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सूरजपुर@ चट्टीडांड़ के बच्चों ने पेड़ों को बांधी राखी,लिया प्रकृति की रक्षा का संकल्प

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रक्षाबंधन पर 11 विद्यार्थियों ने अपने गोद लिए वृक्षों को बनाया ‘वृक्ष मित्र’, नियमित देखभाल और सुरक्षा का लिया जिम्मा
-संवाददाता-
सूरजपुर,30 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
रक्षाबंधन का पर्व जहां भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है, वहीं शासकीय प्राथमिक शाला चट्टीडांड़ के बच्चों ने इस पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़कर एक अनूठा संदेश दिया,विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने द्वारा पूर्व में गोद लिए गए 11 वृक्षों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल का संकल्प लिया। शनिवार को आयोजित बैगलेस डे के अवसर पर रक्षाबंधन विशेष गतिविधि के तहत विद्यार्थियों ने पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार कर अपने-अपने गोद लिए वृक्षों को बांधीं, बच्चों ने संकल्प लिया कि वे इन वृक्षों की नियमित सिंचाई करेंगे, उन्हें नुकसान से बचाएंगे,आसपास स्वच्छता बनाए रखेंगे और उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक देखभाल करेंगे।
‘एक बच्चा,एक वृक्ष’ से शुरू हुई पहल-विद्यालय में पूर्व में आयोजित वन महोत्सव सप्ताह के दौरान पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से‘एक बच्चा, एक वृक्ष’ अभियान की शुरुआत की गई थी,इसके तहत विद्यालय के 11 विद्यार्थियों ने गांव एवं आसपास के क्षेत्र में स्थित 11 वृक्षों को गोद लेकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी स्वीकार की थी,रक्षाबंधन के अवसर पर इन्हीं वृक्षों को राखी बांधकर बच्चों ने अपने संकल्प को एक भावनात्मक रूप दिया। अब इन बच्चों के लिए ये वृक्ष केवल पौधे या पेड़ नहीं,बल्कि उनके‘वृक्ष मित्र’ बन गए हैं।
किताबों से निकलकर प्रकृति के बीच पहुंचा पाठ-प्रधान पाठक गौतम शर्मा ने बच्चों को रक्षाबंधन के महत्व के साथ पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता समझाई,उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का पर्व नहीं है,बल्कि इसे प्रकृति की रक्षा के संकल्प से भी जोड़ा जा सकता है,उन्होंने बच्चों को बताया कि वृक्ष मानव जीवन के लिए शुद्ध हवा,फल,छाया और अनेक आवश्यक प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं,ऐसे में वृक्षों की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है,प्रधान पाठक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का महत्व केवल पुस्तकों में पढ़ाने के बजाय बच्चों को प्रकृति से सीधे जोड़कर समझाना अधिक प्रभावी होता है,जब बच्चा किसी पेड़ को अपना मित्र मानकर उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करता है,तो पर्यावरण संरक्षण उसके लिए केवल पाठ नहीं रह जाता, बल्कि उसके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है।
राखी के धागे में बंधा पेड़ और बच्चे का रिश्ता-कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपने गोद लिए वृक्षों को राखी बांधी और उनकी रक्षा का संकल्प लिया, इस दौरान बच्चों का संदेश था कि जिन वृक्षों को हमने गोद लिया है,उनकी रक्षा का वचन भी हम निभाएंगे,बच्चों की इस पहल ने रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दिया। जिस तरह भाई-बहन एक-दूसरे की सुरक्षा का वचन लेते हैं,उसी तरह बच्चों ने पेड़ों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी उठाई।
छोटे कदम, बड़ा संदेश-विद्यालय की इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पर्यावरण संरक्षण की आदत यदि बचपन से विकसित हो,तो उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है, एक बच्चे द्वारा एक वृक्ष की देखभाल करने की छोटी-सी पहल भविष्य में पूरे समुदाय को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का माध्यम बन सकती है,चट्टीडांड़ के इन नन्हे ‘पर्यावरण प्रहरियों’ ने रक्षाबंधन के मौके पर यह संदेश दिया कि प्रकृति भी हमारे संरक्षण की उतनी ही हकदार है,जितना हम उसके संसाधनों के,एक बच्चा,एक वृक्ष से शुरू हुई पहल अब वृक्ष मित्र की जिम्मेदारी तक पहुंच गई है—और 11 राखियों के इन धागों में बच्चों ने प्रकृति की रक्षा का बड़ा संकल्प बांध दिया है।


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