
- बिजली विभाग की ‘आंख-मिचौली’ से जनता त्रस्त,दिनभर कटौती और रातभर बेचैनी
- ट्रांसफार्मर ओवरलोड,केबलों में आग…जिला मुख्यालय की बिजली व्यवस्था भगवान भरोसे
- गर्मी कम,बिजली विभाग ज्यादा तपा रहा : सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
- बिना आंधी-पानी के घंटों गुल हो रही बिजली,जनता ने पूछा—आखिर समस्या क्या है?
- सुशासन के दावों के बीच बिजली संकट गहराया,जिला मुख्यालय में लोग परेशान
- जर्जर केबल और कमजोर ट्रांसफार्मर बने मुसीबत, बिजली कटौती से कारोबार भी प्रभावित
- बिजली संकट पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से बढ़ा लोगों का गुस्सा
- हर साल गर्मी आते ही क्यों ध्वस्त हो जाती है बिजली व्यवस्था? जनता ने उठाए सवाल
- पंखे बंद, कूलर शांत और जनता परेशानः जिला मुख्यालय में बिजली व्यवस्था चरमराई
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,23 मई 2026 (घटती-घटना)। जिला मुख्यालय इन दिनों भीषण गर्मी के साथ-साथ बदहाल बिजली व्यवस्था की दोहरी मार झेल रहा है,तापमान लगातार बढ़ रहा है,लेकिन उससे कहीं ज्यादा लोगों का पारा बिजली विभाग की लचर व्यवस्था को लेकर चढ़ा हुआ है, हालत यह है कि बिना बारिश, बिना आंधी और बिना किसी बड़े तकनीकी कारण के भी दिनभर बिजली की आंख-मिचौली जारी रहती है, कभी कुछ मिनट तो कभी घंटों तक बिजली गुल रहने से आमजन का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है, शहर के लोग अब मजाक में कहने लगे हैं कि बिजली कब जाएगी और कब आएगी, इसका अंदाजा मौसम विभाग भी नहीं लगा सकता, गर्मी के इस दौर में पंखे बंद हैं, कूलर जवाब दे चुके हैं और रात की नींद बिजली विभाग की मर्जी पर निर्भर हो गई है।
गर्मी से ज्यादा बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी
एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, दूसरी तरफ बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं, घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं, कई परिवार रातभर छत और आंगन में जागकर समय बिताने को मजबूर हैं, लोगों का कहना है कि पहले बिजली केवल खराब मौसम में जाती थी, लेकिन अब बिना किसी वजह के भी सप्लाई बार-बार बाधित हो रही है, दिनभर में कई बार बिजली कटने और लो-वोल्टेज की समस्या के कारण लोगों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं, कई मोहल्लों में फ्रिज सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। पानी ठंडा नहीं हो पा रहा, कूलर हवा नहीं दे रहे और इन्वर्टर भी लगातार ट्रिप हो रहे हैं।
जर्जर केबलें और ओवरलोड ट्रांसफार्मर बने संकट की जड़
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिजली विभाग वर्षों से पुराने ढांचे के भरोसे शहर की बढ़ती आबादी और बढ़ते लोड को संभालने की कोशिश कर रहा है, कई इलाकों में बिजली केबल अत्यधिक गर्म होकर जलने लगी हैं, जगह-जगह स्पार्किंग और केबल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं,लोगों का कहना है कि घटिया गुणवत्ता की सामग्री और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है, शहर के अधिकांश ट्रांसफार्मर वर्तमान जरूरतों के मुकाबले कम क्षमता वाले बताए जा रहे हैं, पहले जिन इलाकों में सीमित घर थे, वहां अब आबादी कई गुना बढ़ चुकी है, घरों में एसी, कूलर, फ्रिज और अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग बढ़ने के बावजूद ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, नतीजा यह है कि ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर बार-बार ट्रिप हो रहे हैं। कई क्षेत्रों में लो-वोल्टेज की समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि मोटर तक ठीक से नहीं चल पा रही।
बिजली विभाग का फोन भी अब सजावटी वस्तु बन गया…
शहर के लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है,लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर या तो फोन उठता नहीं या फिर जवाब मिलता है लाइन देखी जा रही है,कई नागरिकों का कहना है कि बिजली विभाग की शिकायत व्यवस्था अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, घंटों बिजली बंद रहने के बावजूद लोगों को यह तक नहीं बताया जाता कि समस्या क्या है और कब तक सप्लाई बहाल होगी, लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी केवल फॉल्ट सुधारने तक सीमित हैं, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर प्रयास दिखाई नहीं देता।
व्यापार और छोटे कारोबार पर भी असर…
लगातार बिजली कटौती का असर अब बाजार और छोटे व्यवसायों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। छोटे दुकानदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, आइसक्रीम, डेयरी और कोल्ड ड्रिंक बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि बिजली नहीं रहने से उनका सामान खराब होने लगा है, साइबर कैफे, फोटो स्टूडियो और इलेक्ट्रॉनिक दुकानों का काम प्रभावित हो रहा है, छोटे उद्योगों और वेल्डिंग, मोटर रिपेयर जैसे काम करने वाले लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया बना जनता का गुस्सा निकालने का मंच
जब शिकायतों के बाद भी जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ तो लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू कर दिया, फेसबुक,व्हाट्सऐप और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर बिजली व्यवस्था को लेकर लगातार पोस्ट और टिप्पणियां वायरल हो रही हैं,कई लोगों ने तंज कसते हुए लिखा गर्मी से कम, बिजली विभाग की कृपा से ज्यादा पसीना निकल रहा है, कुछ नागरिकों ने जले हुए केबल और ओवरलोड ट्रांसफार्मर की तस्वीरें साझा करते हुए सवाल उठाए कि आखिर हर साल गर्मी आते ही बिजली व्यवस्था क्यों जवाब दे देती है, सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब जनता की परेशानियों पर कोई गंभीर पहल दिखाई नहीं दे रही।
जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जर्जर बिजली केबलों को तत्काल बदला जाए,अतिरिक्त क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए जाएं और अनावश्यक बिजली कटौती पर रोक लगाई जाए,लोगों ने यह भी कहा कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी, फिलहाल जिला मुख्यालय में लोग हर दिन यही उम्मीद कर रहे हैं कि शायद आज बिजली कुछ ज्यादा देर तक रहे। लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता है कि गर्मी से ज्यादा ‘बिजली संकट’ ने लोगों का चैन छीन लिया है।
‘सुशासन’ के दौर में बिजली संकट पर उठ रहे सवाल
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में इन दिनों ‘सुशासन तिहार’ के जरिए सरकार जनता तक पहुंचने और समस्याओं के समाधान का दावा कर रही है,लेकिन जिला मुख्यालय की बिजली व्यवस्था सरकार के इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है, लोगों का कहना है कि यदि जिला मुख्यालय की स्थिति इतनी खराब है, तो दूरस्थ इलाकों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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