
- हर चार में से तीन परिवार बकरी पालन से चला रहे आजीविका,पशुपालन विभाग की योजनाओं का नहीं मिला लाभ
- करीब 1400 की आबादी वाले गांव में 300 परिवारों में से अधिकांश बकरी पालन से जुड़े, ग्रामीणों ने प्रशिक्षण, नस्ल सुधार, दवा और शेड निर्माण की सुविधा उपलब्ध कराने की उठाई मांग…
-ओंकार पांडेय-
सूरजपुर,05 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। विकासखंड भैयाथान की ग्राम पंचायत करौंदामुड़ा आज अपनी मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभर रही है, करीब 1400 की आबादी और लगभग 300 घरों वाले इस गांव में हर चार में से तीन परिवार बकरी पालन के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं, किसी के पास पांच बकरियां हैं तो किसी के पास 50 से 100 तक। सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण बिना किसी सरकारी सहायता या योजना का लाभ लिए वर्षों से इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पशु चिकित्सा विभाग की योजनाएं गांव तक पहुंचें तो करौंदामुड़ा पूरे जिले में बकरी पालन के हब के रूप में विकसित हो सकता है।
रोजगार के सीमित साधनों ने बनाया बकरी पालन को जीवन का आधार-कभी ग्राम पंचायत बड़सरा का आश्रित गांव रहा करौंदामुड़ा आज भी मूलभूत विकास की राह देख रहा है, स्वतंत्र पंचायत बनने के बाद भी रोजगार के बड़े अवसर गांव में उपलब्ध नहीं हो सके, खेती के साथ अतिरिक्त आय के साधन सीमित होने के कारण ग्रामीणों ने अपनी मेहनत और अनुभव के बल पर बकरी पालन को ही आय का मुख्य स्रोत बना लिया, आज गांव के अधिकांश परिवार इसी व्यवसाय से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
चारे और चरागाह की कमी के बावजूद नहीं टूटा हौसला– ग्रामीण बताते हैं कि गांव में शासकीय चरागाह भूमि लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे पशुओं के लिए चारे की समस्या बनी रहती है, इसके बावजूद लोगों ने निजी प्रयासों से बकरी पालन जारी रखा है, गांव में पेयजल के लिए अभी भी बोरवेल और कुओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 1.25 करोड़ रुपये की लागत से पानी की टंकी तो बनाई गई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वह अब तक उपयोग में नहीं आ सकी और केवल शोपीस बनकर रह गई है, हालांकि पंचायत क्षेत्र से बहने वाला कोल्हूआ नाला ग्रामीणों और पशुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है।
यदि सरकार साथ दे तो बदल सकती है गांव की तस्वीर– ग्रामीणों का मानना है कि यदि पशुपालन विभाग नस्ल सुधार, टीकाकरण, पशु चिकित्सा सुविधा, चारा विकास, शेड निर्माण तथा स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराए तो करौंदामुड़ा न केवल सूरजपुर जिले बल्कि पूरे सरगुजा संभाग में बकरी पालन का आदर्श मॉडल बन सकता है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और पलायन भी कम होगा।
सरपंच रश्मि सत्या सिंह का बयान- करौंदामुड़ा के लोगों ने बिना किसी सरकारी सहायता के बकरी पालन को आजीविका का मजबूत साधन बनाया है, गांव के अधिकांश परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं,लेकिन पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ आज तक नहीं मिल पाया, यदि शासन प्रशिक्षण, बेहतर नस्ल की बकरियां, टीकाकरण, दवाइयां और शेड निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए तो हमारा गांव पूरे जिले में बकरी पालन का मॉडल बन सकता है, हम जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि करौंदामुड़ा को विशेष योजना के तहत विकसित किया जाए, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़े और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले।
उपसरपंच मोहम्मद महमूद अंसारी का बयान- करौंदामुड़ा में बकरी पालन केवल व्यवसाय नहीं,बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार बन चुका है,ग्रामीण अपने संसाधनों से मेहनत कर इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं,लेकिन पशुपालन विभाग की ओर से न प्रशिक्षण मिला, न नस्ल सुधार,न दवाइयों और न ही किसी योजना का लाभ, यदि विभाग गांव में शिविर लगाकर हितग्राहियों का चयन करे और योजनाओं का लाभ दिलाए तो करौंदामुड़ा निश्चित रूप से बकरी पालन का हब बन सकता है, इससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पलायन पर भी रोक लगेगी।
बकरी पालक किसान जितेंद्र सिंह का बयान- ‘हम वर्षों से अपने परिवार की आजीविका के लिए बकरी पालन कर रहे हैं, बिना किसी सरकारी सहायता के मेहनत और अनुभव के आधार पर इस काम को आगे बढ़ाया है, गांव में अधिकांश परिवार बकरी पालन से जुड़े हैं, लेकिन आज तक पशुपालन विभाग की किसी योजना का लाभ नहीं मिला,यदि सरकार अच्छी नस्ल की बकरियां,टीकाकरण, दवाइयां,प्रशिक्षण,चारा विकास और शेड निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए तो हमारी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है, करौंदामुड़ा में बकरी पालन की अपार संभावनाएं हैं और उचित सरकारी सहयोग मिलने पर यह गांव पूरे जिले में बकरी पालन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। ‘
किसान नेता ने जिला प्रशासन से की पहल की मांग- क्षेत्र के किसान नेता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने जिला प्रशासन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग से मांग की है कि करौंदामुड़ा में विशेष अभियान चलाकर इच्छुक हितग्राहियों को बकरी पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए,उन्होंने कहा कि गांव में पहले से ही लोगों की रुचि और अनुभव मौजूद है,केवल सरकारी सहयोग की आवश्यकता है,यदि विभाग गंभीरता से पहल करे तो करौंदामुड़ा को ‘बकरी पालन हब’ के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे सैकड़ों परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और यह गांव ग्रामीण स्वरोजगार का सफल मॉडल बनकर सामने आएगा।
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