नई दिल्ली,16 जुलाई 2026। सोनिया गांधी के आवास पर गुरुवार को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर और जयराम रमेश समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा- पार्टी ने अपनी बैठक में कई प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा की और तय किया कि विपक्षी दलों के साथ मिलकर इनके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। संसद के आगामी मानसून सत्र में सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को लाने की तैयारी कर रही है, उनका पार्टी पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने आगे कहा- कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन्हें हम विशेष रूप से उठाएंगे। जैसे चंदे की चोरी और विश्वासघात। प्रभु श्रीराम मंदिर के संबंध में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। हम अयोध्या में भाजपा और आरएसएस के रचे गए घोटाले का मुद्दा जरूर उठाएंगे। नीट और ई20 घोटाला जैसे कई मुद्दे भी हैं, जिसमें कई वरिष्ठ भाजपा नेता और उनके बेटे शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा- हमें पता चला है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री परिसीमन विधेयक को वापस लाने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार 17 अप्रैल को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रही और इस विधेयक पर उसे बड़ा झटका लगा था। अब वह विधेयक को फिर से पेश करना चाहती है। कांग्रेस इस विधेयक का पहले भी विरोध करती रही है और आगे भी करती रहेगी। साथ ही विपक्षी दलों की एकजुटता बनाए रखने की पूरी कोशिश करेगी। जयराम रमेश ने कहा कि न्यायाधीशों को हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी बैठक में चर्चा हुई। इस विधेयक की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाई गई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार किया है। कांग्रेस इस विधेयक का भी मजबूती से विरोध करेगी।
महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें, तो पूरा समर्थन देंगे
जयराम रमेश ने कहा- हमने 16 और 17 अप्रैल को वर्तमान लोकसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण के संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में महिलाओं के लिए इस एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान शामिल है। यदि आप 543 सदस्यीय लोकसभा का एक तिहाई मान लें, तो यह 181 आता है। इसलिए, महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें, और हम अपना पूरा समर्थन देंगे। हालांकि, परिसीमन विधेयक जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में पेश किया गया था, वास्तव में महिला आरक्षण की आड़ में लाया गया एक खतरनाक परिसीमन विधेयक था।
कांग्रेस एफसीआरए का भी विरोध करेगी- रमेश
यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ मानसून सत्र में लाती है तो कांग्रेस इसका पूरी तरह विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक दोबारा लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। अगर इसे फिर पेश किया गया तो पार्टी दोबारा इसका विरोध करेगी।
विदेश नीति की चुनौतियों से संबंधित मुद्दा भी उठाएंगेः रमेश
जयराम रमेश ने कहा- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में प्रस्तावित संशोधनों का भी कांग्रेस विरोध करती है। यही कानून प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का आधार है। यदि इसमें बदलाव का विधेयक संसद में लाया गया तो कांग्रेस इसका भी कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार के मौजूदा विधायी एजेंडे में ऐसा कोई विधेयक नहीं दिख रहा है, जिसका कांग्रेस समर्थन कर सके। पार्टी संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करेगी। हम विशेष रूप से विदेश नीति और उत्पन्न हुई नई चुनौतियों से संबंधित मुद्दा भी उठाएंगे। इनमें चीन और अमेरिका के साथ हमारे संबंध, साथ ही पिछले एक-दो महीनों में पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति शामिल है।
महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें…तो पूरा समर्थन देंगे
जयराम रमेश ने कहा…हमने 16 और 17 अप्रैल को वर्तमान लोकसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण के संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम,2023 में महिलाओं के लिए इस एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान शामिल है। यदि आप 543 सदस्यीय लोकसभा का एक तिहाई मान लें,तो यह 181 आता है। इसलिए,महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें,और हम अपना पूरा समर्थन देंगे। हालांकि,परिसीमन विधेयक जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में पेश किया गया था,वास्तव में महिला आरक्षण की आड़ में लाया गया एक खतरनाक परिसीमन विधेयक था।
कांग्रेस एफसीआरए का भी विरोध करेगी- रमेश
यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ मानसून सत्र में लाती है तो कांग्रेस इसका पूरी तरह विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक दोबारा लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था,जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। अगर इसे फिर पेश किया गया तो पार्टी दोबारा इसका विरोध करेगी।
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