मुम्बई,28 जनवरी 2022 (ए)।सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा से 12 भाजपा विधायकों के एक साल के निलंबन को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक सत्र से ज्यादा का निलंबन सदन के अधिकार में नहीं आता है। विधायकों का निलंबन सिर्फ उसी सत्र के लिए हो सकता है, जिसमें हंगामा हुआ है। इसके साथ ही अदालत ने विधायकों के निलंबन को रद्द कर दिया।इन विधायकों को पिछले साल पांच जुलाई को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया था। राज्य सरकार ने उन पर विधानसभा के अध्यक्ष के कक्ष में पीठासीन अधिकारी भास्कर जाधव के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था।निलंबित 12 सदस्यों में संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भटकलकर, पराग अलवानी, हरीश पिंपले, योगेश सागर, जय कुमार रावत, नारायण कुचे, राम सतपुते और बंटी भांगडय़िा शामिल थे। इन विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव राज्य के संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब ने पेश किया था और इसे ध्वनि मत से पारित किया गया था।इससे पहले 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने संबंधित पक्षों से कहा था कि वे एक हफ्ते के अंदर-अदर लिखित दलीलें दें।शुरुआत में, एक विधायक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी थी कि लंबे समय तक निलंबित रखना, निष्कासन से भी बदतर है क्योंकि इससे निर्वाचकों के अधिकार प्रभावित होते हैं। अन्य विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि एक साल के निलंबन का फैसला पूरी तरह से तर्कहीन है।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “हम हमारे 12 विधायकों के निलंबन को रद्द करने के ऐतिहासिक फैसले के लिए माननीय स्ष्ट का स्वागत और धन्यवाद करते हैं। ये विधायक मानसून सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा में ओबीसी के लिए लड़ रहे थे।
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