रायपुर,23 मई 2026। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो रहा है। बैज को दोबारा मौका मिलेगा या नहीं, इसको लेकर संशय है। इन सबके बीच पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने प्रदेश का दौरा शुरू कर दिया है। सिंहदेव के दौरे से बैज बेचैन हैं और हमलावर भी। जैसे-जैसे प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल खत्म होने की तारीख नजदीक आ रही है, पीसीसी में हलचल मची है। शुक्रवार को बैज ने पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव पर सीधे हमला बोला और उन्हें दिल्ली की राजनीति करने की सलाह दे दी। बात यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने अपने बयान को पार्टी की आधिकारिक फेसबुक अकाऊंट पर शेयर किया। इसके बाद से पार्टी में खलबली मची है। दरअसल,टीएस सिंहदेव ने कुछ समय पहले पीसीसी की कमान संभालने की इच्छा जताई थी, जिससे बैज नाखुश हैं। हालांकि देर शाम सिंहदेव की बैज से चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक बैज ने अपनी तरफ से सफाई दी। सिंहदेव ने भी बैज को सीएम बनने की संभावना जताकर विवाद का पटाक्षेप करने की कोशिश की है। मगर अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद थमने के आसार नहीं हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सिंहदेव पर हमले से पहले बैज ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की थी। मीडिया से चर्चा के बाद में वे नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत से भी मिलने गए। बैज की डॉ. महंत से करीब घंटे भर चर्चा हुई। महंत भी बैज के बयान से नाखुश बताए जाते हैं। मगर महंत और पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। दोनों की नजरें पार्टी हाईकमान पर टिकीं हुई है। बताया गया है कि प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने पिछले दौरे में कई सीनियर नेताओं से मुलाकात की थी और उनसे सामान्य कामकाज को लेकर चर्चा की थी। कुछ जिला अध्यक्ष दीपक बैज की कार्यप्रणाली से नाखुश हैं। उन्होंने प्रदेश प्रभारी से बैज की शिकायत भी की थी। दूसरी तरफ, महासमुंद, रायगढ़ और बालोद,कांकेर जिले के दौरे के बाद पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव बस्तर दौरे का कार्यक्रम बन रहा है। वो रविवार को कोरबा में मछुआ सम्मेलन में रहेंगे,इसमें महंत के साथ बैज भी रहेंगे। गौर करने लायक बात ये है कि सिंहदेव की करीब दो महीने पहले दिल्ली में पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से अकेले में घंटे भर चर्चा हुई थी। चर्चा है कि हाईकमान के कुछ संकेतों के बाद ही सिंहदेव प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। इससे बैज असहज बताए जाते हैं। बैज को लेकर यह कहा जा रहा है कि तीन साल के कार्यकाल में उपलब्धियां शून्य रही हैं।
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