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अम्बिकापुर@फ्लाईओवर की मांग के बीच शहर की अव्यवस्था पर घमासान भाजपा नेता कैलाश मिश्रा के कटाक्ष के बाद कई आवाजें उठीं

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,19 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। शहर की यातायात व्यवस्था, अतिक्रमण और सड़क किनारे लगने वाले ठेलों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता एवं समाजसेवी कैलाश मिश्रा द्वारा आकाशवाणी चौक से संतोष किराना तक फ्लाईओवर बनाने की मांग और चौपाटी क्षेत्र की अव्यवस्था पर कटाक्ष करने के बाद कई अन्य लोगों ने भी नगर निगम व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कैलाश मिश्रा ने कहा था, ‘महापौर जी आकाशवाणी चौक से संतोष किराना तक फ्लाईओवर बनवा दीजिए,चौपाटी में सड़क पर ठेले लगते हैं तो फिर लोग आएं-जाएं कैसे?’ उनके इस बयान के बाद शहर में ट्रैफिक व्यवस्था और अतिक्रमण को लेकर चर्चा तेज हो गई। इसी क्रम में राजेश पांडेय ‘अब्र’ ने कहा कि न चौपाटी की अव्यवस्था में कमी आई,न सिविल कोर्ट के सामने की समस्या खत्म हुई और न ही स्कूल रोड के ठेलेवाले सुधरे। उन्होंने कहा कि जब भी नगर निगम कर्मचारी व्यवस्था सुधारने जाते हैं,दूसरे या तीसरे दिन फिर वही स्थिति बन जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तीनों स्थानों पर ठेले वाले सड़क पर चढ़ाकर दुकानें लगाते हैं और ग्राहक पूरी सड़क घेरकर खड़े रहते हैं, जिससे आवागमन बाधित होता है। कई बार इसी वजह से बेवजह झगड़े की स्थिति भी बनती है। वहीं असीम सेन गुप्ता ने कहा कि आकाशवाणी चौक शहर का सबसे बदहाल क्षेत्र बन चुका है। अब आधी सड़क पर दुकानें लगने लगी हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति के अभाव में ऐसी अव्यवस्थाएं जन्म लेती हैं। बगल में सुरक्षित बाजार बना हुआ है, जहां शेड और चबूतरा भी है, लेकिन उसे आबाद करने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं हो रहा। इधर कांग्रेसी पार्षद शुभम जायसवाल ने भी निगम व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नगर निगम के अधिकारी काम करने को तैयार हैं,लेकिन वहां बैठे नेता उन्हें अच्छे से काम नहीं करने देते। यदि अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए तो शहर का नक्शा ही बदल सकता है। बताया जा रहा है कि हाल ही में नगर निगम आयुक्त ने चौपाटी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए ठेलों को हटवाया था। इस दौरान दो से तीन दिनों तक जेसीबी और ट्रैक्टर लगाए गए, जिससे निगम का खर्च भी हुआ। हालांकि कुछ दिनों बाद फिर उसी स्थान पर ठेले लगने लगे। शहरवासियों का कहना है कि केवल अस्थायी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। स्थायी योजना, वैकल्पिक बाजार स्थल, पार्किंग व्यवस्था और सख्त निगरानी के बिना शहर को जाम और अव्यवस्था से राहत मिलना मुश्किल है।
स्वरंग किड्स एकेडमी पर कार्रवाई को लेकर विवाद गहराया,सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल

शहर के चोपड़ापारा स्थित स्वरंग किड्स एकेडमी के विरुद्ध स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा ने विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा और दबाव में लिया गया निर्णय बताया है। कैलाश मिश्रा ने कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा 5 जून 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर स्कूल संचालन की जानकारी देने के साथ मान्यता संबंधी मार्गदर्शन मांगा गया था। इसके बावजूद विभाग ने करीब 10 महीनों तक आवेदन पर कोई पहल नहीं की। ऐसे में अचानक स्कूल संचालन स्थगित करने और एक लाख रुपए अर्थदंड लगाने का आदेश जारी करना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि जारी आदेश में स्कूल प्रबंधन द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने का उल्लेख किया गया है, जबकि जांच प्रतिवेदन में ऐसी कोई स्वीकारोक्ति नहीं है। मिश्रा के अनुसार जांच रिपोर्ट में स्कूल की अधोसंरचना, मानव संसाधन और बच्चों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाओं को संतोषजनक एवं बेहतर बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब व्यवस्थाएं उचित पाई गईं,तो फिर कठोर कार्रवाई किस आधार पर की गई। साथ ही दावा किया कि यह कार्रवाई कलेक्टर के अनुमोदन के बिना की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
डे-केयर सेंटर बंद होने से अभिभावक परेशानः कैलाश मिश्रा ने कहा कि संबंधित संस्थान केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि डे-केयर सेंटर के रूप में भी संचालित था, जहां कामकाजी अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में छोड़कर निश्चिंत होकर कार्य पर जाते थे। अचानक कार्रवाई के बाद ऐसे अभिभावकों के सामने बच्चों की देखभाल की नई समस्या खड़ी हो गई है।
निष्पक्ष जांच की मांगः उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता लाने, कार्रवाई पर पुनर्विचार करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई दोबारा न हो।


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