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अम्बिकापुर@सरगुजा पुलिस का साइबर अपराधियों पर शिकंजा : म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई…दो मामलों में 5 आरोपी गिरफ्तार

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महाराष्ट्र,गुजरात,पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से जुड़े खातों का खुलासा,अश्लील वीडियो देखने के नाम पर महिला से 4.50 लाख की ठगी


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,05 जून 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा पुलिस ने साइबर अपराध और म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए दो अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। कोतवाली और गांधीनगर थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। एक मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों से जुड़े म्यूल खातों का संचालन करने वाले दो आरोपियों को पकड़ा गया है, जबकि दूसरे मामले में महिला को गिरफ्तारी का भय दिखाकर 4.50 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ से गिरफ्तार किया गया है। डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल के निर्देशन में सरगुजा पुलिस द्वारा म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम धारकों और साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय (तकनीकी सेवाएं) नवा रायपुर से प्राप्त निर्देशों के बाद जिले में ऐसे खातों और उनके संचालकों की विशेष जांच की जा रही है।
चार राज्यों से शिकायत वाले म्यूल खातों का खुलासा : कोतवाली थाना पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि सूरज कुमार कश्यप निवासी नमनाकला, अंबिकापुर के नाम पर इंडियन बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में संचालित दो बैंक खाते साइबर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे थे। इन खातों के विरुद्ध महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और छत्तीसगढ़ से साइबर पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस जांच में सामने आया कि इंडियन बैंक के खाता क्रमांक 7844758099 तथा बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाता क्रमांक 60504614490 में ऑनलाइन माध्यम से कुल 2 लाख 4 हजार 200 रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। प्रथम दृष्टया यह राशि साइबर ठगी से जुड़ी होने की आशंका पाई गई। प्रकरण में अपराध क्रमांक 374/2026 के तहत धारा 318(4), 317(4) एवं 3(5) बीएनएस के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पूछताछ के दौरान सूरज कुमार ने बताया कि उसके बैंक खातों की पासबुक,चेकबुक और एटीएम कार्ड उसने धीरज सिंह के माध्यम से अन्य व्यक्ति को उपलब्ध कराए थे। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने धीरज सिंह (34 वर्ष), निवासी फुंडूरडिहारी बीचपारा,थाना गांधीनगर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। धीरज ने स्वीकार किया कि सूरज कुमार से प्राप्त बैंक दस्तावेज उसने आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा को सौंपे थे। पुलिस के अनुसार संबंधित खातों का उपयोग भी आयुष सिन्हा द्वारा किया जा रहा था तथा ठगी की रकम से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग सामग्री उसके पास होने की जानकारी मिली। प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने सूरज कुमार और धीरज सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस अब आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की टीकमगढ़ से दबोचे गए आरोपी भी जांच कर रही है। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पुलिस टीम को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले रवाना किया गया। वहां से तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
गिरफ्तार आरोपियों मेंः काशीराम अहिरवार (34 वर्ष) निवासी ग्राम केनवार, थाना बड़ागांव, जिला टीकमगढ़। पन्नालाल यादव (40 वर्ष) निवासी ग्राम डुंडा,थाना बड़ागांव, जिला टीकमगढ़। अभिलाषा अहिरवार (20 वर्ष) निवासी चौपरा मोहल्ला, ग्राम जरुआ, थाना लिधौरा, जिला टीकमगढ़। शामिल हैं। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जुड़े पाए गए जिनका उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने में किया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। मामले में अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश और जांच अभी जारी है।
म्यूल अकाउंट बन रहे साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार : पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधी सीधे अपने खाते का उपयोग नहीं करते, बल्कि कमीशन का लालच देकर अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम हासिल कर लेते हैं। इन्हीं खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ठगी की रकम पहले इन खातों में जमा की जाती है और फिर तेजी से अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे जांच एजेंसियों को वास्तविक आरोपी तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
इन अधिकारियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका : कोतवाली थाना के प्रकरण में थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत सिन्हा, उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह, प्रधान आरक्षक सियाराम मरावी, आरक्षक लालबाबू सिंह और सैनिक संतोष पटेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं गांधीनगर थाना के प्रकरण में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, उपनिरीक्षक दिलीप दुबे, आरक्षक दीनदयाल सिंह, दिनेश यादव, सरस्वती सिंह तथा साइबर सेल के आरक्षक अमन पुरी और रमेश प्रसाद ने कार्रवाई में अहम योगदान दिया।
महिला शिक्षिका को गिरफ्तारी का डर दिखाकर 4.50 लाख की ठगी
दूसरे मामले में थाना गांधीनगर क्षेत्र के ग्राम अजिरमा निवासी मंजूलिना किस्पोट्टा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 19 मार्च 2026 को स्कूल से घर लौटने के बाद उन्हें एक अज्ञात मोबाइल नंबर 919232064586 से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से गूगल ब्राउजर पर अश्लील फोटो और वीडियो देखे जाने की शिकायत है,जो दंडनीय अपराध है और इसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। अचानक मिली इस धमकी से महिला घबरा गई। आरोपी लगातार संपर्क में रहकर उन्हें कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाते रहे। डर और मानसिक दबाव के कारण महिला ने अलग-अलग तारीखों में विभिन्न फोन-पे नंबरों और बैंक खातों में कई किश्तों में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। कुल मिलाकर उनसे 4 लाख 50 हजार रुपए की ठगी की गई। शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने साइबर पुलिस पोर्टल की मदद से ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि पीडि़ता द्वारा भेजी गई रकम भारतीय स्टेट बैंक, फिनो पेमेंट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित विभिन्न खातों में जमा की गई और बाद में अन्य खातों में ट्रांसफर कर ऑनलाइन तथा एटीएम के माध्यम से निकाली गई।


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