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कोरिया@ साहू समाज विवाद में नया मोड़

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  • साहू समाज में संग्राम,अध्यक्ष पद विवादित,बहिष्कार पर बवाल
  • एक लाख रुपये मांगने और अवैध बहिष्कार का आरोप,पूर्व जिला अध्यक्ष मधुसूदन साहू का लिखित निंदा प्रस्ताव वायरल
  • खुद प्रदेश अध्यक्ष की नहीं मानी,अब समाज से निकालने का फरमान!
  • कोरिया साहू समाज में ‘एटीकेटी अध्यक्ष’ का नया विवाद
  • बिना चुनाव,बिना वैधता फिर भी बहिष्कार का आदेश जारी!
  • साहू समाज में नेतृत्व संकट,कुर्सी बचाने की लड़ाई या समाज सेवा?
  • अंतरजातीय विवाह पर बवाल,समाज सेवा के नाम पर वसूली के आरोप
  • एक लाख दो,वरना बहिष्कार! साहू समाज की बैठक पर उठे सवाल


-संवाददाता-
कोरिया,21 मई 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिले में साहू समाज का विवाद अब और गहरा गया है, जिला अध्यक्ष पद को लेकर पहले से चल रही खींचतान के बीच अब पूर्व जिला अध्यक्ष मधुसूदन प्रसाद साहू का एक लिखित निंदा प्रस्ताव सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है, इस दस्तावेज के वायरल होने के बाद समाज के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जारी लिखित पत्र में मधुसूदन प्रसाद साहू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि साहू समाज की कथित जिला और तहसील कार्यकारिणी के कुछ लोगों द्वारा अंतर्जातीय विवाह के नाम पर रुपये लेने और दबाव बनाने का काम किया जा रहा है, उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अवैध और निंदनीय बताया है।
सवाल अब भी कायम
पूरा घटनाक्रम कई बड़े सवाल छोड़ रहा है जब जिला अध्यक्ष का पद विवादित है,तो सामाजिक बैठक किस अधिकार से बुलाई गई? क्या किसी व्यक्ति को अंतर्जातीय विवाह के कारण समाज से बहिष्कृत किया जा सकता है? क्या समाज के नाम पर आर्थिक मांग करना वैधानिक है? और सबसे बड़ा सवाल — क्या सामाजिक संगठन अब संविधान से चलेंगे या व्यक्तिगत दबाव से? फिलहाल कोरिया जिले का साहू समाज विवाद अब सामाजिक दायरे से निकलकर कानूनी और प्रशासनिक बहस का विषय बन चुका है।
समाज के नाम पर वसूली का आरोप
पत्र में दावा किया गया है कि साहू समाज के कई युवक और युवतियों ने अंतर्जातीय विवाह किए हैं,लेकिन समाज की कुछ कथित कार्यकारिणी के लोग उनसे पैसे लेकर उन्हें समाज में शामिल करने का काम कर रहे हैं, मधुसूदन साहू ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा समाज के नाम पर रुपया ऐंठने का काम किया जा रहा है,उन्होंने यह भी लिखा कि अलग-अलग जातियों में विवाह करने वाले लोगों को समाज में शामिल करने के बदले आर्थिक लेनदेन किया जा रहा है, पत्र में उदाहरण देते हुए विभिन्न जातियों के बीच विवाह और साथ रहने की बात भी कही गई है, साथ ही आरोप लगाया गया है कि कथित पदाधिकारी इस आधार पर लोगों से आर्थिक मांग कर रहे हैं।
एक लाख रुपये मांगने का सीधा आरोप
पूरा विवाद तब और गंभीर हो गया जब पत्र में यह उल्लेख किया गया कि 17 मई 2026 को ग्राम औरापारा में कथित रूप से बने तहसील पदाधिकारियों द्वारा मधुसूदन साहू से अंतर्जातीय विवाह के नाम पर ?1,00,000 की मांग की गई, पत्र में साफ लिखा गया है कि रकम नहीं देने पर 26 लोगों द्वारा प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया कि आशीर्वाद समारोह में मधुसूदन साहू के घर नहीं जाना है,अब यह आरोप पूरे समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है, यदि आरोप सही पाए जाते हैं,तो मामला केवल सामाजिक विवाद नहीं बल्कि आर्थिक दबाव और अवैध वसूली जैसे गंभीर पहलुओं तक पहुंच सकता है।
बहिष्कार प्रस्ताव को बताया अवैध
मधुसूदन साहू ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि उनके खिलाफ लिया गया बहिष्कार संबंधी निर्णय अवैध और गैरकानूनी है, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने बैठक में हस्ताक्षर किए हैं, वे अपना नाम, पिता का नाम और पता उपलब्ध कराएं ताकि आगे वैधानिक कार्रवाई की जा सके,इस बयान के बाद अब समाज के भीतर तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है,लोगों के बीच चर्चा है कि मामला जल्द ही प्रशासनिक और कानूनी स्तर तक पहुंच सकता है।
पहले से विवादित है जिला अध्यक्ष का पद
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कोरिया जिले में साहू समाज का जिला अध्यक्ष पद पहले से ही विवादों में घिरा हुआ है,प्रदेश अध्यक्ष द्वारा कई बार चुनाव कराने की कोशिश किए जाने के बावजूद चुनाव नहीं हो पाया,आरोप लगते रहे हैं कि बिना चुनाव के ही कुछ लोग स्वयं को अध्यक्ष मानकर संगठन चला रहे हैं, समाज के अंदर अब यही बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब जिला अध्यक्ष पद की वैधता ही स्पष्ट नहीं है, तो फिर बहिष्कार जैसे फैसले किस अधिकार से लिए जा रहे हैं?
अंतरजातीय विवाह योजना से जुड़ा मामला
पूरा मामला अंतर्जातीय विवाह से जुड़ा बताया जा रहा है,छत्तीसगढ़ शासन और केंद्र सरकार द्वारा अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता योजना चलाई जाती है,इस योजना का उद्देश्य समाज में जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता जैसी कुरीतियों को खत्म करना है, ऐसे में यदि किसी व्यक्ति पर अंतर्जातीय विवाह के कारण सामाजिक दबाव बनाया जाता है या बहिष्कार की स्थिति पैदा की जाती है, तो यह मामला संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय से भी जुड़ जाता है।
समाज में दो धड़े आमने-सामने
ताजा दस्तावेज सामने आने के बाद अब साहू समाज दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है,एक पक्ष कथित बैठक और बहिष्कार प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है,जबकि दूसरा पक्ष इसे पूरी तरह अवैध और निजी वर्चस्व की राजनीति बता रहा है,कई समाजजन अब खुलकर कह रहे हैं कि समाज की आड़ में व्यक्तिगत लड़ाई लड़ी जा रही है।
प्रशासनिक जांच की उठने लगी मांग…
पूरा मामला अब सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक जांच की मांग भी उठने लगी है, समाज के कई लोगों का कहना है कि यदि किसी से सामाजिक दबाव बनाकर पैसे मांगे गए हैं या सरकारी योजना से जुड़े मामलों में बाधा डालने की कोशिश हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि समाज के नाम पर चल रही गतिविधियों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।


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