स्व-सहायता समूहों में ऋण वितरण और नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप,बैठक पुस्तिका और बैंक खातों के मिलान से सामने आ सकता है सच
राजेन्द्र शर्मा
खड़गवां,12 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। ग्रामीण गरीब महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की जमीनी व्यवस्था को लेकर खड़गवां जनपद क्षेत्र में गंभीर सवाल उठने लगे हैं, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आजीविका गतिविधियों के लिए ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था में कथित अनियमितता,ऋण वितरण में गड़बड़ी और नए सदस्यों को समूह से जोड़ने के नाम पर कथित लेन-देन के आरोप सामने आए हैं। सबसे ज्यादा सवाल बरदर क्लस्टर को लेकर उठ रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्व-सहायता समूहों की व्यवस्था के तहत समूह की बैठकों में सदस्यों की उपस्थिति, बचत, ऋण वितरण, ऋण की वापसी और अन्य वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जाना होता है,ऐसे में यदि किसी समूह में ऋण वितरण में गड़बड़ी हुई है तो बैठक पुस्तिका,कैशबुक,ऋण रजिस्टर और बैंक खातों का मिलान कर वास्तविक स्थिति आसानी से सामने लाई जा सकती है।
गरीब महिलाओं की जानकारी के अभाव का फायदा उठाने का आरोप-आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रिया,ऋण स्वीकृति और समूह के वित्तीय रिकॉर्ड की पूरी जानकारी नहीं होने का कथित फायदा उठाया जा सकता है,महिलाओं को यह पता नहीं चल पाता कि समूह के रिकॉर्ड में उनके नाम पर कितनी राशि दर्ज है और वास्तव में उनके खाते में कितनी राशि पहुंची,यही वजह है कि बरदर क्लस्टर सहित संदिग्ध समूहों के मामले में यह जांच महत्वपूर्ण हो जाती है कि समूह के रिकॉर्ड में दर्ज ऋण राशि और संबंधित महिला के बैंक खाते में पहुंची राशि एक समान है या नहीं, साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि ऋण का वितरण सभी सदस्यों की सहमति से हुआ या नहीं।
पीआरपी की भूमिका भी सवालों के घेरे में-सूत्रों के अनुसार समूहों में नए सदस्यों को जोड़ने और अन्य गतिविधियों से जुड़े पीआरपी को प्राप्त राशि में कथित हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इस मामले में बरदर क्लस्टर की पीआरपी यशोदा मंडल से जब समूह की बैठक में महिलाओं से लोन संबंधी भ्रष्टाचार की जानकारी होने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ‘मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, आपसे इस संबंध में जानकारी मिल रही है।’ उनका यह बयान आरोपों की पुष्टि नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि संबंधित पीआरपी ने ऐसी किसी जानकारी से अनभिज्ञता जताई है।
बैठक पुस्तिका और बैंक रिकॉर्ड की जांच जरूरी- बरदर क्लस्टर के स्व-सहायता समूहों की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो सबसे पहले समूहों की बैठक पुस्तिका,कैशबुक,ऋण रजिस्टर, बैंक स्टेटमेंट,ऋण वितरण सूची और सदस्यों से संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना जरूरी होगा,इसके साथ ही महिला सदस्यों से अलग-अलग जानकारी लेकर यह पता लगाया जा सकता है कि रिकॉर्ड में दर्ज राशि वास्तव में उन्हें मिली या नहीं,सवाल यह भी है कि क्या विभागीय अधिकारियों और मिशन से जुड़े जिम्मेदार अमले ने नियमित रूप से समूहों का निरीक्षण किया? क्या समूह के दस्तावेजों का बैंक रिकॉर्ड से मिलान कराया गया? यदि निरीक्षण हुआ तो उसकी रिपोर्ट में क्या स्थिति सामने आई?
जांच हुई तो खुल सकती है कई परतें-
स्व-सहायता समूहों का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना है, ऐसे में यदि जांच के दौरान ऋण वितरण में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, अनधिकृत राशि वसूली या कमीशनखोरी सामने आती है तो मामला गंभीर हो सकता है, वहीं केवल आरोप सामने आने के आधार पर किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, इसके लिए दस्तावेजी जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है, अब प्रमुख सवाल यही है कि क्या बरदर क्लस्टर के सभी स्व-सहायता समूहों के ऋण वितरण की विशेष जांच होगी? क्या बैठक पुस्तिका और बैंक खातों का मिलान कराया जाएगा? पीआरपी को प्राप्त राशि का पूरा हिसाब कौन सत्यापित करता है? और क्या महिला सदस्यों से सीधे पूछकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी? यदि विभाग निष्पक्ष तरीके से दस्तावेजों के साथ जमीनी जांच कराता है तो आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है, फिलहाल बरदर क्लस्टर में उठे सवालों का जवाब सरकारी जांच और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
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