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अंबिकापुर/बलरामपुर-कुसमी@कुसमी कांड : अवैध बॉक्साइट खनन…प्रशासनिक कार्रवाई,मौत और ‘सिस्टम’ पर सवाल…

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ट्रक जब्ती से लेकर एफआईआर,पुलिस भूमिका और पांच लाख की कथित मांग तक-जांच के घेरे में पूरा घटनाक्रम

-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर/बलरामपुर-कुसमी,20 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। सीमावर्ती कुसमी-हंसपुर क्षेत्र में कथित अवैध बॉक्साइट खनन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बहु-आयामी कांड का रूप ले चुका है, प्रकाशित खबरों,स्थानीय दावों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह मामला केवल खनन तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पुलिस, खनिज विभाग, राजस्व अमला और निजी व्यक्तियों की भूमिकाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। एक ग्रामीण की मौत,एसडीएम का निलंबन,ट्रक जब्ती और एफआईआर में विसंगतियों के आरोपों ने पूरे प्रकरण को संवेदनशील बना दिया है। (यह रिपोर्ट प्रकाशित समाचारों,ज्ञापनों और उपलब्ध सूचनाओं के समेकन पर आधारित है, आरोपों की सत्यता संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा निर्धारित की जाएगी।)
नवटोली पहाड़ी पर खनन के संकेत, सीमा की जटिलता का लाभ?
ग्राउंड रिपोर्टों में नवटोली पहाड़ी पर ताजा खुदाई के निशान,लाल-भूरे पत्थरों के ढेर और ट्रकों की आवाजाही के संकेत बताए गए हैं,क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति—एक ओर छत्तीसगढ़ और दूसरी ओर झारखंड—को देखते हुए यह आरोप लगाया गया कि सीमा की जटिलता का लाभ उठाकर कथित रूप से अवैध खनन संचालित हुआ, स्थानीय लोगों का दावा है कि लंबे समय से गतिविधियां चल रही थीं,सवाल उठ रहा है कि यदि यह सही है,तो निगरानी तंत्र कहाँ था?
पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिनमें राजेश सिंह सिसोदिया शामिल हैं,ने करौंधा पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है,आरोप है कि यदि एक वर्ष से गतिविधियां जारी थीं,तो संबंधित विभागों की जानकारी या निगरानी के बिना यह संभव नहीं,मांग की गई है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु संबंधित थाना/चौकी प्रभारी का स्थानांतरण कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
कार्रवाई,विवाद और मौतः घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार,अवैध खनन की जांच के दौरान राजस्व अमले की मौजूदगी में तनाव बढ़ा और मारपीट की घटना हुई,जिसमें एक ग्रामीण (श्रीराम लकड़ा) की मौत की बात सामने आई,इसके बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज हुई,राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता देखते हुए संबंधित एसडीएम को निलंबित कर दिया। साथ ही,कथित रूप से पांच लाख रुपये की मांग के आरोप की भी जांच की मांग उठी है। आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है।
ट्रक जब्ती और एफआईआर का सवाल
प्रकाशित खबरों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि जिस ट्रक को कथित रूप से जब्त किया गया, उसका एफआईआर में स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जबकि वह कुसमी थाने में खड़ा बताया गया, मुख्य प्रश्नः जब्त ट्रक का स्वामित्व किसका है? उसके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई? क्या खनिज अधिनियम के तहत पृथक प्रकरण दर्ज हुआ? यदि ट्रक अवैध खनन से जुड़ा था, तो संबंधित पक्षों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई हुई? इन सवालों के जवाब आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट होंगे।
जवाबदेही की कसौटी पर व्यवस्था
कुसमी कांड अब अवैध खनन से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन गया है, एक ओर ग्रामीणों की न्याय की मांग है,दूसरी ओर संस्थागत प्रक्रियाओं की पारदर्शिता का सवाल, अंतिम सत्य आधिकारिक जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा। तब तक,यह प्रकरण क्षेत्रीय शासन-प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी बना रहेगा।
फोटो 16 प्रशासन का पक्ष और आगे की राह
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा,उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बहु-विभागीय जांच (राजस्व,पुलिस,खनिज और फोरेंसिक) तथा पारदर्शी तथ्य-प्रकाशन से ही जनता का भरोसा बहाल हो सकता है।
आठ बिंदुओं पर स्पष्टता की मांग
– ज्ञापनों में जिन प्रमुख बिंदुओं पर जांच की मांग उठी है, उनमें शामिल हैं…
– मारपीट की जिम्मेदारी किसकी?
– क्या कार्रवाई एकतरफा थी?
– जब्त ट्रक की कानूनी स्थिति क्या है?
– क्या पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था?
– मृतक व घायलों की मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है?
– अवैध उत्खनन पर पूर्व में कितनी कार्रवाई हुई?
– पांच लाख की कथित मांग का आधार क्या है?
– घटनास्थल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों (जैसे मोबाइल) की जब्ती/जांच की स्थिति क्या है?


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