-संवाददाता-
अंबिकापुर,24 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। नगर पालिक निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतों के बीच पीलिया (जॉन्डिस) के बढ़ते मामलों ने शहर की चिंता बढ़ा दी है, स्थानीय नागरिकों के अनुसार बीते कुछ दिनों से कई परिवारों में उल्टी, कमजोरी, पीलापन और बुखार जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं,जिनकी जांच में पीलिया के मामले सामने आ रहे हैं। स्थिति को गंभीर बताते हुए राज्य अधिवक्ता परिषद छत्तीसगढ़ के सदस्य प्रवीण गुप्ता ने आयुक्त,नगर पालिक निगम अंबिकापुर को लिखित आवेदन सौंपकर आपातकालीन कदम उठाने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जल आपूर्ति में संक्रमण के कारण नागरिकों का स्वास्थ्य खतरे में है और यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
स्वास्थ्य शिविर की मांग-आवेदन में प्रभावित वार्डों में विशेष स्वास्थ्य शिविर (हेल्थ कैंप) लगाने की मांग की गई है,ताकि संभावित और संक्रमित मरीजों की समय रहते जांच एवं उपचार हो सके। मांग है कि चिकित्सा दल को मौके पर भेजकर घर-घर सर्वे कराया जाए और गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
निगरानी टीम और जल गुणवत्ता जांच आवेदन में यह भी सुझाव दिया गया है कि निगम स्तर पर एक विशेष निगरानी टीम गठित की जाए, जो स्वयं वार्डों में जाकर जल गुणवत्ता की जांच करे। पाइपलाइनों में रिसाव, सीवेज मिलावट या अन्य तकनीकी खामियों की पहचान कर उन्हें तत्काल दुरुस्त किया जाए, विशेषज्ञों का मानना है कि पीलिया प्रायः दूषित पानी के सेवन से फैलता है, इसलिए जल स्रोतों की स्वच्छता और क्लोरीनेशन की नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
वैकल्पिक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था-प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। नागरिकों का कहना है कि जब तक पाइपलाइन और स्रोत पूरी तरह सुरक्षित घोषित न हों, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया प्रतीक्षित
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, शहरवासियों की मांग है कि मामले को हल्के में न लिया जाए और पारदर्शी तरीके से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, जनस्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा अब शहर में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है, अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं—क्या तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी, या फिर नागरिकों को इंतजार करना पड़ेगा?
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