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अंबिकापुर@दादा गली में अब ‘दादा’ नहीं,सांड का शासन!

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  • सांड का ऐसा आतंक की सड़क पर निकले तो अस्पताल तय!
  • दादा गली में ‘सांड राज’,अंबिकापुर में लोगों का निकलना हुआ मुश्किल
  • अंबिकापुर में बेकाबू सांड,कई लोग घायल…प्रशासन बेखबर
  • दो साल से आतंक मचा रहा सांड,आखिर क्यों नहीं जागा प्रशासन?
  • बार-बार हमले,फिर भी कार्रवाई शून्य…किसकी जिम्मेदारी?
  • हटाया गया,फिर लौट आया सांड-फेल हुआ नगर निगम का सिस्टम
  • लोग घायल होते रहे,जिम्मेदार चुप…अंबिकापुर में बड़ा सवाल
  • नगर निगम सोया,सांड बोला…मैं ही यहां का राजा!
  • कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा-दादा गली में बढ़ता खतरा
  • बच्चे-बुजुर्ग असुरक्षित,सांड के डर से सहमा पूरा इलाका


-संवाददाता-
अंबिकापुर,20 मार्च 2026 (घटती-घटना)। शहर के केदारपुर भट्टी रोड स्थित गणेश दादा गली इन दिनों एक अजीब और खतरनाक संकट से गुजर रही है,यहां दो आक्रामक सांड ने ऐसा आतंक मचा रखा है कि लोग इस गली से गुजरने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हो जाते हैं,हालत यह है कि इस क्षेत्र में रहने वाले लोग अब अपने रोजमर्रा के रास्ते बदलने लगे हैं,जबकि बाहर से आने वाले अनजान लोग अक्सर इस सांड के हमले का शिकार बन जाते हैं,यह समस्या नई नहीं है, बल्कि पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार बनी हुई है,बावजूद इसके,प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने इस खतरे को और भी गंभीर बना दिया है।
हर दिन डर के साए में जी रहे लोग
गणेश दादा गली के रहवासी बताते हैं कि यह सांड अचानक और बिना किसी उकसावे के लोगों पर हमला कर देता है, सुबह-शाम टहलने निकलने वाले लोग सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं,बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने में डर लगता है,लोग अब सांड को देखते ही रास्ता बदल लेते हैं,गली का माहौल ऐसा हो गया है कि यहां हर व्यक्ति हमेशा सतर्क और भयभीत रहता है।
कई लोग पहुंच चुके अस्पताल
इस सांड के हमले से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं,कई मामलों में हाथ और पैर फ्रैक्चर हुए,कुछ लोगों को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं,अस्पताल में इलाज कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है,हाल ही में गुरुवार शाम करीब 6ः30 बजे की घटना ने लोगों को और डरा दिया,किशोर मनवारनी, जो रोज की तरह टहलने निकले थे,अचानक सांड के हमले का शिकार हो गए। सांड ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी,जिससे उनका हाथ टूट गया और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा,यह घटना इस बात का प्रमाण है कि खतरा कभी भी और किसी के साथ हो सकता है।
समस्या का अस्थायी
समाधान,फिर वही हालात

स्थानीय लोगों के अनुसार,इस सांड को एक बार पकड़कर क्षेत्र से बाहर ले जाया गया था, कुछ समय के लिए लोगों को राहत मिली, लेकिन लगभग एक महीने बाद सांड फिर वापस लौट आया,इसके बाद हमलों का सिलसिला फिर शुरू हो गया,इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन ने केवल अस्थायी उपाय किए,स्थायी समाधान पर ध्यान नहीं दिया।
प्रशासनिक लापरवाही
या संसाधनों की कमी?

– इतने लंबे समय से समस्या होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– क्या नगर निगम के पास पशु पकड़ने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है?
– क्या शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों का गुस्सा और मांग
लगातार बढ़ते खतरे और प्रशासन की निष्कि्रयता से लोगों में आक्रोश है, उन्होंने प्रशासन से मांग की है की सांड को तुरंत पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए,क्षेत्र में नियमित निगरानी की व्यवस्था हो,घायल लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए,गली की साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं सुधारी जाएं,जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय हो।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती
आवारा पशु समस्या

अंबिकापुर की यह घटना केवल एक गली तक सीमित नहीं है,देश के कई शहरों में आवारा पशुओं की समस्या तेजी से बढ़ रही है, सड़कों पर घूमते मवेशी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं,नगर निकायों के पास सीमित संसाधन,पशुपालकों की लापरवाही भी एक कारण,यह एक व्यापक शहरी समस्या बन चुकी है,जिसके लिए दीर्घकालिक योजना जरूरी है।
संभावित खतराः
बड़ी दुर्घटना की आशंका

अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया,तो किसी की जान भी जा सकती है, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ सकता है,क्षेत्र में दहशत और बढ़ेगी, यह केवल एक चेतावनी नहीं,बल्कि संभावित आपदा का संकेत है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल-
इस पूरे मामले में स्थानीय पार्षद की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, आरोप है कि पार्षद दूसरे वार्ड से हैं, क्षेत्र की समस्याओं पर उनका ध्यान कम है, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल हैं, लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधि सक्रिय होते, तो समस्या इतनी गंभीर नहीं होती।
गली में अन्य समस्याएं भी गंभीर-
सिर्फ सांड का आतंक ही नहीं, बल्कि गली में कई अन्य समस्याएं भी हैं साफ-सफाई की कमी, कचरे का ढेर, जल निकासी की समस्या ये सभी स्थितियां मिलकर क्षेत्र की जीवनशैली को और कठिन बना रही हैं।
कब जागेगा सिस्टम?
अंबिकापुर की दादा गली में सांड का यह आतंक अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन गया है, लोग डरे हुए हैं, घायल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार चुप हैं, अब सवाल यही है क्या प्रशासन समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा? या फिर लोग इसी तरह डर के साए में जीने को मजबूर रहेंगे?


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