- नौगई तिहरे हत्याकांड की जांच अब सीबीआई के जिम्मे,क्या जांच केवल दो दर्ज अपराधों तक सीमित रहेगी या पुलिस की भूमिका भी होगी जांच के दायरे में?
- राज्य सरकार की अधिसूचना में केवल दो अपराध क्रमांक के अनुसंधान का उल्लेख,अब नजर इस बात पर कि क्या सीबीआई पूरे घटनाक्रम, पुलिस की भूमिका और कथित संरक्षण के आरोपों की भी करेगी पड़ताल
- नौगई हत्याकांड में सीबीआई जांच शुरू होने की तैयारी, क्या पुलिस और संरक्षण देने वालों तक पहुंचेगी जांच?
- सीबीआई के हवाले नौगई हत्याकांड,अब सबसे बड़ा सवाल—क्या केवल अपराध या पूरी साजिश की होगी जांच?
- नौगई हत्याकांड:सीबीआई जांच का रास्ता साफ,अब सबकी नजर जांच के दायरे और पहली कार्रवाई पर
- सीबीआई जांच के जिम्मे नौगई हत्याकांड, क्या दर्ज अपराधों से आगे बढ़ेगी जांच की दिशा?
रवि सिंह
कोरिया,02 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बहुचर्चित नौगई तिहरे हत्याकांड में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी होने के बाद जहां पीडि़त परिवार और समाज में निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है,वहीं अब एक नया और महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आ गया है, सवाल यह है कि क्या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) केवल थाना सोनहत में दर्ज दो अपराधों की विवेचना तक सीमित रहेगी, या फिर पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस की भूमिका, कथित लापरवाही, संभावित संरक्षण,जनप्रतिनिधियों से जुड़े आरोप और अन्य सभी पहलुओं की भी जांच करेगी 30 जून 2026 को गृह (सी-अनुभाग) विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा जारी अधिसूचना में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम,1946 की धारा 6 के तहत थाना सोनहत में दर्ज अपराध क्रमांक 65/2026 एवं 66/2026 के अनुसंधान के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (सीबीआई) को पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में अधिकार क्षेत्र प्रदान करने की सहमति दी गई है, अधिसूचना में इन दोनों अपराधों के अनुसंधान का स्पष्ट उल्लेख है, लेकिन पुलिस अधिकारियों की भूमिका, विभागीय लापरवाही या अन्य संभावित आरोपों का अलग से उल्लेख नहीं है,यही कारण है कि अब इस अधिसूचना की भाषा और जांच के वास्तविक दायरे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
क्या केवल दो एफआईआर की होगी जांच?
कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी सीबीआई जांच का आधार राज्य सरकार द्वारा संदर्भित प्रकरण होता है, हालांकि विवेचना के दौरान यदि ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो मूल अपराध से जुड़े हों,तो जांच एजेंसी उन पहलुओं तक भी पहुंच सकती है, यही कारण है कि नौगई मामले में लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सीबीआई केवल दर्ज अपराधों के तथ्यों तक सीमित रहेगी या विवेचना के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों पर भी कार्रवाई करेगी, थाना सोनहत में 16 जून को पहली एफआईआर आरोपी पक्ष के एक युवक की शिकायत पर दर्ज हुई थी, इसके अगले दिन 17 जून को जघन्य वारदात के बाद मृतक भरत सिंह लल्ला के पुत्र की ओर से दूसरी एफआईआर दर्ज कराई गई,इन्हीं दोनों अपराधों को अधिसूचना में सीबीआई जांच के लिए संदर्भित किया गया है।
परिजनों की मांग केवल हत्या
की जांच नहीं,पूरे घटनाक्रम की जांच
घटना के बाद से मृतकों के परिजन लगातार यह कहते रहे हैं कि उनकी लड़ाई केवल आरोपियों को सजा दिलाने तक सीमित नहीं है,उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर पुलिस की लापरवाही,संरक्षण,प्रभाव या गलत निर्णय के कारण यह वारदात हुई है तो उसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए, परिजनों ने पूर्व में राज्य शासन,पुलिस महानिदेशक सरगुजा आईजी और अन्य अधिकारियों को दिए गए ज्ञापनों में कई मांगें रखी थीं, इनमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच,कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच, मोबाइल लोकेशन,इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण, कथित आत्मसमर्पण की परिस्थितियों की जांच तथा संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण की मांग भी शामिल थी,अब जबकि सीबीआई जांच का रास्ता साफ हो गया है,परिजनों की उम्मीद है कि जांच एजेंसी उनके आवेदन और उपलब्ध साक्ष्यों को भी गंभीरता से सुनेगी।
क्या पुलिस की भूमिका भी
होगी जांच का हिस्सा?
