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पटना/बैकुंठपुर@ लाइसेंस 2029 तक वैध,लेकिन दुकान की अनुमति कहां?

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  • पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के पटाखा कारोबार पर जांच के बाद सवाल
  • नगर पंचायत ने अनुमति से किया इनकार,तहसीलदार ने कलेक्टर को सौंपी जांच रिपोर्ट…
  • शासकीय भवन में पटाखों का भंडारण,लाइसेंस की वैधता और परिसर पर उठे गंभीर सवाल…
  • पटाखा लाइसेंस की जांच में उलझा शासकीय भवन का मामला,अब कलेक्टर के फैसले पर निगाहें
  • अनुमति नगर पंचायत ने नहीं दी, फिर शासकीय भवन में कैसे चल रही थी पटाखा दुकान?
  • पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के पटाखा लाइसेंस की जांच में खुली शासकीय भवन की कहानी!
  • पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष के पटाखा लाइसेंस पर जांच की आंच,कलेक्टर तक पहुंची रिपोर्ट


-रवि सिंह-
पटना/बैकुंठपुर,04 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
शासकीय संपत्ति पर किसका अधिकार है और सरकारी भवन का उपयोग किसकी अनुमति से हो रहा है,यह सवाल कोरिया जिले के पटना नगर पंचायत क्षेत्र में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष जवाहरलाल गुप्ता से जुड़े पटाखा दुकान प्रकरण में गंभीर रूप से सामने आया है,मामला अब केवल शिकायत और आरोपों तक सीमित नहीं है,शिकायत के बाद तहसीलदार द्वारा की गई जांच का प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जा चुका है,जांच में सामने आए तथ्यों ने पटाखा अनुज्ञप्ति,दुकान के वास्तविक परिसर और शासकीय भवन के उपयोग की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे दिलचस्प विरोधाभास यह है कि एक तरफ जवाहरलाल गुप्ता के नाम पटाखा विक्रय की अनुज्ञप्ति वर्ष 2029 तक नवीनीकृत बताई गई है, वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत पटना ने लिखित रूप से कहा है कि उसके द्वारा संबंधित शासकीय भवन में पटाखा दुकान संचालित करने की अनुमति नहीं दी गई,तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में भी वर्तमान परिसर के लिए सक्षम अनुमति नहीं मिलने का उल्लेख है,ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब शासकीय भवन में दुकान संचालन की अनुमति ही नहीं थी,तो वहां पटाखा कारोबार किस आधार पर संचालित हो रहा था?
खसरा नंबर 497 की शासकीय भूमि पर दुकान का मामला-तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में संबंधित परिसर को खसरा नंबर 497, रकबा लगभग 0.733 हेक्टेयर की शासकीय भूमि के अंश भाग पर स्थित बताया गया है, रिपोर्ट में जवाहरलाल गुप्ता द्वारा वहां पटाखा विक्रय किए जाने का उल्लेख है,भौतिक सत्यापन के दौरान परिसर में पटाखों का भंडारण पाए जाने की बात भी दर्ज की गई है, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच रिपोर्ट में लाइसेंस के भीतर वर्तमान दुकान परिसर का खसरा नंबर और स्पष्ट भूमि विवरण नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है, ऐसे में मूल अनुज्ञप्ति फाइल की जांच और मौके पर संचालित दुकान के परिसर का मिलान बेहद जरूरी हो जाता है, आखिर वर्ष 2012 में लाइसेंस किस स्थान के लिए जारी हुआ था और क्या वर्तमान दुकान उसी स्वीकृत परिसर में संचालित हो रही है?
नगर पंचायत का स्पष्ट जवाब—हमने नहीं दी अनुमति-इस प्रकरण में नगर पंचायत पटना का पत्र भी महत्वपूर्ण है, शिकायतकर्ता द्वारा जानकारी मांगे जाने पर नगर पंचायत ने लिखित जवाब में कहा कि वार्ड क्रमांक 9 स्थित शासकीय भवन में पटाखा दुकान संचालित करने की अनुमति नगर पंचायत द्वारा प्रदान नहीं की गई है,पत्र में यह भी उल्लेख है कि पटाखा विक्रय से संबंधित अनुमति जिला कार्यालय के माध्यम से प्रदान की जाती है,यहीं इस मामले का सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रश्न खड़ा होता है,जिला कार्यालय से पटाखा विक्रय की अनुज्ञप्ति प्राप्त होना और नगर पंचायत की शासकीय संपत्ति पर दुकान संचालित करने की अनुमति मिलना दो अलग-अलग विषय हैं,किसी व्यक्ति के पास पटाखा विक्रय का लाइसेंस होने का अर्थ यह नहीं है कि वह अपनी इच्छा से किसी भी शासकीय भवन में दुकान या गोदाम संचालित कर सकता है, यदि वर्तमान परिसर के उपयोग की कोई अलग अनुमति है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए,और यदि ऐसी अनुमति नहीं है तो शासकीय भवन के उपयोग को लेकर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?
