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बिलासपुर@ काली सूची से बाहर आ चुकीं कंपनियों को टेंडर भरने से नहीं रोका जा सकता

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सीजीएमएससीएल की शर्त को अतार्किक बताते हुए किया रद्द
बिलासपुर,17 मई 2025 (ए)।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जारी दो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े टेंडरों की कुछ शर्तों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। ये शर्तें उन बोलीदाताओं को भाग लेने से रोक रही थीं, जो पहले कभी ब्लैकलिस्ट हुए थे, भले ही उनकी ब्लैकलिस्टिंग की अवधि पूरी हो चुकी हो।
मनमानी नहीं होनी चाहिए शर्तें
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि टेंडर की शर्तें तय करने का अधिकार राज्य को है, लेकिन ये शर्तें मनमानी या
अतार्किक नहीं होनी चाहिए, ताकि योग्य और इच्छुक बोलीदाताओं की भागीदारी प्रभावित न हो।
जेएईएस ने दायर की थी याचिकाएं
यह मामला जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर दो याचिकाओं से जुड़ा है। इसके तहत 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस सेवा और हाट बाजार क्लिनिक योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट से संबंधित टेंडरों की शर्तों को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता कंपनी पहले छत्तीसगढ़ में 108 सेवा का संचालन कर चुकी है। उसको एक पुराने प्रकरण में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 2022 में किए गए ब्लैक लिस्टिंग करने के आदेश के आधार पर नए टेंडर से बाहर कर दिया गया था। जबकि वह ब्लैकलिस्टिंग आदेश अब अमान्य हो चुका था। कंपनी ने यह भी कहा कि टेंडर में कभी भी ब्लैकलिस्ट नहीं हुए हैं जैसे हलफनामे की शर्त अतार्किक है, क्योंकि इससे वे सभी कंपनियां भी बाहर हो जाती हैं, जिनकी ब्लैकलिस्टिंग की अवधि पूरी हो चुकी है।कोर्ट ने दोहराया कि राज्य और उसके उपक्रमों को सार्वजनिक खरीद में विवेक का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूर्णतः निरंकुश नहीं हो सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी पहले ब्लैकलिस्ट की गई थी और उसकी अवधि पूरी हो चुकी है, तो वह अन्य सभी योग्यताओं को पूरा करने पर टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकती है।


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