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अम्बिकापुर@साइबर ठगी का नया खेल : म्यूल अकाउंट धारक गिरफ्तार लेकिन असली साइबर गिरोह तक पहुंच नही…बड़ा सवाल

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कुछ पैसों के लालच में बैंक खाते बेच रहे युवा,ठगों के लिए बन रहे मोहरे…आखिर कब पकड़े जाएंगे नेटवर्क के मास्टरमाइंड?

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 जून 2026 (घटती-घटना)। साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तरीकों के बीच म्यूल अकाउंट का मामला एक बार फिर चर्चा में है। गांधीनगर थाना एवं साइबर सेल पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट के खाताधारक मोहम्मद सम्मी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के बैंक खाते में गेमिंग,ऑनलाइन धोखाधड़ी एवं अन्य अपराधों से जुड़ी राशि प्राप्त हुई थी। खाते में एक से अधिक संदिग्ध ट्रांजेक्शन पाए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि साइबर ठगी के इस पूरे नेटवर्क में केवल खाते उपलब्ध कराने वाले लोग ही पकड़ में क्यों आते हैं,जबकि इनके पीछे बैठे असली संचालकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है।
क्या है म्यूल अकाउंट और कैसे चलता है खेल? साइबर ठग सीधे अपने बैंक खाते में ठगी की रकम नहीं लेते। वे आम लोगों के बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे बैंक खातों को ही म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ठग गिरोह बेरोजगार युवाओं और जरूरतमंद लोगों को कमीशन का लालच देकर बैंक खाते उपलब्ध करवाते हैं। कई बार लोग यह समझे बिना अपना खाता दे देते हैं कि उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में हो सकता है। बाद में यही खाते ठगी की रकम को छिपाने और आगे पहुंचाने का माध्यम बन जाते हैं।
2430 रुपये की रकम से खुला संदिग्ध लेन-देन का मामला : पुलिस के अनुसार भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर संदिग्ध खातों की जांच की जा रही थी। जांच में संबंधित बैंक खाता मोहम्मद सम्मी आत्मज फकरुद्दीन, निवासी बेलखरीखा थाना दरिमा के नाम से संचालित पाया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि उक्त खाते में ऑनलाइन शिकायतों से संबंधित अलग-अलग राज्यों से रकम प्राप्त हुई थी। खाते में 2430 रुपये की धोखाधड़ी की राशि आने और एक से अधिक बार संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। आरोपी के विरुद्ध थाना गांधीनगर में धारा 318(4),317(4),111 बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई।
पूछताछ में खाता उपलब्ध कराने की बात सामने आई : पुलिस के अनुसार आरोपी मोहम्मद सम्मी को पीजी कॉलेज के पास से पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ में आरोपी ने घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अनुज सिंह के साथ मिलकर यह काम करना बताया और खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन मिलने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार इस मामले में अनुज सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है।
छोटे मोहरे गिरफ्त में…बड़े खिलाडि़यों पर सवाल : साइबर अपराध की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ठगी की रकम कई खातों में घूमती रहती है। शुरुआत में जिन लोगों के खाते इस्तेमाल होते हैं, वे आसानी से जांच के दायरे में आ जाते हैं,लेकिन रकम का संचालन करने वाले मुख्य आरोपी और नेटवर्क चलाने वाले लोग कई बार पर्दे के पीछे रह जाते हैं।
अब सवाल यह है…
– म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाला पूरा गिरोह कौन संचालित कर रहा है?
– कितने बैंक खाते इस नेटवर्क से जुड़े हैं?
– क्या केवल खाताधारकों की गिरफ्तारी से साइबर ठगी पर रोक लग पाएगी?
– ठगी की रकम आखिर किन-किन खातों तक पहुंची?
– क्या बड़े साइबर अपराधियों तक पुलिस की जांच पहुंच रही है?
फर्जी मोबाइल नंबर और बैंक खातों का गठजोड़ : साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। पुलिस मुख्यालय द्वारा भी फर्जी मोबाइल नंबर जारी करने वाले पॉइंट ऑफ सेल्स और म्यूल अकाउंट खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि जब ऐसे खाते लगातार अपराधों में इस्तेमाल हो रहे हैं तो इन्हें उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है?
कुछ हजार रुपये के लालच में भविष्य दांव पर : कई युवा जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में अपना बैंक खाता, एटीएम या मोबाइल नंबर दूसरों को दे देते हैं। उन्हें लगता है कि केवल कमीशन मिलेगा, लेकिन बाद में वही खाता साइबर अपराध का माध्यम बन जाता है और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
साइबर अपराध रोकने के लिए
पूरे नेटवर्क का खुलासा जरूरी…

गांधीनगर पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई से एक म्यूल अकाउंट धारक तक पहुंच बनी है, लेकिन साइबर ठगी के इस जाल को खत्म करने के लिए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश जरूरी है।
जांच का दायरा उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए जो
– बैंक खाते खरीद-बेच रहे हैं,
– फर्जी मोबाइल नंबर उपलब्ध करा रहे हैं,
– ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमा रहे हैं,
– और साइबर अपराध की पूरी योजना बना रहे हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस की जांच केवल म्यूल अकाउंट धारकों तक सीमित रहती है या फिर साइबर ठगी के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क का खुलासा करती है।


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