जांच में पटाखों का भंडारण, जनसुरक्षा का सवाल भी गंभीर- तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में मौके पर पटाखों का भंडारण पाए जाने का उल्लेख है,दस्तावेजों के साथ परिसर में रखे पटाखों की तस्वीरें भी संलग्न हैं। यह केवल भवन के उपयोग का मामला नहीं रह जाता,बल्कि जनसुरक्षा से भी जुड़ जाता है,पटाखों के विक्रय और भंडारण के लिए विस्फोटक नियमों के तहत निर्धारित परिसर, मात्रा और सुरक्षा शर्तों का पालन आवश्यक है। फायर एक्सटिंग्विशर का प्रमाणपत्र संलग्न होना अच्छी बात हो सकती है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि परिसर की स्वीकृति और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था,संबंधित विभाग को मौके का तकनीकी निरीक्षण कर स्पष्ट करना चाहिए कि भंडारण निर्धारित नियमों के अनुरूप था या नहीं।
जांच रिपोर्ट के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण की मांग क्यों?-अब जब जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा जा चुका है और उसमें वर्तमान परिसर के लिए सक्षम अनुमति नहीं मिलने की बात दर्ज है,तब लाइसेंस की समीक्षा का प्रश्न स्वाभाविक रूप से सामने आता है,यदि मूल फाइल के परीक्षण में यह प्रमाणित होता है कि लाइसेंस गलत परिसर के आधार पर जारी हुआ या नवीनीकरण के समय जरूरी जानकारी छिपाई गई,तो सक्षम प्राधिकारी को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए,इसमें अनुज्ञप्ति के निलंबन या निरस्तीकरण पर विचार भी शामिल हो सकता है,लेकिन यह निर्णय केवल राजनीतिक पहचान, शिकायत या किसी एक निष्कर्ष के आधार पर नहीं,बल्कि मूल दस्तावेजों,लाइसेंस की शर्तों और संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद होना चाहिए,पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन की निष्पक्षता पर भी लोगों की निगाहें रहेंगी।
अब कलेक्टर के फैसले की बारी-इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन के सामने अब कई सीधे सवाल हैं। क्या लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकारी से मूल फाइल तलब की जाएगी? क्या स्वीकृत परिसर और मौके पर संचालित दुकान का संयुक्त निरीक्षण होगा? क्या शासकीय सामुदायिक भवन के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति का रिकॉर्ड सामने लाया जाएगा? और यदि जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो क्या लाइसेंस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी? एक तरफ लाइसेंस वर्ष 2029 तक नवीनीकृत है, दूसरी तरफ नगर पंचायत कह रही है कि शासकीय भवन में पटाखा दुकान चलाने की अनुमति उसने नहीं दी, तहसीलदार की जांच में भी सक्षम अनुमति नहीं मिलने का उल्लेख है,ऐसे में अब केवल जांच प्रतिवेदन सौंप देना पर्याप्त नहीं होगा, कलेक्टर को यह स्पष्ट करना होगा कि शासकीय भवन में पटाखा कारोबार किस आधार पर संचालित हुआ और लाइसेंस की शर्तों का पालन हुआ या नहीं, यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो कार्रवाई भी उतनी ही स्पष्ट और प्रभावी होनी चाहिए।
शिकायत के बाद हुई जांच,कलेक्टर तक पहुंचा प्रतिवेदन
इस मामले में शिकायतकर्ता अखिलेश गुप्ता ने 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कोरिया के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था,शिकायत में आरोप लगाया गया कि वार्ड क्रमांक 9,बाजारपारा स्थित शासकीय सामुदायिक भवन की भूमि और अभिलेखों का उपयोग पटाखा दुकान के संचालन के लिए किया जा रहा है,शिकायतकर्ता ने लाइसेंस की मूल फाइल,भूमि अभिलेख,अनापत्ति प्रमाण-पत्र और दुकान संचालन की अनुमति की जांच कराने की मांग की थी,शिकायत में यह भी मांग की गई थी कि यदि गलत जानकारी या अनियमित दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त किया गया है तो नियमानुसार उसके निलंबन अथवा निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए,इसके बाद तहसीलदार पटना द्वारा स्थल और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई तथा प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा गया।
लाइसेंस 2029 तक वैध,लेकिन परिसर की वैधता पर सवाल
दस्तावेजों में जवाहरलाल गुप्ता के नाम वर्ष 2012 से संबंधित पटाखा विक्रय अनुज्ञप्ति और उसके नवीनीकरण का विवरण मौजूद है,तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार अनुज्ञप्ति वर्ष 2029 तक नवीनीकृत है,लेकिन सवाल लाइसेंस के अस्तित्व का नहीं,बल्कि उस परिसर का है जहां इसका उपयोग किया जा रहा है, यदि लाइसेंस में स्वीकृत परिसर और वर्तमान दुकान का स्थान अलग-अलग हैं,तो यह जांच का गंभीर विषय है,क्या परिसर परिवर्तन की अनुमति ली गई थी? क्या नवीनीकरण के दौरान मौके का निरीक्षण हुआ था? क्या लाइसेंसिंग प्राधिकारी को वर्तमान भवन की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी? इन सवालों का जवाब मूल लाइसेंस फाइल और संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड से ही मिल सकता है।


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