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अम्बिकापुर@अम्बिकापुर@परंपरा के उलट अनोखी शादी : दुल्हन बारात लेकर पहुंची,दूल्हे की हुई विदाई

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सरगुजा के सुलपगा गांव में ‘मसी’ परंपरा के तहत हुआ विवाह, घर जमाई बना दूल्हा


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,19 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण क्षेत्र सुलपगा गांव में एक अनोखी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों से हटकर दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची और ‘मसी’ परंपरा के तहत विवाह संपन्न हुआ। शादी में सबसे खास बात यह रही कि दुल्हन की जगह दूल्हे की विदाई हुई, जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। दुल्हन देवमुनि एक्का के पिता मोहन एक्का ने बताया कि उनके परिवार में चार बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है। ऐसे में परिवार के सहारे के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने खुद बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंचकर विवाह की रस्में पूरी कीं। इस विवाह में परंपरागत ‘कन्यादान’ की जगह ‘वरदान’ की रस्म निभाई गई। शादी पूरी तरह स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई और दहेज जैसी प्रथा से दूरी रखी गई।
दूल्हे की विदाई ने खींचा ध्यान : शादी के बाद दूल्हे की विदाई की गई, जो आमतौर पर दुल्हन की होती है। विदाई के दौरान दूल्हा भावुक होकर रो पड़ा। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए नया और भावनात्मक अनुभव रहा।
घर जमाई बनेगा दूल्हा
मोहन एक्का ने बताया कि दूल्हे को वे अपने घर ले जाकर बेटे की तरह रखेंगे। यह फैसला परिवार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
‘चुमान’ परंपरा का भी पालन
बारात में शामिल महेश तिर्की ने बताया कि उनके समाज में ‘चुमान’ नामक परंपरा होती है, जिसमें शादी के बाद लडके पक्ष की ओर से दहेज दिया जाता है।
पहली बार देखा ऐसा विवाह
लडके पक्ष की उर्मिला बरवा ने कहा कि यह उनके लिए पहली बार का अनुभव है, जब लडकी पक्ष बारात लेकर आया और दूल्हा घर जमाई बना।
समाज में चर्चा का विषय
इस अनोखी शादी ने क्षेत्र में नई सोच और परंपराओं में बदलाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। लोग इसे सामाजिक जरूरत के अनुसार लिया गया सकारात्मक कदम मान रहे हैं।


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