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नई दिल्ली@डीआरडीओ दुश्मन के मिसाइल खतरों से निटपने किया डिफेंस प्रणाली और रुद्रम-2 का परीक्षण

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रक्षा मंत्री ने अहम तकनीकों का सफल प्रदर्शन पर डीआरडीओ को दी बधाई…
नई दिल्ली,13 जून 2026। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने दुश्मन के अलग-अलग तरह के खतरों के खिलाफ देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली तकनीकों का प्रदर्शन किया है। लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी पर एंटी-शिप क्षमता के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड डिफेंस का प्रदर्शन करने के लिए 10 और 11 जून को तीन फ्लाइट टेस्ट किए गए। मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इंटरसेप्टर्स ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन सिस्टम्स को मिसाइल से जुड़े नए खतरों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीकों से डिजाइन और विकसित किया गया है। इन परीक्षणों ने देश को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता वाली बीएमडी प्रणाली मौजूद है। नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का पहला फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक किया। इन फ्लाइट टेस्ट को डीआरडीओ और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन अहम तकनीकों का सफल प्रदर्शन करने पर डीआरडीओ को बधाई दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इन परीक्षणों पर बारीकी से नजर रखी और डीआरडीओ और इंडस्ट्री की कोशिशों की तारीफ की। इसके पहले डीआरडीओ और आईएएफ ने वायु से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक रुद्रम-2 मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह परीक्षण हवाई प्लेटफॉर्म से किया गया, जिसने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता और उन्नत तकनीकी क्षमताओं को सफलतापूर्वक साबित कर दिया। डीआरडीओ ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि रुद्रम-2 मिसाइल का परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ के तहत किया गया। इन परीक्षणों में मिसाइल की सभी प्रमुख उपप्रणालियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरी उतरीं।
रुद्रम-2 मिसाइल को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित इमारत अनुसंधान केंद्र ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसके विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल),उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल),शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एआरडीई) और एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) समेत कई प्रमुख प्रयोगशालाओं का अहम योगदान रहा।


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