- गोली मारकर हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला..33 गवाहों और
- फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि,आर्म्स एक्ट में भी 5 साल की सजा
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने करीब दो साल से चले मामले पर अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी संजीव मंडल उर्फ भानू बंगाली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने हत्या के मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत उम्रकैद तथा आर्म्स एक्ट के तहत 5 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन की ओर से 33 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
20 अगस्त 2024 को
जंगल में मिली थी लाश
अंबिकापुर के चर्चित स्टील कारोबारी परिवार से जुड़े अक्षत अग्रवाल की 20 अगस्त 2024 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शहर से लगे चठिरमा जंगल में उनकी कार के अंदर शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। प्रारंभिक जांच में अक्षत को गोली मारकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच करते हुए संजीव मंडल को हिरासत में लिया था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से हथियार और अन्य सामान बरामद किए थे। पुराने पुलिस खुलासे के अनुसार आरोपी के पास से हत्या में प्रयुक्त पिस्टल तथा कारतूस बरामद हुए थे। मृतक के सोने के आभूषण और नकदी भी आरोपी से बरामद होने की बात सामने आई थी।
आरोपी ने दिया था
चौंकाने वाला बयान
पुलिस पूछताछ के दौरान संजीव मंडल ने ऐसा दावा किया था,जिसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया था। आरोपी का कहना था कि अक्षत ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। उसके मुताबिक इसके बदले उसे 50 हजार रुपये और सोने के आभूषण दिए गए थे तथा अक्षत स्वयं उसके साथ सुनसान स्थान पर गया था। पुलिस के सामने आरोपी अपने इस बयान पर लगातार कायम रहा। कई दौर की पूछताछ और रिमांड के बावजूद उसके बयान में बदलाव नहीं आया। इसी कारण जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया था कि आखिर कोई व्यक्ति अपनी ही हत्या की सुपारी क्यों देगा। उस समय मृतक के परिजनों ने भी पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की गहराई से जांच की मांग की थी।
33 गवाहों की गवाही ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष : अदालत में अभियोजन ने मामले को साबित करने के लिए 33 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा फॉरेंसिक एवं अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष रखा गया। इन सभी साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन के बाद न्यायालय ने संजीव मंडल को हत्या का दोषी ठहराया। अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को अक्षत अग्रवाल के परिजनों के लिए लंबे समय से चले आ रहे न्यायिक संघर्ष के बाद महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
हाईप्रोफाइल हत्याकांड ने खड़े किए थे कई सवाल : अक्षत हत्याकांड की शुरुआत से ही यह मामला कई सवालों के कारण सुर्खियों में रहा। एक ओर पुलिस के सामने हत्या का रहस्य था, वहीं दूसरी ओर आरोपी का यह दावा कि मृतक ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी, जांच की सबसे बड़ी पहेली बन गया था। घटना के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा हुई थी।
तत्कालीन पुलिस जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया गया। अब अदालत के फैसले के साथ इस चर्चित हत्याकांड में मुख्य आरोपी को हत्या और हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई गई है। न्यायालय के फैसले ने करीब दो साल पुराने इस मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव तय किया है।
नार्को और ब्रेन मैपिंग तक पहुंची जांच
आरोपी के लगातार एक ही बयान पर कायम रहने के बाद पुलिस ने मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया। न्यायालय से अनुमति लेकर आरोपी के नार्को टेस्ट,ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सितंबर 2024 में पुलिस की ओर से बताया गया था कि नार्को टेस्ट छत्तीसगढ़ में तथा ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट गुजरात के गांधीनगर स्थित एफएसएल में कराया जाना था। मामले की जांच में वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। अभियोजन ने अदालत के समक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। अंततः अदालत ने अभियोजन के पक्ष में फैसला देते हुए आरोपी को हत्या का दोषी माना।
हथियार और कारतूस बरामदगी भी बनी अहम कड़ी
हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से पिस्टल,कारतूस,नकदी तथा मृतक के आभूषण बरामद किए थे। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से ऑटोमैटिक पिस्टल और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। बरामद हथियारों को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई गई थी। पुलिस के सामने यह सवाल भी था कि हथियार आरोपी तक कैसे पहुंचे और हत्या के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने उपलब्ध भौतिक, फॉरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एकत्र कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।
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