छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता के मामले में पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस सवाल को जीवित कर दिया है, जिसने वर्षों से हजारों युवाओं के मन में अविश्वास पैदा कर रखा है—क्या मेहनत और प्रतिभा ही सरकारी नौकरी की सबसे बड़ी पात्रता है, या फिर व्यवस्था में सेंध लगने से ईमानदार अभ्यर्थी पीछे छूट जाते हैं? प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व अध्यक्ष को धनशोधन,कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं,बल्कि चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है।
लोक सेवा आयोग किसी भी राज्य की सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्थाओं में से एक होता है। यहां से चुने गए अधिकारी भविष्य में प्रशासन की रीढ़ बनते हैं। ऐसे संस्थान पर यदि प्रश्नचिह्न लगते हैं तो नुकसान केवल कुछ अभ्यर्थियों का नहीं होता, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यही कारण है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता पर किसी भी प्रकार का संदेह लोकतंत्र और सुशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सीजीपीएससी विवाद ने हजारों युवाओं के सपनों को झकझोर दिया। वर्षों तक कठिन परिश्रम करने वाले अभ्यर्थियों के मन में यह आशंका घर कर गई कि यदि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही तो प्रतिभा का सम्मान कैसे होगा? यही विश्वास किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि यह भरोसा कमजोर पड़ता है तो युवाओं का व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी आरोपी के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा। गिरफ्तारी दोष सिद्ध होने के समान नहीं होती। इसलिए कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। लेकिन यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो दोषियों के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जो भविष्य के लिए स्पष्ट संदेश बने।
यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति या एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि भर्ती प्रक्रिया को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाया जाए। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी,परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही,चयन प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट तथा समयबद्ध जांच जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना होगा। साथ ही आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी इतनी पारदर्शी हो कि भविष्य में किसी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न बचे।
आज छत्तीसगढ़ का युवा केवल दोषियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि व्यवस्था में स्थायी सुधार चाहता है। उसे यह भरोसा चाहिए कि उसकी मेहनत का मूल्य किसी सिफारिश, प्रभाव या कथित भ्रष्टाचार से कम नहीं आंका जाएगा। सरकार, जांच एजेंसियों और न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही है कि मामले की निष्पक्ष,पारदर्शी और समयबद्ध जांच पूरी हो तथा यदि दोष सिद्ध हो तो कानून के अनुरूप कठोर दंड सुनिश्चित किया जाए।
सरकारी नौकरी केवल एक नियुक्ति नहीं होती,बल्कि लाखों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ी होती है। इसलिए सीजीपीएससी प्रकरण का सबसे बड़ा संदेश यही होना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ना चाहिए।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur