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नई दिल्ली@दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव से रोकना गलत कानून पर विचार की जरूरत : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली,04 नवम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। कोर्ट ने बताया कि भारत की कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। 2.1 की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट रेट माना जाता है। इससे कम प्रजनन दर का मतलब है कि एक पीढ़ी अपनी जगह अगली पीढ़ी को पूरी तरह नहीं ले पाएगी। कोर्ट ने कहा कि प्रजनन दर में गिरावट से बुजुर्गों की आबादी बढ़ सकती है और कामकाजी लोगों की संख्या घट सकती है। इन बदलावों को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव को राहत दी। उन्हें तीसरे बच्चे के जन्म के कारण अयोग्य ठहराया गया था। बेंच ने 2003 के उस फैसले पर दोबारा विचार के लिए मामला बड़ी बेंच के पास भेज दिया, जिसमें दो बच्चों की शर्त को सही ठहराया गया था।
कोर्ट बोला…मौजूदा कानून राजनीतिक अधिकारों से वंचित करते हैं…
बेंच ने कहा कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून नागरिकों के एक पूरे वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से बाहर कर देते हैं। इसका किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पद संभालने की क्षमता से कोई खास संबंध नहीं है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसे कानून लोगों को बच्चे पैदा करने या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करते हैं। इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले प्रजनन से जुड़े फैसले लेने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन होता है।
महाराष्ट्र में तीसरे बच्चे के कारण महिला को अयोग्य ठहराया गया था
मंमंगला भीमराव महाराष्ट्र की काकोड़ा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच थीं। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(जे-1) के तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान है। इसी नियम के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के बाद उनके खिलाफ शिकायत की गई थी। अतिरिक्त कलेक्टर ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त के पास अपील की,लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2025 को उनकी अयोग्यता बरकरार रखी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। अब सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है,ताकि यह तय किया जा सके कि दो बच्चों की शर्त को सही ठहराने वाले पुराने फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए या नहीं।


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