई अन्य व्यस्त क्षेत्रों में सुबह से रात तक आवारा सांड और मवेशी घूमते दिखाई देते हैं। कई बार सांड आपस में लड़ते हुए सड़क पर दौड़ पड़ते हैं,जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और दोपहिया चालक सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं।
अब जवाब चाहिए,सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन नहीं…
भातूपारा की महिला की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
- जब मार्च से लगातार शिकायतें और हमले हो रहे थे तो व्यापक अभियान क्यों नहीं चलाया गया?
- क्या नगर निगम के पास आवारा मवेशियों के प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
- क्या पशु मालिकों पर कार्रवाई के नियम केवल कागजों तक सीमित हैं?
- क्या हर बार किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन सक्रिय होगा?
अब यह केवल आवारा मवेशियों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि शहर में प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न बन चुका है। यदि इस घटना के बाद भी ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
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