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बिलासपुर@मस्तूरी फायरिंग : डिफेंस कंपनी के मजदूरों को फंसाने के लिए छत पर फेंकी गई पिस्टल

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बिलासपुर,31 अक्टूबर 2025। मस्तूरी गोलीकांड की गूंज के बीच सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराधियों के गठजोड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला वार्ड नंबर 10 का है, जहां प्रगति डिफेंस कंपनी में काम करने वाले तीन मजदूरों को फंसाने के लिए उनके किराए के मकान की छत पर किसी ने पिस्टल फेंक दी। कुछ ही मिनटों बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई और बिना प्राथमिक जांच किए तीनों मजदूरों को थाने ले जाकर रातभर पूछताछ में बिठाए रखा। बाद में मकान मालिक और आरोपियों के बयान के बाद ही मजदूरों को छोड़ा गया।
कैसे रची गई साजिश : जानकारी के अनुसार, सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 में स्थित शिवकुमार गुप्ता के मकान में तीन युवक नितिन वर्मा, सचिन शर्मा और इंद्रजीत सिंह, जो कि कानपुर निवासी हैं, किराए पर रहते हैं। तीनों प्रगति डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत हैं। 28 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे जब वे काम से लौटे, तो घर के पास मैदान में स्कूटी सवार दो शराबी युवकों अजय और हिस्ट्रीशीटर नारायण अवस्थी से उनकी कहासुनी हो गई। बताया गया कि नशे में धुत दोनों ने मजदूरों से मारपीट की और धमकी दी। तुम लोगों को चरस में फंसा देंगे। मजदूरों ने इस धमकी को गंभीरता से नहीं लिया और घर लौट आए।
कुछ ही देर में छत पर मिली पिस्टल : करीब आधे घंटे बाद मकान की छत पर कुछ गिरने की तेज आवाज आई। घर की मालकिन जब देखने गईं, तो वहां एक पिस्टलनुमा हथियार पड़ा था। घबराए मजदूर तुरंत 112 डायल करने की तैयारी में थे,तभी अचानक वही दोनों युवक अजय और नारायण अवस्थी दो पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने बिना कोई सवाल-जवाब किए तीनों मजदूरों को हिरासत में लेकर थाने ले गई।
थाने में रातभर पूछताछ, गंभीर आरोप : पीडि़त मजदूरों के अनुसार, सिरगिट्टी थाना में उन्हें रातभर पूछताछ में बैठाकर रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उनके मोबाइल जब्त कर लिए गए और उन्हें बिना कपड़ों के बैठाए रखा गया। मजदूरों ने दावा किया कि अगर कंपनी के मालिक समय पर न पहुंचते,तो पुलिस उन्हें फर्जी केस में जेल भेज देती। सुबह जब प्रगति डिफेंस कंपनी के मालिक नमन अग्रवाल थाने पहुंचे, तब मामले में नया मोड़ आया। मकान मालिक शिवकुमार गुप्ता और आरोपी अजय के सामने ही बयान दर्ज किए गए।

अजय ने स्वीकार किया कि उसने नारायण अवस्थी के कहने पर पिस्टल मजदूरों के मकान की छत पर फेंकी थी, ताकि उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा सके। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मजदूरों को रिहा किया।
आरोपी नारायण अवस्थी फरार
पुलिस ने फिलहाल आरोपी नारायण अवस्थी की तलाश शुरू कर दी है, जो कि स्थानीय हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। हालांकि अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
पुलिस पर उठे सवाल
मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सिरगिट्टी पुलिस अपराधियों के साथ मिली हुई है। उन्होंने कहा, अगर कंपनी मालिक समय पर नहीं आते, तो हमें जेल भेज दिया जाता। यहां की पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रही है, स्थिति यूपी-बिहार से भी बदतर है।
साजिश की दिशा में बढ़ती जांच
फिलहाल पुलिस पिस्टल की उत्पत्ति और इसके माध्यम से जुड़ी कड़ी की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार कहां से आया और इसे फेंकने का मकसद क्या था। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, नारायण अवस्थी पर पहले भी मजबूरी में फर्जी मामले दर्ज कराने की कोशिशों का आरोप लग चुका है।


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