नई दिल्ली,30 जून 2026। नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अभी तत्काल जमानत नहीं दी जा सकती। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुनना आवश्यक समझा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब मांगा है। पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आसाराम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, और जमानत पर निर्णय लेते समय इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आसाराम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्री नायडू ने उनकी 80 वर्ष से अधिक उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सजा को निलंबित करने और अंतरिम जमानत की मांग की थी। वकील ने दलील दी कि आसाराम कई बीमारियों से जूझ रहे हैं और ‘सोशल मीडिया ट्रायल’ का शिकार हुए हैं। हालांकि, पीठ ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। जस्टिस सुंदरेश ने स्पष्ट किया कि सजा को निलंबित करने या जमानत देने पर तभी विचार किया जा सकता है, जब याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति अत्यंत गंभीर या जानलेवा हो। कोर्ट ने जेल प्रशासन को यह निर्देश भी दिया है कि आसाराम को जो मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं, वे निरंतर जारी रहनी चाहिए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने आसाराम की खराब सेहत के दावों का खंडन किया। सरकार की ओर से बेंच को अवगत कराया गया कि आसाराम को हाल ही में 2 जून को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उनके स्वास्थ्य परीक्षणों के बाद यह पाया गया कि उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर और सामान्य है। पीडि़त पक्ष के वकील ने भी ‘सोशल मीडिया ट्रायल’ वाली दलील को सिरे से खारिज कर दिया और अदालत को याद दिलाया कि यह मामला एक नाबालिग पीडि़त से जुड़ा है, जो न्याय के लिए लंबा संघर्ष कर रही है।
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