बलरामपुर से रेफर पंडो जनजाति के बच्चे का अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में सफल उपचार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,23 मार्च 2026 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्र से आए पंडो जनजाति के 2 वर्षीय मासूम को समय पर रेफरल और विशेषज्ञ उपचार मिलने से नया जीवन मिला है। गंभीर हालत में पहुंचे बच्चे का मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सफल इलाज किया गया। जानकारी के अनुसार, बच्चा चना खाते समय अचानक खांसी और उल्टी के बाद अचेत हो गया। उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ती गई और वह मरणासन्न अवस्था में पहुंच गया। बलरामपुर जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे तत्काल अंबिकापुर रेफर किया गया। मेडिकल कॉलेज पहुंचते ही एनेस्थीसिया विभाग ने तत्काल एयरवे मैनेजमेंट कर बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी के मार्गदर्शन में ईएनटी विभाग को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए। प्राध्यापक डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, सहायक प्राध्यापक डॉ. उषा आर्मी और एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश निगम की टीम ने संयुक्त रूप से उपचार किया। वहीं, शिशु रोग विभाग के डॉ. केआर टेकाम और डॉ. सुमन ने बच्चे को गहन चिकित्सा में रखकर लगातार निगरानी की। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सुयश द्वारा किए गए सीटी स्कैन में फेफड़े सामान्य पाए गए, जिससे उपचार की दिशा स्पष्ट हुई। लगातार तीन दिनों तक गहन उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ और उसे वेंटिलेटर से हटा लिया गया। पांचवें दिन बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वह चेहरे पर मुस्कान के साथ घर चला गया है।
सावधानी भी जरूरी : डॉक्टरों ने बताया कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को चना, मूंगफली, साबुत दाल या अन्य छोटे दानेदार खाद्य पदार्थ देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे पदार्थ आसानी से श्वास नली में फंसकर जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं। बच्चों को हमेशा बैठाकर और निगरानी में ही भोजन कराना चाहिए। मेडिकल कॉलेज में हर साल ऐसे 10 से अधिक मामले सामने आते हैं, जिनका ईएनटी विभाग द्वारा निःशुल्क और सफल उपचार किया जाता है। यह घटना जनजातीय क्षेत्रों में समय पर रेफरल और बेहतर टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।
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