- कलेक्टर ने गठित किया संयुक्त दल,प्रवेश-निकास व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों की होगी पड़ताल
- हाल के अग्निकांडों के बाद प्रशासन की बड़ी पहल,नियमों की अनदेखी करने वालों पर हो सकती है कार्रवाई…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। जिले में सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के सभी बहुमंजिला आवासीय भवनों, कोचिंग सेंटरों, ट्यूशन कक्षाओं, होटल, लॉज, मॉल, व्यावसायिक परिसरों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों की फायर सेफ्टी एवं सुरक्षा मानकों की जांच के लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया है। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों का सुरक्षित निकास संभव हो तथा भवनों में अग्निशमन संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हों। जारी आदेश के अनुसार गठित दल का नेतृत्व अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) अम्बिकापुर करेंगे। दल में नगर पुलिस अधीक्षक, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क) के कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग (विद्युत एवं यांत्रिकी) के कार्यपालन अभियंता, नगर पालिक निगम के कार्यपालन अभियंता तथा एसडीआरएफ के अग्निशमन अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। यह दल विभिन्न भवनों का स्थल निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का परीक्षण करेगा।
इन बिंदुओं पर होगी विशेष जांच : जांच के दौरान भवनों में आपातकालीन प्रवेश एवं निकास मार्ग, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता एवं उनकी कार्यशील स्थिति,फायर अलार्म सिस्टम,विद्युत सुरक्षा,आपदा की स्थिति में निकासी की व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी भवन में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाता है तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
हालिया घटनाओं के बाद बढ़ी सतर्कता : देश के विभिन्न राज्यों में हाल के वर्षों में कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों, होटलों और व्यावसायिक भवनों में हुई आगजनी की घटनाओं में बड़ी जनहानि हुई है। इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा मानकों की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में सरगुजा जिला प्रशासन ने भी व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।
भवन संचालकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी : प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि केवल अग्निशमन यंत्र लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रखरखाव, कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण तथा भवनों में सुरक्षित निकास व्यवस्था सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। जांच अभियान के बाद कई संस्थानों को सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
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