जगदलपुर,23 मई 2026। धर्मांतरण के बाद आरक्षण लाभ प्राप्त कर रहे परिवारों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर करने की मांग को लेकर बस्तर संभाग से बड़ी संख्या में आदिवासी ग्रामीण दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। सर्व आदिवासी समाज के नेतृत्व में बस्तर संभाग के सातों जिलों से करीब 1200 ग्रामीण राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं, जहां वे 24 मई को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर डी-लिस्टिंग की मांग उठाएंगे। सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने बताया कि यह अभियान देशव्यापी स्तर पर चलाया जा रहा है। उनके अनुसार विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य धर्म परिवर्तन कर चुके परिवारों को अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण और अन्य संवैधानिक सुविधाओं से अलग करने की मांग को प्रमुखता से उठाना है। अरविंद नेताम ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्थानों पर अवैध रूप से धार्मिक गतिविधियों का संचालन किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और आदिवासी समाज की मूल पहचान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए डी-लिस्टिंग को आवश्यक बताया जा रहा है। स्वास्थ्य कारणों से अरविंद नेताम स्वयं दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। गौरतलब है कि धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग का मुद्दा पिछले कुछ समय से विभिन्न आदिवासी संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले ज्ञापन के माध्यम से आंदोलनकारी अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
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