नई दिल्ली,06 जुलाई 2026 । पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने का सीधा और सकारात्मक असर अब भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। वैश्विक संकट के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से उर्वरक और आवश्यक कच्चा माल लेकर निकले 15 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से आगे बढ़ चुके हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी प्रगति की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने साझा की है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर भारत की ओर आ रहे इन 15 जहाजों में बड़े पैमाने पर फर्टिलाइजर का स्टॉक मौजूद है। इनमें से आठ जहाजों के जरिए 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, चार जहाजों से 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी और तीन जहाजों के माध्यम से 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर भारत लाया जा रहा है। राहत का यह सिलसिला यहीं नहीं थम रहा, बल्कि आने वाले दिनों में 5 और अतिरिक्त जहाजों के भी जल्द ही भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर पैदा हुए इस आर्थिक और सामरिक संकट पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को छिन्न-भिन्न कर दिया था। इसके दुष्परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों के दाम आसमान छूने लगे थे और समुद्री रास्तों में बढ़े जोखिम के कारण शिपमेंट पहुंचने की समय-सीमा भी काफी बढ़ गई थी। इस विपरीत परिस्थिति ने न केवल भारत, बल्कि दुनिया के तमाम देशों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार इस संभावित खतरे को लेकर पहले दिन से ही सजग थी और इससे निपटने के लिए हमारी तैयारियां पूरी थीं। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फर्टिलाइजर की कीमतों में भारी उछाल आने के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका बोझ देश के अन्नदाताओं पर नहीं पड़ने दिया और किसानों के आर्थिक हितों की पूरी रक्षा की।
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