हमें अपने आसपास आसानी से प्राप्त होने वाला जहर है तंबाकू,हम सभी इसके बारे में,इससे होनेवाली जानलेवा बीमारियां और खतरों के बारे में अच्छे से जागरूक हैं। टीवी, अखबार और सोशल मीडिया पर तंबाकू के प्रति जागरूकता विज्ञापन देखते रहते हैं। साधारणतः अनपढ़ से लेकर उच्च शिक्षित तक,हर वर्ग,हर उम्र के लोग इसके नुकसान के बारे में जानते है,परंतु गंभीरता नहीं दिखाते,यही सबसे बड़ी समस्या है हमारे समाज कीं। हमारे आखों के सामने छोटे-छोटे स्कूली बच्चे भी तंबाकू का सेवन करते नजर आते है, चौराहों पर संभ्रात घर की लड़कियां, नामी स्कूल की छात्र-छात्राएं भी सिगरेट फूंकते नजर आते है,गांवों-कस्बों में भी तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या बहुत ज्यादा हैं। तंबाकू, सिगरेट के पैकेट पर घातक चेतावनी लिखी होती है,प¸ढ़ना और चेतावनी के जानलेवा बीमारी के चित्र को समझना सबको मालूम है,पर गंभीरता ही नहीं। इस साल 2026 विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम आकर्षण का पर्दाफ़ाश—निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला यह हैं।
नशे के लिए लोगों ने मिथ्य तो ऐसे पाल रखे है कि,नशे के लिए ही इनका जीवन बना हो। कोई कहता है कि तंबाकू से उनका पाचन सुधरता है,कोई कहता है कि तंबाकू के सेवन से नींद अच्छी आती है,कोई कहता है कि तंबाकू खाने से काम में मन लगा रहता है ऐसा बोल-बोल कर तंबाकू खाने लग जाते है फिर इसे लत में तब्दील कर लेते है,धीरे-धीरे तंबाकू शरीर को खोखला करना शुरू कर देता है,फिर अवयवों को गलाता है और महंगे लाइलाज बीमारी के चौखट पर खड़ा कर देता हैं। हम पूरी दौलत खर्च करके भी मौत को जीवन में नहीं बदल सकते, फिर इस अनमोल जीवन को अपने नशे के शौक को पूरा करने के लिए क्यों घातक बीमारियों के हवाले करते हो? किशोरवयीन बच्चे, युवा पीढ़ी तो आधुनिकता का दम भरने, दिखावे के चक्कर में और अभिभावकों के नियंत्रण के अभाव में तंबाकू, सिगरेट, हुक्का फुंकने लगते हैं। इस आधुनिकता के भ्रमजाल में युवाओं के लत में बढ़ोतरी के लिए नवनवीन हुक्का पार्लर का साम्राज्य शहरों में खूब फलफूल रहा हैं।
तंबाकू का सेवन विविध पद्धति से किया जाता है जैसे :- बीड़ी, सिगरेट,हाथ से बनी
सिगरेट,पाइप,सिगार,हुक्का,वॉटर-पाइप,चुट्टा,धुमती और चिलम शामिल हैं। इसके अलावा तंबाकू वाला पान,खैनी,गुटखा और तंबाकू मिश्रित पान मसाला। मिश्री, गुल,बज्जर,गुड़ाखू आदि जैसे तंबाकू उत्पादों को दांतों और मसूड़ों पर लगाया जाता है और नसवार को सूंघा जाता हैं। हमारे भारत देश में हर दिन लगभग 3,500 मौतें तंबाकू इस्तेमाल की वजह से होती हैं। भारत में 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 26.7 करोड़ तंबाकू उपयोगकर्ता हैं। 2011 में 35 से 69 साल के लोगों के लिए तंबाकू इस्तेमाल का आर्थिक खर्च 1,04,500 करोड़ रुपये था।
जब कोई व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता,परंतु किसी अन्य द्वारा किए जा रहे धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आता है एवं उस धुएं को सांस के जरिये ऑक्सीजन के साथ शरीर में लेता है तब वह व्यक्ति सेकेंड हैंड धूम्रपान वाला व्यक्ति होता हैं। हम अक्सर अपने घरों या आसपास किसी को धूम्रपान करते हुए देखते है,जिसका धुंआ पुरे घर में फैल जाता है और घर के अन्य सदस्य भी उस धूम्रपान के धुएं के शिकार बन जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार, तंबाकू उन आधे से ज़्यादा तंबाकू उपभोक्ताओं की जान ले लेता है जो इसे छोड़ते नहीं हैं। तंबाकू से हर साल 7 मिलियन से ज़्यादा लोगों की मौत होती है; इसमें लगभग 1.6 मिलियन लोग जान गवांते है, जो सेकंड-हैंड धूम्रपान के संपर्क में आते हैं। साथ ही तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण लोग विकलांग हो जाते हैं और लंबे समय तक दर्दभरी तकलीफ़ झेलते हैं।
तंबाकू से हर साल 1.35 मिलियन से अधिक की असमय मौत जिसमे धूम्रपान और सेकेंड हैंड स्मोक से लगभग 1.2 मिलियन भारतीयों की मौत भी शामिल हैं। स्मोकलेस तंबाकू से होने वाले वैश्विक स्वास्थ्य बोझ का 70 प्रतिशत हिस्सा भारत में हैं। स्मोकलेस तंबाकू के इस्तेमाल से हर साल 2,30,000 से ज़्यादा भारतीयों की मौत होती हैं। भारत में मुंह के कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामले स्मोकलेस तंबाकू के इस्तेमाल से होते हैं। जो लोग बीड़ी और सिगरेट पीते हैं, वे धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में 6 से 10 साल पहले मर जाते हैं। भारत में कैंसर के सभी मामलों में से 27 प्रतिशत तंबाकू के इस्तेमाल की वजह से होते हैं। कर्करोग,हृदय विकार,मधुमेह, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां, स्ट्रोक, इनफर्टिलिटी, अंधापन,ट्यूबर कुलोसिस,मुंह की बीमारियां अन्य के लिए यह तंबाकू बेहद घातक घटक हैं। कर्करोगों के 50 फीसदी मामले पुरुषों में और 20 फीसदी महिलाओं में तंबाकू से होते हैं। तंबाकू से भारतीय अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 1773.4 बिलियन रुपये (अमेरिकी डॉलर 27.5 बिलियन) का नुकसान होता है, जो देश के सकल घरेलु उत्पाद का 1 प्रतिशत से ज़्यादा हैं।