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खड़गवां/पोंडी बचरा@जिल्दा खाद घोटाले में बड़े नामों पर कार्रवाई कब?

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  • 246.75 मीट्रिक टन खाद गबन मामले में एक गिरफ्तारी,बाकी नामों पर चुप्पी क्यों?
  • पोंडी बचरा चौकी के सामने अनिश्चितकालीन आंदोलन,किसानों ने उठाए कई बड़े सवाल…


-राजेंद्र शर्मा-
खड़गवां/पोंडी बचरा,24 जून 2026 (घटती-घटना)।
किसानों के लिए आवंटित 246.75 मीट्रिक टन उर्वरक खाद के कथित गबन और अवैध बिक्री से जुड़े जिल्दा खाद घोटाले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है,मामले में जिल्दा सहकारी समिति के प्रबंधक अकिलचंद की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद अब आंदोलनकारियों और किसानों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि यदि घोटाले में केवल एक व्यक्ति जिम्मेदार था तो इतना बड़ा खेल कैसे हो गया,और यदि अन्य लोग भी इसमें शामिल थे तो उन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्षेत्र में चर्चा है कि किसानों के लिए आवंटित खाद कथित रूप से व्यापारियों तक पहुंच गई और उसे ऊंचे दामों पर बेचने की तैयारी की गई,जबकि दूसरी ओर किसान खाद के लिए परेशान होते रहे, आरोप है कि जिस समय किसानों को खेती के लिए उर्वरक की सबसे अधिक आवश्यकता थी, उसी समय उनके हिस्से का खाद कथित रूप से गायब हो गया।
एक गिरफ्तारी के बाद भी बाकी नामों पर सवाल…
मामले में अब तक हुई कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इतना बड़ा खाद घोटाला केवल एक व्यक्ति के बूते संभव था? आंदोलनकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कई नामों की चर्चा सामने आई, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है, लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी है तो पूरे नेटवर्क का खुलासा होना चाहिए,आखिर खाद का परिवहन किसने किया,उसे कहां रखा गया, किन लोगों ने खरीद-फरोख्त में भूमिका निभाई और किसके संरक्षण में पूरा कथित खेल संचालित हुआ? इन सभी सवालों के जवाब अभी भी जनता जानना चाहती है।
क्या राजनीतिक संरक्षण बन रहा ढाल?
जनआंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम चर्चा में होने के बावजूद जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है, क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है,जिसके कारण कार्रवाई सीमित दायरे में सिमटती दिखाई दे रही है, हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आंदोलनकारी खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि यदि कानून सबके लिए समान है तो फिर सभी संदिग्ध और कथित जिम्मेदार लोगों तक जांच क्यों नहीं पहुंच रही? उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल एक आरोपी को जेल भेजना नहीं होना चाहिए,बल्कि पूरे मामले की तह तक पहुंचना और हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करना होना चाहिए।
पोंडी बचरा में अनिश्चितकालीन आंदोलन
खाद घोटाले को लेकर पोंडी बचरा पुलिस चौकी के सामने अनिश्चितकालीन जनआंदोलन जारी है। आंदोलनकारी किसानों के अधिकारों और खाद घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले का खुलासा नहीं होता और सभी दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा, आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि यह केवल खाद का मामला नहीं बल्कि किसानों के भरोसे और उनके अधिकारों का प्रश्न है, यदि किसानों के हिस्से का खाद बीच रास्ते में गायब हो जाए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई न हो तो इससे पूरे सहकारी तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
जनता से साथ आने की अपील…
आंदोलनकारियों ने क्षेत्र की जनता,किसानों और सामाजिक संगठनों से इस लड़ाई में साथ आने की अपील की है, उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
कई सवालों के जवाब अभी बाकी…
मामले को लेकर अब भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब प्रशासन और जांच एजेंसियों से अपेक्षित है किसानों के हिस्से का 246.75 मीट्रिक टन खाद आखिर किन लोगों तक पहुंचा? क्या इस कथित गबन में केवल एक व्यक्ति की भूमिका थी? अन्य कथित सह-आरोपियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या राजनीतिक दबाव या संरक्षण के कारण जांच प्रभावित हो रही है? किसानों को खाद संकट झेलना पड़ा, इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या पूरे मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में जांच की दिशा और प्रशासन की मंशा दोनों को स्पष्ट करेंगे, फिलहाल क्षेत्र की जनता और किसान एक ही मांग कर रहे हैं—खाद घोटाले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो।


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