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कोरिया@बिजली विभाग से विधानसभा तक,क्या कोरिया में ‘एमडी ऊर्जा’ खोज रही भाजपा नई पावर?

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  • हाई वोल्टेज राजनीति में क्या बिजली विभाग के साहब कोरिया में जोड़ रहे हैं विधानसभा का कनेक्शन?
  • करंट वाली राजनीति में कोरिया में साहब का बढ़ता प्रेम क्या चुनावी संकेत?
  • ससुराल से सत्ता तक : बैकुंठपुर में नई राजनीतिक वायरिंग की चर्चा
  • बिजली के साहब की राजनीतिक चमक, क्या 2028 में मैदान में उतरेंगी धर्मपत्नी?
  • हाई वोल्टेज एंट्री की तैयारी? कोरिया में बढ़ी बड़े अफसर की राजनीतिक सक्रियता
  • मूर्ति अनावरण से भागवत कथा तक,क्या कोरिया में तैयार हो रही चुनावी पटकथा?
  • सरकारी मंच या चुनावी लॉन्चिंग पैड? कोरिया में साहब की सक्रियता चर्चा में
  • बिजली बिल माफी से वोट कनेक्शन तक, कोरिया में नई ऊर्जा की हलचल
  • पहले बिजली जोड़ते थे साहब,अब वोट का कनेक्शन जोड़ने की तैयारी!
  • भागवत कथा के बहाने सत्ता कथा? कोरिया में हाई वोल्टेज चर्चा
  • मीटर रीडिंग से वोट रीडिंग तक पहुंची साहब की राजनीति
  • ससुराल से शुरू हुआ संबंध अब राजनीति तक पहुंचने की चर्चा में…


