नई दिल्ली,18 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक हाई पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला किया। यह कमेटी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक छात्रों के मार्च के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी और पुलिस की कार्रवाई के आरोपों की भी पड़ताल करेगी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पार्टियों से उन पूर्व जजों, पूर्व डीजीपी या रिटायर्ड सीबीआई डायरेक्टरों के बारे में सुझाव मांगे, जिन्हें उस पैनल में शामिल किया जा सके जो इस बात की जांच करेगा कि क्या नीट पेपर लीक और दूसरी परीक्षाओं में गड़बडिय़ों के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली और बिहार में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और सिर्फ इसलिए ‘लाठीचार्ज’ को सही नहीं ठहराया जा सकता कि विरोध प्रदर्शन हो रहा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (तथ्यों की जांच करने वाली समिति) से समय-समय पर रिपोर्ट देने के लिए कहा जा सकता है ताकि बेंच जरूरी निर्देश दे सके, खासकर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीडऩ और ऑनलाइन उत्पीडऩ के मामलों को देखते हुए।
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