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लखनऊ@आधुनिक तकनीक के साथ कुशल मानव संसाधन विकसित करना समय की आवश्यकता : राजनाथ सिंह

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लखनऊ,30 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में कौशल विकास, औद्योगिक आवश्यकताओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को लखनऊ के ताज पैलेस, विभूति खंड,गोमती नगर में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन-उत्तर प्रदेश सहभागिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज किसी भी देश के विकास के लिए मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। भारत को वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने की दिशा में देश की यात्रा कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। कोई भी देश दुनिया की अत्याधुनिक मशीनें खरीद सकता है,लेकिन जब तक उन्हें कुशलतापूर्वक संचालित करने वाला प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होगा,तब तक तकनीक का पूरा लाभ नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को जनसांख्यिकीय लाभांश तथा उत्पादक लाभांश में परिवर्तित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के लिए भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल आवश्यक है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम-सेतु के माध्यम से सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, प्रयोगशालाओं,डिजिटल शिक्षण व्यवस्था तथा नवीनतम पाठ्यक्रम से युक्त किया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विनिर्माण एवं रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने और रक्षा औद्योगिक गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) की सराहना करते हुए उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे पीएम-सेतु को केवल सरकारी योजना न मानकर एक साझा राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखें तथा रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम-सेतु की सफलता का आकलन केवल स्थापित मशीनों से नहीं,बल्कि इससे सृजित रोजगार के अवसरों से होना चाहिए।
भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच नई साझेदारी का मॉडल प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की खाई को पाटना है। उन्होंने उद्योगों से आह्वान किया कि वे केवल सीएसआर पहलों तक सीमित न रहकर आईटीआई क्लस्टरों के विकास, शासन और संचालन का सक्रिय स्वामित्व लें तथा आईटीआई की जिम्मेदारी निभाएं।


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