डीईओ का बड़ा पत्र उजागर : शासन के आदेश के बाद भी नहीं लौटे कर्मचारी,कलेक्टर से तत्काल भारमुक्त करने की मांग…
-संवाददाता-
खड़गवां/एमसीबी,12 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर कर्मचारियों की कमी के संकट से जूझती नजर आ रही है,इस बार यह मुद्दा किसी संगठन या जनप्रतिनिधि ने नहीं, बल्कि स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने उठाया है, कलेक्टर को भेजे गए आधिकारिक पत्र में डीईओ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षा विभाग के कई शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारी वर्षों से अन्य विभागों में संलग्न (अटैच) हैं, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद अब तक इन कर्मचारियों की मूल विभाग में वापसी नहीं हुई है, जिसका सीधा असर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है, डीईओ के पत्र के अनुसार जिले के अनेक विद्यालय, विकासखंड शिक्षा कार्यालय और जिला शिक्षा कार्यालय कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं, जिन कर्मचारियों को विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा, प्रशासनिक कार्य और शैक्षणिक गतिविधियों में योगदान देना चाहिए था, वे अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, इससे शिक्षा विभाग के नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं और उपलब्ध कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।
शिक्षा स्तर पर भी पड़ रहा असर-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में एमसीबी जिले का शैक्षणिक प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा,कई विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हुई, प्रशासनिक कार्यों का बोझ भी सीमित कर्मचारियों पर आ जाने से शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, विभाग का मानना है कि यदि संलग्न कर्मचारियों की शीघ्र वापसी होती है तो विद्यालयों में मानव संसाधन की कमी दूर होगी और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकेगा।
कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग– जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि अन्य विभागों में संलग्न सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को तत्काल भारमुक्त कर उनके मूल विभाग में भेजने के निर्देश जारी किए जाएं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम आवश्यक है।
शासन के आदेश के बाद भी क्यों जारी है संलग्नीकरण?-सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सामान्य प्रशासन विभाग पहले ही संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देश जारी कर चुका है,तब भी कई कर्मचारी वर्षों से अन्य विभागों में कैसे कार्यरत हैं? क्या संबंधित विभागों ने शासन के आदेशों का पालन नहीं किया, या फिर किसी प्रशासनिक संरक्षण के कारण यह व्यवस्था जारी रही? यदि ऐसा है तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?
विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी का सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ता है,शिक्षक और कर्मचारी यदि अपने मूल दायित्वों से हटकर अन्य विभागों में कार्य करेंगे तो स्कूलों में शिक्षण,परीक्षा,रिकॉर्ड संधारण और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है,ऐसे में सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास भी अधूरे रह सकते हैं।
उठ रहे अहम सवाल…
शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग के कर्मचारी अब तक मूल विभाग में क्यों नहीं लौटे? वर्षों से संलग्नीकरण किन परिस्थितियों और किसके संरक्षण में जारी रहा? क्या अब कलेक्टर इस मामले में सख्त निर्णय लेते हुए सभी कर्मचारियों को तत्काल भारमुक्त करेंगे? क्या कर्मचारियों की वापसी से एमसीबी जिले की गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा? अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, यदि डीईओ की अनुशंसा पर समयबद्ध कार्रवाई होती है,तो इससे न केवल शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर होगी, बल्कि जिले की शिक्षण व्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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