
- धोवताल के बुजुर्ग दंपत्ति ने शासन-प्रशासन से लगाई मदद की गुहार,
- मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा जीवन,चल-फिर पाने में भी असमर्थ
-संवाददाता-
एमसीबी/भरतपुर,02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत बरेल के निकट ग्राम पंचायत धोवताल के आश्रित ग्राम मंटोलिया में रहने वाले 95 वर्षीय वृद्ध समयलाल पंडों और उनकी पत्नी रुकमन पण्डो का जीवन आज उम्र के उस अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है,जहां उन्हें सबसे अधिक सहारे,सुरक्षा और उपचार की आवश्यकता है,लेकिन विडंबना यह है कि दोनों बुजुर्ग आज भी एक पक्के घर,समुचित इलाज और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। समयलाल पंडों ने भावुक स्वर में शासन-प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि अब उनकी उम्र इतनी अधिक हो चुकी है कि वे स्वयं चलकर अस्पताल तक भी नहीं जा सकते,लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति,शारीरिक कमजोरी और आर्थिक अभाव ने उनका जीवन बेहद कठिन बना दिया है,उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उन्हें इलाज की समुचित व्यवस्था और रहने के लिए एक पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए,ताकि जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें सम्मानपूर्वक जीने का अवसर मिल सके,ग्रामीणों के अनुसार समयलाल पंडों और उनकी पत्नी लंबे समय से अत्यंत साधारण और कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं,कच्चे एवं जर्जर आशियाने में रहने के कारण बरसात के दिनों में पानी टपकने और गर्मी में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है,वृद्धावस्था के चलते दोनों पति-पत्नी दैनिक जीवन के सामान्य कार्य भी स्वयं नहीं कर पाते। कई बार उन्हें भोजन, दवा और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है, ग्रामीणों का कहना है कि इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद यदि कोई बुजुर्ग दंपत्ति आज भी सरकारी सहायता की प्रतीक्षा कर रहा है, तो यह चिंता का विषय है,उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके पर सर्वे कराया जाए और पात्रता के अनुसार दंपत्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य किसी आवासीय योजना का लाभ दिया जाए, साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित रूप से उनके घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण करे तथा आवश्यक दवाएं और उपचार उपलब्ध कराया जाए,ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि दंपत्ति किसी सामाजिक सुरक्षा पेंशन,खाद्यान्न योजना या अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं तो संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर उन्हें सभी पात्र योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य ऐसे ही जरूरतमंद और असहाय लोगों तक राहत पहुंचाना है।
मानवीय
संवेदनाओं से जुड़ा सवाल
धोवताल के इस 95 वर्षीय वृद्ध दंपत्ति की व्यथा केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि क्या समाज और शासन उन लोगों तक समय पर पहुंच पा रहे हैं जिन्हें सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता है, जीवनभर मेहनत करने के बाद आज समयलाल पंडों और उनकी पत्नी रुकमन पण्डो सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित आश्रय और इलाज की उम्मीद में प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मार्मिक गुहार पर कितनी संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करता है तथा इस वृद्ध दंपत्ति को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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