-रवि सिंह-
कोरिया,30 मई 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले की राजनीति इन दिनों किसी सामान्य राजनीतिक गतिविधि से ज्यादा हाई वोल्टेज प्रयोग में बदलती दिखाई दे रही है, जिले के चौराहों, सरकारी दफ्तरों,भाजपा कार्यालयों और यहां तक कि चाय दुकानों में भी एक ही चर्चा है क्या प्रदेश के बिजली विभाग के एक बड़े अधिकारी अब कोरिया की राजनीति में अपनी नई ऊर्जा प्रवाहित करने की तैयारी कर चुके हैं? और क्या उनकी धर्मपत्नी 2028 विधानसभा चुनाव में भाजपा की संभावित महिला प्रत्याशी बन सकती हैं? राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अचानक पैदा नहीं हुई, पिछले एक साल से जिले में जिस तरह से साहब का सपत्नीक आना-जाना बढ़ा है, धार्मिक आयोजनों में सक्रियता दिखाई दी है, मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में मंच साझा हुआ है और सामाजिक संपर्क बढ़ाए गए हैं, उसने इस चर्चा को धीरे-धीरे अफवाह से राजनीतिक संभावना में बदल दिया है, अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया कि साहब कोरिया क्यों आ रहे हैं, बल्कि सवाल यह बन गया है कि आखिर कोरिया से इतना प्रेम क्यों उमड़ रहा है?
बिजली विभाग से राजनीति तक, आखिर क्या है नई ऊर्जा का राज?- प्रदेश के बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को लेकर चर्चा है कि वह खुद चुनावी मैदान में उतरें या न उतरें,लेकिन अपनी धर्मपत्नी को भाजपा से चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं, कहा जा रहा है कि बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र को लेकर पिछले एक साल से जमीन तैयार की जा रही है, व्यंग्यात्मक रूप से लोग कहने लगे हैं कि साहब अब ट्रांसफार्मर कम और राजनीतिक समीकरण ज्यादा फिट कर रहे हैं, दरअसल राजनीति में अचानक सक्रियता का यह पैटर्न नया नहीं है, पहले सामाजिक कार्यक्रम, फिर धार्मिक आयोजन, फिर जनता के बीच संपर्क और उसके बाद राजनीतिक चर्चा यह वही फार्मूला है जिससे कई नए चेहरे राजनीति में उतरते रहे हैं, कोरिया जिले में भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता दिख रहा है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में बढ़ी मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चाएं- जिले में हाल ही में हुए कई कार्यक्रमों में साहब और उनकी धर्मपत्नी की मौजूदगी ने चर्चाओं को और हवा दे दी, मूर्ति अनावरण कार्यक्रम हो, खेल आयोजन हो या बिजली बिल माफी से जुड़ा सरकारी कार्यक्रम—हर जगह उनकी सक्रिय भागीदारी लोगों को राजनीतिक संकेत देती नजर आई, हालांकि आधिकारिक रूप से इन कार्यक्रमों को सामाजिक और पारिवारिक स्वरूप का बताया गया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मंचों के जरिए जनता के बीच पहचान मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, विशेष रूप से उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब बिजली विभाग के कार्यक्रम में साहब की धर्मपत्नी सरकारी मंच पर दिखाई दीं। इसके बाद विभाग के भीतर ही यह चर्चा शुरू हो गई कि अब बिजली सप्लाई के साथ राजनीतिक सप्लाई की तैयारी भी चल रही है।
भागवत कथा या राजनीतिक कथा?-कोरिया जिले में प्रस्तावित भव्य भागवत कथा आयोजन ने भी राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी, चर्चा थी कि इस आयोजन में मुख्यमंत्री का आगमन भी हो सकता है, हालांकि फिलहाल आयोजन टल गया है, लेकिन जिले में लोग इसे सिर्फ धार्मिक आयोजन मानने को तैयार नहीं हैं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के जरिए सामाजिक स्वीकार्यता और जनसंपर्क मजबूत करने की कोशिश लंबे समय से राजनीति का हिस्सा रही है, कथा के मंच पर जहां श्रद्धालु जुटते हैं,वहीं राजनीतिक समीकरण भी चुपचाप तैयार होते हैं, जिले में लोग व्यंग्य करते हुए कह रहे हैं पहले कथा में मोक्ष मिलता था, अब टिकट की संभावना भी मिलने लगी है।
भाजपा के पुराने नेताओं की बढ़ी बेचैनी- इस पूरी चर्चा से भाजपा के स्थानीय नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं में बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है, वर्षों से संगठन में मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं को अब डर सताने लगा है कि कहीं चुनाव के समय कोई पैराशूट प्रत्याशी ऊपर से न उतार दिया जाए,राजनीति में सबसे बड़ा झटका चुनाव हारने का नहीं,बल्कि टिकट कटने का माना जाता है, यही कारण है कि जिले के कई पुराने नेता अचानक ज्यादा सक्रिय हो गए हैं, कोई मंदिरों में दिख रहा है, कोई सामाजिक कार्यक्रमों में,तो कोई जनता से संपर्क बढ़ाने में जुट गया है, भाजपा के भीतर भी यह चर्चा है कि पार्टी अगले चुनाव में महिला चेहरा सामने ला सकती है, बैकुंठपुर विधानसभा में भाजपा के पास मजबूत महिला नेतृत्व की कमी लंबे समय से महसूस की जाती रही है, ऐसे में प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत परिवार से आने वाला नया चेहरा पार्टी के लिए विकल्प बन सकता है।
आर्थिक ताकत और सत्ता से जुड़ाव बना बड़ी चर्चा का कारण-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनाव बेहद खर्चीले होंगे, ऐसे में भाजपा ऐसे उम्मीदवारों की तलाश कर सकती है जो आर्थिक रूप से मजबूत हों और संगठन व सत्ता दोनों से अच्छे संबंध रखते हों, साहब की संघ से नजदीकी और मुख्यमंत्री के विभाग से जुड़ाव को भी संभावित राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है, भाजपा की राजनीति में संगठन और सत्ता दोनों से समीकरण होना टिकट की राह आसान बना सकता है, यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर चर्चा और अटकलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
जनता पूछ रही—बिजली सुधरेगी या राजनीति चमकेगी?-इस पूरी राजनीतिक चर्चा के बीच आम जनता अपनी समस्याओं को लेकर भी व्यंग्य करने लगी है, गांवों में लोग पूछ रहे हैं हमारे गांव की बिजली तो ठीक नहीं हो पाई,लेकिन साहब की राजनीति जरूर चमकने लगी है,कोरिया जिले में आज भी कई इलाकों में बिजली,सड़क,स्वास्थ्य और रोजगार जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। लेकिन इन मुद्दों से ज्यादा चर्चा अब संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक रणनीतियों की हो रही है।
2028 की तैयारी या सिर्फ राजनीतिक अफवाह?-फिलहाल पूरे मामले में न तो साहब की तरफ से कोई बयान आया है और न भाजपा ने किसी प्रकार की पुष्टि की है,लेकिन राजनीति में अक्सर वही बातें सच साबित होती हैं जिन्हें शुरुआत में सिर्फ चर्चा कहा जाता है, कोरिया जिले में अभी से 2028 विधानसभा चुनाव की आहट महसूस होने लगी है, और इस बार यह आहट किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ अधिकारी की बढ़ती सक्रियता से सुनाई दे रही है, अब आने वाला समय बताएगा कि यह सब केवल संयोग है, सामाजिक जुड़ाव है या सचमुच भाजपा की नई चुनावी रणनीति का हिस्सा, लेकिन फिलहाल कोरिया की राजनीति में इतना जरूर कहा जा रहा है इस बार विधानसभा चुनाव में करंट थोड़ा ज्यादा तेज रहने वाला है।
ससुराल का राजनीतिक नेटवर्क बना सबसे बड़ी ताकत-
साहब की संभावित राजनीतिक रणनीति में सबसे बड़ी ताकत उनकी ससुराल को माना जा रहा है, जिले में उनके ससुराल पक्ष का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पहले से मौजूद है, यही नेटवर्क भविष्य की राजनीति की जमीन तैयार करने में मददगार माना जा रहा है, भारतीय राजनीति में रिश्तेदारी हमेशा से बड़ा फैक्टर रही है, कई नेताओं का पूरा राजनीतिक करियर परिवार और रिश्तों के सहारे खड़ा हुआ है, ऐसे में कोरिया में भी यही मॉडल दोहराने की संभावना जताई जा रही है, लोग मजाक में कहते नजर आ रहे हैं राजनीति में अब संगठन से ज्यादा मजबूत ससुराल चाहिए।
बिजली विभाग में भी शुरू हुई चुनावी फुसफुसाहट
सबसे दिलचस्प स्थिति बिजली विभाग के भीतर दिखाई दे रही है, विभाग के कर्मचारियों के बीच अब फाइलों से ज्यादा राजनीति की चर्चा होने लगी है। कर्मचारी मजाक में कहते हैं कि पहले साहब बिजली के फॉल्ट देखते थे, अब विधानसभा सीट का सर्वे देख रहे हैं, कुछ कर्मचारी यह भी कहते सुनाई दे रहे हैं कि विभागीय दौरे अब सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि राजनीतिक निरीक्षण जैसे लगने लगे हैं, हालांकि विभागीय स्तर पर कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।


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