घटना के बाद से लगातार यह आरोप लगाया जाता रहा कि पुलिस को दोनों पक्षों के बीच तनाव की जानकारी पहले से थी,यह भी कहा गया कि विवाद की सूचना मिलने के बाद पुलिस दिनभर सक्रिय रही,लेकिन इसके बावजूद रात में इतनी बड़ी वारदात हो गई, स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी लगातार उठाया जाता रहा कि यदि संभावित बड़ी घटना की आशंका थी तो पुलिस की निगरानी दोनों पक्षों पर समान रूप से क्यों नहीं रही, कुछ लोगों ने थाना प्रभारी की अनुपस्थिति,प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों द्वारा दिए गए शुरुआती बयानों पर भी प्रश्न उठाए,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी भी सार्वजनिक रूप से अपने स्तर पर कार्रवाई को नियमसम्मत बताते रहे हैं। अब यह देखना होगा कि सीबीआई जांच के दौरान इन पहलुओं पर भी कोई तथ्यात्मक परीक्षण होता है या नहीं।
सीडीआर और इलेक्ट्रॉनिक
साक्ष्यों पर टिकी उम्मीदें…
नौगई हत्याकांड को लेकर जिले में लगातार यह चर्चा रही है कि मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन डेटा और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच से पूरे घटनाक्रम की कई परतें सामने आ सकती हैं, परिजनों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि घटना से पहले, घटना के दौरान और उसके बाद हुई बातचीत तथा संपर्कों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना पूरी तरह अचानक हुई थी या पूर्व नियोजित थी,हालांकि इन दावों और आशंकाओं की पुष्टि अभी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।
ज्योत्सना महंत ने
कहा-न्याय सबसे महत्वपूर्ण
कोरबा लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात के दौरान कहा कि इस जघन्य घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात पीडि़त परिवार को न्याय दिलाना है, उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य पूरी सच्चाई सामने लाना होना चाहिए और निष्पक्ष जांच से ही लोगों का विश्वास कायम रहेगा, उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।
अब सीबीआई की पहली कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें- अधिसूचना जारी होने के बाद अब सबसे बड़ा इंतजार इस बात का है कि सीबीआई कब औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में लेती है, इसके बाद एजेंसी घटनास्थल का निरीक्षण,केस डायरी का परीक्षण, दस्तावेजों का अधिग्रहण,गवाहों के बयान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर सकती है,पूरे प्रदेश की निगाहें अब इस बात पर हैं कि सीबीआई की विवेचना का वास्तविक दायरा क्या होगा। क्या जांच केवल दो दर्ज अपराधों के अनुसंधान तक सीमित रहेगी,या फिर विवेचना के दौरान सामने आने वाले सभी तथ्यों,पुलिस की भूमिका,इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों,कथित संरक्षण और अन्य संबंधित पहलुओं का भी परीक्षण करेगी। इन सभी प्रश्नों का उत्तर अब केवल सीबीआई की जांच और उसके निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता जय प्रकाश शुक्ला की रायः केवल अपराध की जांच नहीं,पूरी सच्चाई के लिए न्यायिक जांच अधिक प्रभावी

हाईकोर्ट बिलासपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता जय प्रकाश शुक्ला ने नौगई ट्रिपल हत्याकांड की जांच को लेकर कहा कि यदि उद्देश्य केवल दर्ज अपराधों की जांच,साक्ष्य संकलन और आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करना है,तो राज्य पुलिस भी इसके लिए सक्षम एजेंसी है,उन्होंने कहा कि वर्तमान अधिसूचना के अनुसार सीबीआई का अन्वेषण मुख्य रूप से दर्ज अपराधों के तकनीकी पहलुओं और साक्ष्यों तक सीमित रहेगा, न्होंने कहा कि यदि इस जघन्य वारदात के पीछे किसी व्यापक साजिश, प्रशासनिक चूक,संरक्षण या अन्य संवेदनशील पहलुओं को सामने लाना उद्देश्य है,तो उनकी विधिक राय में न्यायिक जांच अधिक प्रभावी विकल्प होती। न्यायिक जांच का दायरा व्यापक होता है और उसमें अधिकारियों की भूमिका,निर्णय प्रक्रिया तथा पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा की जा सकती है। जय प्रकाश शुक्ला के अनुसार,ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायिक जांच वास्तविक तथ्यों तक पहुंचने और जनता के मन में उठ रहे सभी सवालों का समग्र उत्तर देने में अधिक सक्षम साबित हो सकती है।
क्या सीबीआई परिजन
पक्ष का आवेदन भी लेगी?
पीडि़त परिवार का कहना है कि अब वे अपने सभी दस्तावेज,आवेदन,शिकायतें और उपलब्ध साक्ष्य सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगे,उनका मानना है कि केवल पुलिस केस डायरी के आधार पर ही नहीं,बल्कि पीडि़त पक्ष की आपत्तियों,शिकायतों और तथ्यों पर भी जांच आगे बढ़नी चाहिए,कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, जांच एजेंसी जांच के दौरान संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर सकती है और उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का परीक्षण भी कर सकती है, हालांकि जांच की प्रक्रिया और दायरा एजेंसी स्वयं उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय करती है।
रणविजय सिंहदेव बोले…सीबीआई
बाल की खाल तक निकालेगी…
मृतकों के परिजनों से मिलने बैकुंठपुर पहुंचे पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंहदेव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सीबीआई जांच की अनुशंसा किया जाना महत्वपूर्ण निर्णय है,उन्होंने विश्वास जताया कि सीबीआई केवल औपचारिक जांच नहीं करेगी,बल्कि मामले की तह तक पहुंचेगी, उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति,अधिकारी या अन्य किसी स्तर पर किसी प्रकार की भूमिका या संरक्षण सामने आता है तो जांच एजेंसी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उस तक भी पहुंचेगी,उन्होंने यह भी कहा कि घटना के बाद कुछ पुलिस अधिकारियों के प्रारंभिक बयान भी चर्चा का विषय रहे हैं और यदि आवश्यकता हुई तो उनकी भी जांच होनी चाहिए।
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