बलौदाबाजार,23 जून 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 8 संदिग्ध मौतों के मामले का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि गांव के ही 46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल ने निजी रंजिश,विवाद,कर्ज,टोना-टोटका की शंका और पारिवारिक कारणों से लोगों को जहरीली शराब पिलाकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग मौकों पर लोगों को शराब में जहर मिलाकर पिलाता था। इस जहरीली शराब को पीने से 8 लोगों की मौत हो गई,जबकि एक युवक की जान बच गई। मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मामले ने तब नया मोड़ लिया जब 6 जून को ग्रामीणों ने एसडीएम कसडोल को आवेदन देकर गांव में हुई लगातार मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने रामसहाय जायसवाल पर संदेह जताते हुए उसकी भूमिका की जांच करने की मांग की थी। जांच के दौरान पुलिस ने सात मृतकों के शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक परीक्षण के लिए रायपुर भेजे। एक मृतक का अंतिम संस्कार पहले ही हो चुका था। तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक इनपुट और ग्रामीणों से पूछताछ के आधार पर पुलिस का शक रामसहाय पर गहराता गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने चूहा मारने के बहाने जहरीला पदार्थ खरीदा था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि लोगों को जहर देने से पहले उसने उसका परीक्षण एक कुत्ते पर किया था। इसके बाद उसने अलग-अलग तारीखों में अपने निशाने पर रहे लोगों को शराब में जहर मिलाकर पिलाया। शुरुआत में आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ तेज होने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। 23 जून को पुलिस आरोपी को उसके घर, किराना दुकान और घटनास्थलों पर लेकर पहुंची। जांच के दौरान वहां से शराब में मिलाए जाने वाले जहरीले पदार्थ को जब्त किया गया। आरोपी को गांव में देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और लोगों ने उसके खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। खर्वे गांव में मौतों का सिलसिला 6 फरवरी 2026 को बद्री पटेल की मौत से शुरू हुआ था। इसके बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू की मौत हुई। मार्च में बुधराम जायसवाल, छत्तूराम साहू और विनोद साहू की जान गई। अप्रैल में गजानंद मांझी और चैतूराम साहू की मौत हुई, जबकि 14 मई को महेतरू साहू की मौत के साथ यह सिलसिला आठवीं मौत तक पहुंच गया। लगातार हो रही इन मौतों से गांव में भय और दहशत का माहौल बन गया था।
बड़ी संख्या में ग्रामीण मामले की शिकायत लेकर कसडोल थाने भी पहुंचे थे। गांव में लगातार हो रही मौतों के बाद यह चर्चा भी फैल गई थी कि कथित रूप से गड़े हुए खजाने को पाने के लिए 21 लोगों की बलि देने की योजना बनाई गई है। ग्रामीणों के बीच यह बात कही जा रही थी कि 8 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 लोग अभी बाकी हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब तक की जांच में खजाने के लिए बलि या किसी तांत्रिक अनुष्ठान से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। जांच में मुख्य वजह आरोपी की व्यक्तिगत रंजिश, विवाद और संदेह ही सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एक ही गांव में तीन महीने के भीतर आठ लोगों की मौत का यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया है।
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