- FCRA संशोधन बिल जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास….
- शाह बोले…स्पीकर चर्चा के लिए घंटे तय करें,मैं सदन में रहूंगा,ओम बिरला को लेटर लिखा
- राहुल गांधी ने कहा…हमें लेक्चर नहीं सुनना,बताएं छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं…
नई दिल्ली,12 अगस्त 2026। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखा। उन्होंने नीट पेपर लीक पर छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की। इससे पहले सुबह सदन के बाहर शाह ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है,लेकिन विपक्ष सदन को चलने दे। इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा,‘हमें उनका लेक्चर नहीं सुनना है। पहले ये बताएं कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं। उन्होंने आदेश नहीं दिया तो वे इस्तीफा दें।’ इस बीच सरकार ने एफसीआरए संशोधन बिल, 2026 को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में रखा, जिसे मंजूरी मिल गई। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। शाह ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान दिया,कहा…रोज सदन में आ रहा हूं।
संसदीय पैनल ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप सही पाए
संसदीय जांच पैनल ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगाए गए आरोप सही पाए हैं। यह मामला उनके सरकारी आवास के स्टोररूम से नकदी मिलने से जुड़ा है। पैनल की रिपोर्ट बुधवार,12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक,स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों की काफी मात्रा मिली थी,लेकिन जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत,मालिकाना हक या वहां मौजूद होने की संतोषजनक वजह नहीं बता सके। जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
एफसीआरए संशोधन बिल जेपीसी
को भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास
लोकसभा ने हंगामे के बीच एफसीआरए संशोधन बिल, 2026 को दोनों सदनों की संयुक्त समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसका विरोध किया। इसपर संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि कुछ बिलों को जेपीसी के पास भेजा जाता है और सरकार भी यही कर रही है। बिल में कुछ आपत्तिजनक है तो विपक्ष जेपीसी के सामने अपनी बात रख सकता है। खुश होने के चक्कर में इसका विरोध करना अफसोस की बात है। वहीं,अखिलेश यादव ने एफसीआरए बिल का विरोध करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। रिजिजू के इस दावे पर कि बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, अखिलेश ने सवाल किया- आप बताइए कि कौन सा बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है?
राहुल बोले…शाह सदन में क्यों नहीं आए
राहुल ने कहा…स्टूडेंट्स को गोली किसने मारी? स्टूडेंट्स को कीलों वाली लाठियों से पीटने का ऑर्डर किसने दिया? क्या अमित शाह ने हमारे बच्चों को गोली मारने का ऑर्डर दिया था? अगर उन्होंने दिया है,तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल ने आगे कहा…शाह घर के सामने हजार पुलिस वाले खड़े होते हैं। 30 गाडि़यां उनके आगे पीछे होती हैं कि कहीं कोई बच्चा न आ जाए। पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है। वह सदन में नहीं आ सकते।
शाह का लोकसभा स्पीकर को लेटर,
कहा…चर्चा के लिए समय तय करें…
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखा। उन्होंने कहा, आप जानते हैं कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के दौरान सरकार की ओर से नीट परीक्षा को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर संसद में चर्चा कराने पर सहमति जताई है। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि विपक्ष की मांग से पहले ही संसद के मौजूदा सत्र में एंटी पेपर लीक बिल पेश किया गया। उस समय विपक्ष के किसी भी सदस्य ने सदन में नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात नहीं रखी थी। इसके बावजूद सरकार इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा के लिए तैयार है। मेरा अनुरोध है कि आप विपक्ष से चर्चा करें और आपसी सहमति के आधार पर आज से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जितना समय, दिन या घंटे उचित समझें,निर्धारित करें।
राज्यसभा से केरल नाम परिवर्तन विधेयक पारित,‘केरल’ का नाम होगा ‘केरलम’
संसद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित करते हुए केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया, जबकि लोकसभा ने इसे मंगलवार को ही मंजूरी दे दी थी। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज राज्य के नाम को संशोधित कर ‘केरल ’ से ‘केरलम ’ करना है। केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलने के लिए कानून लाने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने विधेयक को आगे बढ़ाया। विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक रूप से राज्य का नाम बदलकर केरलम कर दिया जाएगा। ेराज्य सभा में इस विधेयक पर चर्चा के बाद इस पर जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह बदलाव राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के उद्देश्य से किया गया है। केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कानून लाने की सिफारिश की थी। उन्होंने बताया कि इसी अनुरोध को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यह विधेयक संसद में पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया संबंधित राज्य विधानसभा के प्रस्ताव पर आधारित होती है। यदि पश्चिम बंगाल भी ऐसा प्रस्ताव पारित करता है, तो केंद्र सरकार उस पर भी विधेयक लाने पर विचार करेगी।
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